दैनिक भास्कर से वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार
दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन ने वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह को 2025 का साहित्य श्री सम्मान देने का ऐलान किया, जो हिंदी दिवस पर प्रदान किया जाएगा। उनके शोधपरक लेखन और समाज सेवा ने पत्रकारिता को नई ऊंचाइयां दीं।
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025
हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में चार दशकों से योगदान दे रहे वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह को दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन ने 2025 का प्रतिष्ठित ‘सम्मेलन साहित्य श्री सम्मान’ से नवाजने का फैसला किया है। यह सम्मान हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, अरविंद कुमार सिंह उन चुनिंदा पत्रकारों में हैं जिन्होंने समाचार लेखन को मात्र पेशा न बनाकर समाज और देश के प्रति सेवा का माध्यम बनाया। ग्रामीण जीवन, किसानों, संसद, शिक्षा और स्वाधीनता आंदोलन जैसे विषयों पर उनके गहरे शोध और लेखन ने उन्हें पत्रकारिता की दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन दर्शाता है कि सच्ची पत्रकारिता समाज की आत्मा से जुड़ी होती है।


बस्ती के छोटे गांव से शुरू हुआ सफर
अरविंद कुमार सिंह का जन्म 7 अप्रैल 1965 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के गुंडा कुंवर गांव में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री (एमजेएमसी) इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त हुई। छात्र जीवन से ही इतिहास और साहित्य में उनकी रुचि रही, जो उनके लेखन की मजबूत नींव बनी।
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चार दशकों का समर्पित योगदान
अरविंद सिंह ने 1983 में ‘जनसत्ता’ से संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की और तब से हर भूमिका को बखूबी निभाया। ‘चौथी दुनिया’ में चीफ रिपोर्टर और संपादकीय प्रभारी, ‘अमर उजाला’ में ब्यूरो प्रमुख, ‘जनसत्ता एक्सप्रेस’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में राजनीतिक संपादक, ‘हरिभूमि’ में स्थानीय संपादक के साथ-साथ रेलवे बोर्ड में हिंदी संपादक और राज्यसभा टीवी में लगभग दस साल तक संसद व कृषि मुद्दों पर नई दृष्टि पेश की।


शोध और साहित्य में अविस्मरणीय छाप
अरविंद कुमार सिंह केवल पत्रकार ही नहीं, एक मंझे हुए शोधकर्ता और लेखक भी हैं। उनकी पुस्तक ‘भारतीय डाक’ (12 वर्षों के शोध के बाद प्रकाशित) आज भारतीय डाक व्यवस्था का प्रामाणिक दस्तावेज मानी जाती है। ‘भारत में जल परिवहन’ पर उनकी रचना को केंद्र सरकार ने राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया। ‘अयोध्या विवाद – एक पत्रकार की डायरी’, ‘डाक टिकटों में भारत दर्शन’ और कई अंतरराष्ट्रीय पुस्तकों के हिंदी अनुवाद उनके साहित्यिक योगदान को दर्शाते हैं। उनकी रचना ‘चिट्ठियों की अनूठी दुनिया’ एनसीईआरटी की कक्षा 8 की हिंदी पुस्तक में शामिल है, जिसे देशभर के छात्र वर्षों से पढ़ रहे हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कारों की शानदार सूची
उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए देशभर में प्रशंसा मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके अलावा भारतीय प्रेस परिषद का ग्रामीण पत्रकारिता सम्मान, राष्ट्रपति साक्षरता पुरस्कार, डॉ. राधाकृष्णन संसदीय पत्रकारिता पुरस्कार और हिंदी अकादमी का साहित्यकार सम्मान जैसे दर्जनों राष्ट्रीय पुरस्कार उनके नाम हैं।
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मीडिया और समाज में सक्रिय भूमिका
अरविंद सिंह ने आकाशवाणी, दूरदर्शन, NDTV, BBC, लोकसभा टीवी जैसे 400 से अधिक मंचों पर वार्ताओं में भाग लिया। संसद, कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वाधीनता आंदोलन पर उनकी गहरी समझ को सराहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, ताजिकिस्तान की संसद और सम्मेलनों की रिपोर्टिंग भी उनके करियर का हिस्सा रही। IIMC, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी हिंदी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में वे परीक्षक, वक्ता और पाठ्यक्रम सलाहकार के रूप में सक्रिय रहे, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर।
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