शिक्षा में क्रांति की मशाल
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2025। डॉ. विजय पवार, दिल्ली पब्लिक इंटरनेशनल स्कूल (डीपीआईएस) के चेयरमैन, शिक्षा को समाज और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बना रहे हैं। उनकी दृष्टि है कि शिक्षा केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि चरित्र, संस्कार और नेतृत्व का निर्माण है। “शिक्षा समावेशी, नवाचारी और प्रभावशाली होनी चाहिए,” यह उनका मूलमंत्र है। डीपीआईएस के माध्यम से वे हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचा रहे हैं, जो भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
डीपीआईएस: संस्कृति और आधुनिकता का संगम
सीमित संसाधनों से शुरू हुआ डीपीआईएस आज देशभर में अपनी शाखाओं के साथ शिक्षा का परचम लहरा रहा है। डॉ. पवार के नेतृत्व में यह संस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सिद्धांतों पर चलती है, जहां विद्यार्थी न केवल परीक्षा, बल्कि जीवन में उत्कृष्टता के लिए तैयार होते हैं। भारतीय संस्कृति, योग, और आधुनिक तकनीक का समन्वय डीपीआईएस की पहचान है। इसकी उपलब्धियों को 540 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
‘सड़क से स्कूल तक’ का जनआंदोलन
डॉ. पवार का “सड़क से स्कूल तक” मिशन शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प है। इस पहल ने हजारों आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त या रियायती शिक्षा प्रदान की, जिससे उनका जीवन बदल रहा है। यह मिशन अब एक जनआंदोलन बन चुका है, जो समानता और अवसर की भावना को मजबूत करता है। डॉ. पवार का कहना है, “शिक्षा तब सार्थक है, जब वह हर बच्चे को सम्मान और सशक्तिकरण दे।”
राष्ट्रीय मंच पर सम्मान
डॉ. पवार की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। 2024 में उन्हें Ironman Leadership Award से सम्मानित किया गया, और 29वें National Spotlight Education Summit में विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। हार्वर्ड-प्रशिक्षित बाल मनोरोग विशेषज्ञ के रूप में, उन्होंने डीपीआईएस में डिजिटल तकनीक, स्किल-बेस्ड लर्निंग, और भावनात्मक साक्षरता को शामिल किया। उनकी यह सोच 21वीं सदी के विद्यार्थियों को ज्ञान, संवेदना और नेतृत्व का संतुलन प्रदान कर रही है।
राष्ट्र निर्माण की धारा
डॉ. विजय पवार का जीवन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि शिक्षा को मिशन बनाकर राष्ट्र निर्माण संभव है। डीपीआईएस के पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति और आधुनिक विज्ञान का समावेश विद्यार्थियों को करियर और जीवन दोनों में सफल बना रहा है। उनकी दूरदृष्टि और समर्पण ने शिक्षा को एक सशक्त धारा बनाया, जो विद्यार्थी, शिक्षक और समाज को मिलाकर भारत को विश्वगुरु की राह पर ले जा रही है।
