पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं का खेल: उपेंद्र कुशवाहा से जीतनराम मांझी तक, जातिवादी नेताओं की साजिशें उजागर – क्या सामान्य जातियां जागेंगी?
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2025: भारतीय राजनीति में जातिवाद का जहर कितना गहरा घुस गया है, ये देखने को मिल रहा। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में वोटबैंक की राजनीति चरम पर। लेकिन सवाल ये – क्या ये सच्चाई है या मजबूरी? ठाकुर RP सिंह, दुर्गबंश अखंड राजपूताना के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ने चेतावनी दी – “देश बचाने वाले राजपूत नेता पहले खुद को बचाएं।” उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी को टिकट, जीतनराम मांझी की बहू-सामधी की लॉबिंग – ये पारिवारिक महत्वाकांक्षाएं लोकतंत्र को खोखला कर रही। क्या सामान्य जातियां अब जागेंगी? आइए, इस जातिगत राजनीति के काले खेल की परतें खोलें, जहां गुस्सा, साजिश और एकता का संदेश सुलग रहा।
पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं का कड़वा सच: गरीबों की आवाज बनकर अपना घर भरें
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में पत्नी को NDA कोटे से सीट, जीतनरम मांझी की बहू और समधी को टिकट – ये जातिवादी नेताओं का नया हथियार। ठाकुर RP सिंह बोले, “ये गरीबों की आवाज बनकर अपना परिवार सेट करते।” राजभर, निभर, पटेल, मांझी जैसे नेताओं का खेल – राष्ट्रीय दलों से गठबंधन, फिर सौदेबाजी। सवाल – क्या ये लोकतंत्र है या परिवारवाद? सिंह ने कहा, “गरीब भजन मंडली बनकर रह गए।”

सामान्य जातियों की अनदेखी: कंबल बांटने वाले नेता खुद कंगाल!
ठंड में राजपूत नेता कंबल वितरण कर फोटो खिंचवाते, लेकिन गरीबों को साधारण कपड़ा भी न दें। सिंह बोले, “गरीब भजन, केंद्रीय मंत्री, बोर्ड उपाध्यक्ष – कुछ नहीं।” त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में समर्थन, लेकिन सांसद-विधायक बनने पर भूल गए। “सामान्य जाति की बेटी की शादी में सगुन तक न दें, फिर इज्जत की दुहाई!” – सिंह का तंज सटीक। क्या सामान्य जातियां अब जागेंगी?
उत्तर प्रदेश का जातिगत खेल: राष्ट्रीय दलों में हिस्सेदारी, सामान्य जाति उपेक्षित
UP में राजभर, निभर, पटेल, मांझी जैसे नेता राष्ट्रीय दलों से गठबंधन कर सौदेबाजी। सिंह बोले, “गरीबी और सामाजिक स्थिति मजबूत करने का बहाना।” सामान्य जाति को साधन-संसाधन जुटाने का काम, सम्मान के नाम पर ठगा। “नेशनल पार्टियों में उनकी हिस्सेदारी, सामान्य जाति को राष्ट्रभक्त का तमगा।” ये खेल लोकतंत्र को कमजोर कर रहा – सवाल उठा रहा।
कड़वा सच: दबी-कुचली जातियां नेतृत्व को समर्थन, फिर भूल
सामान्य जाति के नेता उलाहना देते, लेकिन दरवाजे पर इज्जत बचाने की दुहाई। सिंह बोले, “क्षमता न समझने से मजबूर।” गरीब घर की बेटी की शादी में सगुन न देना, फिर वोट मांगना – ये दोहरा चरित्र। “जातिवाद का जवाब एकता से, परिवारवाद को हराएं।” राजपूत को जीतना मुश्किल, लेकिन हरा सकते।
निष्कर्ष: जातिवाद का अंत, एकता का संकल्प
ठाकुर RP सिंह बोले, “जातिगत राजनीति जटिल, लेकिन समाधान एकता।” पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं को हराकर बताएं – हम भी देश का हिस्सा। सोशल मीडिया पर #EndCastePolitics ट्रेंड, लोग बोले – “एकता ही ताकत।” क्या सामान्य जातियां जागेंगी? ये समय बताएगा, लेकिन संदेश साफ – जातिवाद का अंत, लोकतंत्र की जीत!
लेखक: ठाकुर RP.SINGH दुर्गबंश, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखंड Rajputana सेवा संघ
