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Wednesday, 04 Feb 2026

कोर्ट आदेश की बेशर्म अवहेलना: नारनौल के सील मॉल पर मालिक का चेतावनी भरा बोर्ड—’2-3 दिन में फिर खुलेगा’, नगर परिषद अलर्ट

हरियाणा के महेंद्रगढ़ में अवैध निर्माण पर सख्ती के बावजूद मॉल मालिक लाजपत यादव ने ठेंगा दिखाया; दो साल पुरानी कोर्ट राहत खत्म, 7 नवंबर को फिर सील—अब क्या होगी अगली कार्रवाई?

नारनौल, 09 नवंबर 2025। हरियाणा के नारनौल शहर में कानून की खुलेआम अवहेलना का एक नया मामला सामने आया है, जहां महेंद्रगढ़ रोड पर स्थित लाजपत यादव के चार मंजिला ‘सील मॉल’ पर मालिक ने अदालती आदेश को ताक पर रखते हुए एक चुनौतीपूर्ण बोर्ड टांग दिया है। बोर्ड पर साफ लिखा है: “2 से 3 दिन में फिर खुलेगा।” यह घटना न केवल कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाने वाली है, बल्कि स्थानीय प्रशासन के लिए भी चुनौती बन गई है। रोडवेज के पूर्व जीएम रह चुके लाजपत यादव का यह मॉल बिना चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) की अनुमति के वर्षों से संचालित हो रहा था, जिसके चलते कोर्ट ने इसे सील करने का सख्त निर्देश दिया था।

दो साल की मोहलत खत्म, फिर सील—फिर भी दंभ
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (EO) सुशील कुमार ने बताया कि मॉल का बिल्डिंग प्लान और CLU दोनों ही पास नहीं हैं। दो साल पहले मॉल को पहली बार सील किया गया था, जब मालिक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने CLU लेने के लिए दो साल की मोहलत दी थी, जो 4 नवंबर 2025 को समाप्त हो चुकी। इसके बाद 5 नवंबर को नोटिस जारी किया गया और 7 नवंबर को म्यूनिसिपल एक्ट की धारा 208 के तहत मॉल को दोबारा सील कर दिया गया। यह चार मंजिला इमारत लगभग 2,000 वर्ग गज क्षेत्र में बनी है, जो अवैध निर्माण का जीता-जागता उदाहरण है।

EO सुशील कुमार ने कहा, “मालिक को सभी नोटिस दिए गए थे। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए हमने कार्रवाई की। लेकिन अब यह बोर्ड लगाकर वे कानून को चुनौती दे रहे हैं। हम इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजेंगे और आगे की कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।” नगर परिषद के अनुसार, यह मॉल व्यावसायिक उपयोग के लिए बनाया गया, लेकिन भूमि का उपयोग कृषि या अन्य उद्देश्य के लिए था, जिसके बिना CLU अनिवार्य है।

पिछले विवादों का इतिहास: सील-खुला का खेल
यह पहला मौका नहीं है जब इस मॉल पर कार्रवाई हुई हो। 2022 में भी नारनौल नगर परिषद ने शहर में दो चार मंजिला इमारतों—इनमें से एक यह मॉल ही था—को अनियमितताओं के चलते सील किया था। उस समय भी मालिक ने कोर्ट का सहारा लिया था, लेकिन निर्धारित समय में CLU न लेने पर अब सख्ती बरती गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मॉल अवैध निर्माण का प्रतीक बन चुका है, जो शहर की यातायात और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा था। एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “मॉल मालिक का रसूख है, इसलिए कार्रवाई में देरी हुई। लेकिन अब बोर्ड लगाकर वे सबको ललकार रहे हैं—क्या प्रशासन चुप्पी साध लेगा?”

क्या होगी अगली कार्रवाई? प्रशासन की चुप्पी तोड़ी
नगर परिषद ने मॉल मालिक के खिलाफ अवमानना का केस दर्ज करने पर विचार कर रही है। हरियाणा बिल्डिंग ऑपरेशन कंट्रोल अथॉरिटी (HUDA) के नियमों के तहत अवैध निर्माण पर जुर्माना, ध्वस्तीकरण या आपराधिक मुकदमा चल सकता है। EO ने चेतावनी दी कि बोर्ड हटाने और कोर्ट आदेश का पालन न करने पर तत्काल कार्रवाई होगी। यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था की पोल खोल रहा है, बल्कि अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही राज्यव्यापी मुहिम को भी चुनौती दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं संपत्ति मालिकों को प्रोत्साहित करती हैं, जिससे शहरों में अनियोजित विकास बढ़ता है।

नारनौल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई भी कोर्ट आदेश की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मॉल मालिक लाजपत यादव की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बोर्ड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है l

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