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Wednesday, 04 Feb 2026

दिल्ली की हवा बनी घातक जहर: AQI 361 के साथ ‘बहुत खराब’, पराली का धुआं 31% तक योगदान; सांस के मरीजों पर संकट, मंगलवार तक कोई राहत नहीं

सुबह धुंध-स्मॉग की चादर, दृश्यता 900 मीटर तक घटी; नोएडा सबसे प्रदूषित (AQI 354), फरीदाबाद सबसे साफ (264); 200 एंटी-स्मॉग गन तैनात, लेकिन PM2.5 स्तर 190 µg/m³ से ऊपर

नई दिल्ली, 09 नवंबर 2025। राजधानी दिल्ली में ठंडी हवाओं और पड़ोसी राज्यों से आ रहे पराली जलाने के धुएं ने हवा को जहरीला बना दिया है। सुबह की शुरुआत धुंध, हल्के कोहरे और स्मॉग की चादर से हुई, जिससे लोगों की सांसें उखड़ रही हैं। सांस के रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, जहां आंखों में जलन, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शनिवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 361 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। यह शुक्रवार के 322 से 39 अंक की तेज वृद्धि दर्शाता है।

पराली धुआं प्रमुख दोषी: 30% से ज्यादा PM2.5 में योगदान
वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) के अनुसार, शनिवार को हवा में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का योगदान 30.915% रहा। रविवार को यह 31.246% तक पहुंचने की आशंका है, जो PM2.5 स्तरों में सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है। शाम 4 बजे PM10 का स्तर 324.3 µg/m³ और PM2.5 का 190.2 µg/m³ दर्ज किया गया, जो सुरक्षित सीमा (PM2.5: 60 µg/m³) से कई गुना ऊपर है। वाहनों से उत्सर्जन का योगदान 15.321% रहा। ठंडी हवाओं ने प्रदूषक कणों को हवा में घोल दिया है, जिससे वेंटिलेशन इंडेक्स 9000 m²/s और मिश्रण गहराई 1500 मीटर रही। CPCB का पूर्वानुमान है कि मंगलवार तक AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बरकरार रहेगा, और इस हफ्ते ‘गंभीर’ स्तर (401+) छूने की संभावना है—पिछली बार ऐसा 23 दिसंबर 2024 को हुआ था जब AQI 406 पहुंचा।

धुंध ने घेरा शहर, दृश्यता घटी—लोग मास्क के सहारे
सुबह 6:30 बजे सफदरजंग एयरपोर्ट पर दृश्यता मात्र 900 मीटर थी, जो 8 बजे बढ़कर 1200 मीटर हुई। आसमान पर कुहासे के साथ स्मॉग की मोटी चादर छाई रही, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया। सांस के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है, जबकि लोग मास्क पहनकर घर से निकल रहे हैं। दिल्ली के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से अधिकांश पर AQI ‘बहुत खराब’ रिकॉर्ड हुआ, हालांकि कुछ इलाकों में यह ‘मध्यम’ रहा। दीपावली के बाद से GRAP-2 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) के प्रतिबंध लागू हैं, लेकिन पराली जलाने की घटनाओं (पंजाब-हरियाणा में 3,284 मामले) ने स्थिति बिगाड़ दी।

NCR में नोएडा सबसे प्रदूषित, फरीदाबाद अपेक्षाकृत साफ
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दिल्ली के बाद नोएडा की हवा सबसे ज्यादा जहरीली रही, जहां AQI 354 (‘बहुत खराब’) दर्ज हुआ। यहां सांस रोगियों को गंभीर तकलीफ और आंखों में जलन की शिकायतें बढ़ीं। गाजियाबाद (339), ग्रेटर नोएडा (336) और गुरुग्राम (236) भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहे। वहीं, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही (AQI 264, ‘खराब’ श्रेणी)। पश्चिमी हवाओं की गति 16 किमी/घंटे रही, लेकिन यह प्रदूषण को फैलाने में अपर्याप्त साबित हुई।

200 एंटी-स्मॉग गन तैनाती: धूल पर काबू की कोशिश, लेकिन चुनौतियां बरकरार
बढ़ते प्रदूषण को काबू करने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने 59 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसके तहत फरवरी तक 200 ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गनों को किराये पर लिया जाएगा। ये गन दो शिफ्टों (8-8 घंटे) में धूल-प्रधान इलाकों में तैनात होंगी, जहां प्रत्येक की औसत लागत 29.41 लाख रुपये है। PWD के ईस्ट जोन ने 6 नवंबर को आदेश जारी किया, जिसमें पर्यावरण जागरूकता संदेश भी प्रदर्शित करने के निर्देश हैं। सुप्रीम कोर्ट के धूल नियंत्रण के सख्त आदेशों के बाद 2018 से ये गन इस्तेमाल हो रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पराली और वाहनों पर सख्ती के बिना स्थायी समाधान मुश्किल।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी: बाहर निकलने से बचें, मास्क अनिवार्य
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि AQI 300 से ऊपर होने पर बाहरी गतिविधियां बंद रखें, खासकर बच्चे और बुजुर्ग घर पर रहें। PM2.5 के उच्च स्तर से फेफड़ों और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। दिल्ली सरकार ने स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस और निर्माण कार्यों पर रोक लगाई है। इस साल अभी तक कोई ‘गंभीर’ दिन नहीं आया, लेकिन मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड बढ़ने से स्थिति और बिगड़ सकती है। जनता की मांग है कि केंद्र और राज्य मिलकर पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं।

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