नई दिल्ली, 14 नवंबर 2025। टेक्नोलॉजी का दौर जो वादा करता था चमकदार भविष्य का, आज उसी की चमक फीकी पड़ रही है। इस साल अब तक 218 कंपनियों में टेक छंटनियां 2025 का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा—कुल 1,12,732 कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। AI ऑटोमेशन और लागत कटौती के नाम पर दिग्गज जैसे अमेजन, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और भारत की TCS ने हजारों को सड़क पर ला दिया। अमेजन ने 30,000 कॉर्पोरेट जॉब्स काटे, इंटेल ने 24,000 (करीब 22% वर्कफोर्स), जबकि TCS ने 20,000 से ज्यादा को बाहर का रास्ता दिखाया। भारत की IT सेक्टर पर भी गाज गिरी—TCS, इंफोसिस, विप्रो जैसी कंपनियों में मिड-लेवल रोल्स सबसे ज्यादा प्रभावित। विशेषज्ञ कहते हैं, ये सिर्फ नंबर नहीं, लाखों परिवारों का संकट है। ग्लोबल अनिश्चितता, बजट कट और AI की रफ्तार ने पारंपरिक जॉब्स को खत्म कर दिया। लेकिन सवाल ये कि क्या ये छंटनियां नई शुरुआत हैं या टेक वर्कर्स के लिए अंत? आइए, आंकड़ों और कहानियों से समझते हैं इस तूफान को।
टेक छंटनियां 2025: आंकड़ों की मार्मिक तस्वीर, AI का हाथ साफ
ग्लोबल तहलका: 1 लाख+ जॉब्स गायब, अमेजन-इंटेल आगे
2025 को टेक इंडस्ट्री का ‘रिस्ट्रक्चरिंग ईयर’ कहें तो अचरज नहीं। Layoffs.fyi के अनुसार, जनवरी से नवंबर तक 218 कंपनियों में 1,12,732 छंटनियां हुईं—फरवरी में ही 16,084 जॉब्स गईं। AI ऑटोमेशन को 25% केस में जिम्मेदार ठहराया गया, जहां रूटीन टास्क जैसे कोडिंग, टेस्टिंग और कस्टमर सपोर्ट मशीनें संभाल रही हैं। अमेजन ने 30,000 कॉर्पोरेट पोजिशन्स काटे—HR, क्लाउड और ऑपरेशन्स पर फोकस। इंटेल ने 24,000 (US, जर्मनी, पोलैंड में) कटे, चिप प्रोडक्शन को AI-सेंट्रिक बनाने के लिए। माइक्रोसॉफ्ट ने 15,000 (7% ग्लोबल स्टाफ), गूगल ने क्लाउड और HR में 9,000, जबकि मेटा ने 4,000 कटे।
साल के पहले छह महीनों में ही 76,000+ छंटनियां—बिग टेक ने लीड किया। सिस्को ने 4,000, IBM ने 8,000 (HR में AI एजेंट्स ने जगह ली)। ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं—सिलिकॉन वैली से यूरोप तक फैले। एक पूर्व अमेजन इंजीनियर ने कहा, “AI ने मेरी कोडिंग जॉब छीन ली; अब रीस्किलिंग की जद्दोजहद में हूं।”
| कंपनी | छंटनियां (2025) | मुख्य कारण |
|---|---|---|
| अमेजन | 30,000 | कॉर्पोरेट रिस्ट्रक्चरिंग, AI एफिशिएंसी |
| इंटेल | 24,000 | सेमीकंडक्टर AI शिफ्ट, 22% वर्कफोर्स कट |
| माइक्रोसॉफ्ट | 15,000 | सेल्स, इंजीनियरिंग में ऑटोमेशन |
| TCS | 20,000 | AI-फर्स्ट मॉडल, स्किल मिसमैच |
| गूगल | 9,000 | क्लाउड, डिजाइन टीम्स |
टेक छंटनियां 2025 में 25% AI से लिंक्ड—SaaS, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स सबसे प्रभावित।
आर्थिक दबाव: बजट कट और ग्लोबल मंदी का असर
ग्लोबल अनिश्चितता ने टेक बजट्स को 20% काट दिया। क्लाइंट्स डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग कम कर रहे—इन्फ्लेशन, US टैरिफ्स (ट्रंप की H-1B फीस $100,000 तक) ने भारतीय IT को झटका। Nasscom के अनुसार, AI ने कोडिंग से मैनुअल टेस्टिंग तक सब बदल दिया। कंपनियां ‘लीन’ मॉडल पर शिफ्ट—पैंडेमिक बूम के बाद ‘हाइपरग्रोथ’ खत्म।
भारत की IT कंपनियों पर AI का कहर: TCS से विप्रो तक सिलसिला
TCS का सबसे बड़ा झटका: 20,000 जॉब्स गायब
भारत की IT सेक्टर—5.67 मिलियन एम्प्लॉयी, 7% GDP—अब AI की चपेट में। TCS ने 20,000 कटे (2% ग्लोबल वर्कफोर्स), मिड-सीनियर मैनेजमेंट पर फोकस। CHRO ने कहा, “स्किल-बेस्ड एडजस्टमेंट—AI, डेटा साइंस पर रीफोकस।” Rs 11.35 बिलियन सिवरेंस पर खर्च। इंफोसिस, विप्रो, टेक महिंद्रा ने 10,000+ काटे—AI इंटीग्रेशन के नाम पर। ओरेकल ने भारत में 2,882 (10% हेडकाउंट) कटे, ओपनAI पार्टनरशिप के बाद।
स्टार्टअप्स में 5,649 छंटनियां—ओला इलेक्ट्रिक (1,000+), जेप्टो, CARS24। Inc42 के अनुसार, ऑटोमेशन ने बैकएंड रोल्स खत्म किए। अनुमान: अगले 2-3 साल में 4-5 लाख प्रोफेशनल्स (4-12 साल एक्सपीरियंस) रिस्क पर।
स्किल गैप का दर्द: पुरानी जॉब्स खत्म, नई की भूख
64% भारतीय IT फर्म्स ने जेनरेटिव AI इंटीग्रेट किया, लेकिन सिर्फ 38% एम्प्लॉयी कॉन्फिडेंट। मिड-लेवल रोल्स (कोडिंग, टेस्टिंग) सबसे असुरक्षित। UnearthInsight: 70% छंटनियां 4-12 साल एक्सपीरियंस वालों की। ग्लोबल क्लाइंट्स इनोवेशन मांग रहे—लो-कॉस्ट लेबर मॉडल पुराना।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जॉब्स रीशेप किए—ट्रेडिशनल से AI-सेंटर्ड।
कर्मचारियों पर असर: बेरोजगारी बढ़ी, रीस्किलिंग की होड़
साइलेंट लेऑफ्स का जाल: संकेत जो नजरअंदाज न करें
50,000+ जॉब्स रिस्क पर—अट्रिशन, कॉन्ट्रैक्ट नॉन-रिन्यूअल से ‘साइलेंट लेऑफ्स’। शहरी बेरोजगारी 7.1% पर। पूर्व TCS एम्प्लॉयी ने शेयर किया, “AI ने मेरी जॉब छीन ली; अब डेटा साइंस कोर्सेस में जुटा हूं।” फैमिलीज पर दबाव—मिडिल क्लास का सपना टूटा।
ग्लोबल-लोकल इम्पैक्ट: US से भारत तक चेन रिएक्शन
US (सिलिकॉन वैली) से शुरू, यूरोप-एशिया तक फैला। भारत में H-1B फीस बढ़ने से आउटसोर्सिंग हर्ट। स्टार्टअप्स में कंसॉलिडेशन—प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस।
भविष्य की राह: रीस्किलिंग से जॉब सिक्योरिटी, कंपनियों की जिम्मेदारी
अपस्किलिंग का मंत्र: AI, क्लाउड पर फोकस
कंपनियां रीस्किलिंग पर खर्च—AITD जैसे प्रोग्राम्स से जेनरेटिव AI, एनालिटिक्स सिखा रही। Nasscom: 4-5 लाख प्रोफेशनल्स को रीट्रेनिंग चाहिए। टिप्स: सर्टिफिकेशन्स लें, AI टूल्स सीखें। कंपनियां जो अपस्किलिंग पर इन्वेस्ट करेंगी, वो टैलेंट रिटेन करेंगी।
कंपनियों का रोल: लेऑफ्स से आगे सोचें
TCS जैसी फर्म्स AI सेवाओं पर शिफ्ट—लॉन्ग टर्म रेजिलिएंस। लेकिन एक्सपर्ट्स चेताते: “लेऑफ्स से कॉस्ट सेविंग, लेकिन रीहायरिंग महंगी।” गवर्नमेंट को पॉलिसी चाहिए—स्किल इंडिया को बूस्ट।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने सिवरेंस पर Rs 11.35 बिलियन खर्च—एम्प्लॉयी सेफ्टी नेट।
बदलाव का दौर, अवसर का इंतजार
टेक छंटनियां 2025 ने साबित कर दिया—AI दोधारी तलवार है। 1 लाख+ जॉब्स गईं, लेकिन नई AI रोल्स उभर रही। भारत की IT सेक्टर को रीस्किलिंग से उबरना होगा, कंपनियों को मानवीय अप्रोच अपनाना। अगर आप टेक वर्कर हैं, तो अभी से अपडेट हों—भविष्य AI का है, लेकिन स्किल्स आपकी। ये संकट है, लेकिन अवसर भी। आपका क्या प्लान? कमेंट्स में शेयर करें।
