नई दिल्ली। सोशल मीडिया आज सच्चाई का सबसे बड़ा मंच माना जाता है, लेकिन दिल्ली में कुछ फेक यूट्यूबर इसे धंधा बना चुके हैं। ये लोग गरीब रेहड़ी-पटरी वालों से अतिक्रमण हटाने के नाम पर पैसे ऐंठते हैं, और जब बात नहीं बनती तो MCD अधिकारियों के खिलाफ फर्जी वीडियो बनाकर वायरल कर देते हैं। नतीजा—प्रशासनिक काम में बाधा, MCD की छवि खराब और आम जनता गुमराह। दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने इसे गंभीर समस्या बताया है। पूरे शहर में ऐसे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं, जहां ये तथाकथित यूट्यूबर पहले उगाही करते हैं, फिर नहीं देने पर वीडियो वायरल कर MCD पर दबाव बनाते हैं।
फेक यूट्यूबरों का नया धंधा: पहले पैसे मांगो, न देने पर वायरल करो
कैसे चल रहा खेल?
- यूट्यूबर रेहड़ी-पटरी वाले गरीब दुकानदार के पास जाता है।
- कहता है—“MCD आएगी, सब हटा देगी, 5-10 हजार दे दो तो मामला सेट कर दूंगा।”
- पैसा मिल जाए तो चुप, नहीं मिले तो अपने 4-5 साथियों को बुलाकर ड्रामा करता है।
- MCD टीम के आने पर कैमरा ऑन—गाली-गलौच, धक्का-मुक्की का फर्जी वीडियो बनता है।
- वीडियो में कैप्शन: “देखिए MCD की गुंडागर्दी, गरीबों को मार रहे हैं!”
- 24 घंटे में लाखों व्यूज, MCD ट्रेंडिंग में, अफसरों पर दबाव।
दिल्ली नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ये लोग पहले उगाही करते हैं। जब हम तुरंत एक्शन लेते हैं और अतिक्रमण हटाते हैं तो ये फर्जी वीडियो बनाकर वायरल कर देते हैं। इससे हमारा काम रुकता नहीं, लेकिन छवि जरूर खराब होती है और जनता गुमराह होती है।”
पूरे दिल्ली में फैला जाल: साउथ दिल्ली से नॉर्थ तक एक ही पैटर्न
- करोल बाग, लक्ष्मी नगर, सीलमपुर, जहांगीरपुरी, नरेला—हर जोन में ऐसे केस।
- कुछ यूट्यूबर तो खुले आम रेट कार्ड बताते हैं—“10 हजार दो, वीडियो नहीं डालूंगा।”
- MCD की एंटी-इनक्रोचमेंट ड्राइव जैसे ही शुरू होती है, वीडियो की बाढ़ आ जाती है।
- कई बार तो ये लोग अपने रिश्तेदारों या जान-पहचान वालों की दुकान बचाने के लिए भी ऐसा करते हैं।
एक MCD जोनल डिप्टी कमिश्नर ने बताया, “हमारे पास रोज 10-15 ऐसे वीडियो आते हैं। जांचते हैं तो 90% फर्जी निकलते हैं। लेकिन तब तक वीडियो वायरल हो चुका होता है।”
प्रशासनिक काम में बाधा और जनता पर असर
- अतिक्रमण हटाओ तो “गरीबों पर अत्याचार” का टैग।
- हटाओ नहीं तो सड़कें जाम, ट्रैफिक हादसे।
- अफसर डरते हैं कि कहीं वीडियो वायरल न हो जाए।
- जनता कन्फ्यूज—कौन सही, कौन गलत?
दिल्ली नगर निगम अब सख्ती की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे फेक यूट्यूबरों पर धारा 188, 353 और IT एक्ट के तहत केस दर्ज होंगे। कुछ मामलों में FIR भी हो चुकी है।
फेक यूट्यूबरों पर सख्त कार्रवाई जरूरी
सोशल मीडिया सच दिखाने का जरिया है, लेकिन जब ये कुछ लोग उगाही और बदनामी का हथियार बन जाएं तो ये चिंता की बात है। गरीब रेहड़ी वाले पहले ही परेशान हैं, ऊपर से इन फेक यूट्यूबरों का शोषण। दिल्ली नगर निगम ने अपील की है कि कोई भी ऐसा वीडियो देखे तो पहले सच्चाई जांचे, सीधे अफसरों से संपर्क करे। और हां—अगर आपके इलाके में भी ऐसे फेक यूट्यूबर घूम रहे हैं तो कमेंट में बताइए, ताकि आवाज और बुलंद हो।
