अयोध्या, 25 नवंबर 2025। आज अयोध्या ने इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में एक और अध्याय जोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के 161 फीट ऊँचे मुख्य शिखर पर कोविदार युक्त केसरिया धर्म ध्वज फहराकर मंदिर निर्माण को औपचारिक रूप से पूर्ण घोषित कर दिया। जैसे ही शुभ मुहूर्त में पीएम ने बटन दबाया और 10×20 फीट का भव्य ध्वज पवन के साथ लहराया – पूरा मंदिर परिसर “जय श्री राम” के जयघोष से गूँज उठा। हजारों रामभक्तों की आँखें नम हो गईं, किसी ने साष्टांग दंडवत किया तो किसी ने “भारत माता की जय” के नारे लगाए।
यह केवल ध्वज फहराना नहीं था – यह 500 साल की तपस्या, अनगिनत बलिदानों और कोटि-कोटि रामभक्तों के संकल्प की विजय थी।
पीएम मोदी ने फहराया कोविदार ध्वज: वैदिक मंत्रों के बीच भव्य ध्वजारोहण समारोह
शुभ मुहूर्त में हुआ ऐतिहासिक ध्वजारोहण
- सुबह 10 बजे पीएम मोदी ने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए
- राम दरबार गर्भगृह में पूजा-अर्चना, सप्त मंडप में प्रार्थना
- दोपहर 12 बजकर 8 मिनट पर शुभ मुहूर्त में 161 फीट शिखर पर पहुँचे
- वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और नगाड़ों की गूँज के बीच बटन दबाया
- 10×20 फीट का विशाल केसरिया कोविदार ध्वज लहराया
- ध्वज पर अंकित है – सूर्य (रघुकुल की सूर्यवंशी पहचान), ॐ और कोविदार वृक्ष (अयोध्या का प्राचीन राज चिह्न)
विशेष बात: ध्वज दंड पर 21 किलो शुद्ध सोना चढ़ाया गया है। मुंबई के कारीगरों ने 3 महीने की मेहनत से यह काम पूरा किया। यह वही नाभि दंड है जिसका भूमि पूजन 5 अगस्त 2020 को पीएम मोदी ने किया था – जो अब 211 फीट (जमीन के नीचे 50 फीट + ऊपर 161 फीट) ऊँचा है।
राम जन्मभूमि मंदिर – आज पूर्ण हुआ निर्माण
कोविदार ध्वज की खास बातें – वाल्मीकि रामायण में भी है उल्लेख
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नाम | कोविदार ध्वज (अयोध्या का प्राचीन राज चिह्न) |
| आकार | 10 फीट ऊँचा × 20 फीट लंबा |
| रंग | केसरिया (भगवा) |
| चिह्न | सूर्य (रघुकुल की सूर्यवंशी पहचान), ॐ, कोविदार वृक्ष |
| रामायण में उल्लेख | अयोध्या कांड – भरत की सेना में कोविदार ध्वज का जिक्र |
| शोधकर्ता | रीवा के इतिहासकार ललित मिश्रा ने खोज निकाला |
| मंदिर परिसर में | प्राण प्रतिष्ठा के समय ही कोविदार वृक्ष लगाए गए (अब 8-10 फीट ऊँचे) |
| पहला हाइब्रिड प्लांट | हरिवंश पुराण के अनुसार महर्षि कश्यप ने पारिजात + मंदार से तैयार किया था |
वाल्मीकि रामायण प्रसंग: चित्रकूट में लक्ष्मण जी कहते हैं – “स एष हि महाकाय: कोविदार ध्वजो रथे” – यानी कोविदार ध्वज अयोध्या की पहचान था। आज 500 साल बाद फिर वही गौरव लौटा।
समारोह में कौन-कौन रहे मौजूद? 7000 चुनिंदा मेहमान
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत
- उत्तर प्रदेश राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- देश-विदेश के संत-महंत, धर्मगुरु
- व्यापार जगत के दिग्गज
- दलित, वंचित, किन्नर और अघोरी समाज के प्रतिनिधि
- नेपाल, भूटान, श्रीलंका से आए रामभक्त
खास बात – हर वर्ग, हर समुदाय को न्योता देकर रामराज्य का संदेश दिया गया कि “राम सबके हैं”।
पीएम मोदी का भव्य रोड शो – डेढ़ किलोमीटर तक फूलों की बारिश
- एयरपोर्ट से राम मंदिर तक 1.5 किमी लंबा रोड शो
- लाखों लोग सड़क के दोनों तरफ खड़े, फूल बरसाते रहे
- “मोदी-मोदी”, “जय श्री राम” के नारे गूँजते रहे
- बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएँ – सबकी आँखों में आँसू
सीएम योगी बोले – “धर्म का प्रकाश अमर है, रामराज्य कालजयी”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा:
“आज केसरिया ध्वज धर्म, मर्यादा, सत्य-न्याय और राष्ट्रधर्म का प्रतीक है। यह विकसित भारत की संकल्पना का प्रतीक है। संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता। 11 साल में हमने नया भारत देखा है – जहाँ विकास और विरासत का अद्भुत समन्वय है।”
मोहन भागवत का भावुक संदेश – “जिन्होंने प्राण न्योछावर किए, उनकी आत्मा तृप्त हुई”
सरसंघचालक ने कहा:
“आज सार्थकता का दिन है। जिन्होंने प्राण दिए – अशोक सिंहल जी समेत सभी बलिदानियों की आत्मा को शांति मिली होगी। रामराज्य का वही कोविदार ध्वज फिर लहरा रहा है। यह वृक्ष दूसरों को छाया-फल देता है, स्वयं धूप में खड़ा रहता है – यही रघुकुल की पहचान है।”
अयोध्या बनी किला – हेलीकॉप्टर से निगरानी, NSG-ATS की कमान
- हेलीकॉप्टर से लगातार हवाई निगरानी
- एंटी ड्रोन सिस्टम, 5000 से ज्यादा जवान
- ATS और NSG की कमान
- पूरे शहर में ट्रैफिक डायवर्शन, नो फ्लाई जोन
अयोध्या का नया स्वरूप – पर्यटन में 300% उछाल
| तथ्य | आंकड़े |
|---|---|
| प्राण प्रतिष्ठा के बाद पर्यटक | 1.5 मिलियन → 5 मिलियन (2025 तक) |
| रोजाना आने वाले श्रद्धालु | 1 लाख+ |
| नए होटल-धर्मशाला | 200+ बन चुके, 300 और प्रस्तावित |
| अर्थव्यवस्था में योगदान | ₹20,000 करोड़ (2025 अनुमान) |
| रोजगार | 1 लाख+ नए अवसर |
आगे की योजना – 2031 तक अयोध्या को सोलर सिटी, स्मार्ट सिटी और वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र बनाने का लक्ष्य।
कोविदार वृक्ष – मंदिर परिसर में लगे पौधे अब 10 फीट ऊँचे
प्राण प्रतिष्ठा के समय ही परिसर में कोविदार के पौधे लगाए गए थे। आज वे 8-10 फीट ऊँचे हो चुके हैं। अब श्रद्धालु ध्वज के साथ इन वृक्षों के दर्शन भी कर सकेंगे – त्रेता का आभास कलियुग में!
500 साल बाद फिर लहराया अयोध्या का प्राचीन राज चिह्न
आज का ध्वजारोहण केवल एक अनुष्ठान नहीं था – यह सनातन संस्कृति की पुनर्जागृति, 500 साल के संघर्ष की पराकाष्ठा और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक था। जैसे ही केसरिया कोविदार ध्वज लहराया, लगा मानो स्वयं श्रीराम ने कहा हो –
“सियावर रामचंद्र की जय… पवनसुत हनुमान की जय!”
आपको आज का यह स्वर्णिम क्षण कैसा लगा?
कौन सा पल सबसे ज्यादा भावुक कर गया – ध्वज फहराते पीएम मोदी, भागवत जी का संदेश या योगी जी की हुंकार?
कमेंट में जरूर बताइए… जय श्री राम! 🙏
