नोएडा, 9 दिसंबर 2025। एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा की छात्रा श्रेया ठाकुर ने मास्टर ऑफ स्पेशल एजुकेशन (M.Ed Special Education) में प्रथम स्थान प्राप्त कर न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि राजपूत समाज और दिल्ली-नोएडा क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गईं। श्रेया ने 2022 में दाखिला लिया था और 2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल हासिल किया। यह उपलब्धि विशेष शिक्षा के क्षेत्र में उनकी लगन और मेहनत का प्रमाण है। श्रेया के माता-पिता – पिता केवल बहादुर सिंह (केवी सिंह) और माता मंजू सिंह – ने बताया कि बचपन से ही श्रेया पढ़ाई के प्रति बेहद समर्पित रही हैं। इस सफलता पर एमिटी यूनिवर्सिटी के चेयरमैन, प्रिंसिपल, स्टाफ, अभिभावक और साथी छात्रों ने उन्हें हार्दिक बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आइए, जानते हैं श्रेया ठाकुर की इस प्रेरणादायक यात्रा की पूरी कहानी।
श्रेया ठाकुर का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा यात्रा
श्रेया ठाकुर दिल्ली की रहने वाली हैं। उनकी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा दिल्ली में ही हुई। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित दौलत राम कॉलेज (नॉर्थ कैंपस) से ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद विशेष शिक्षा के प्रति रुचि ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एस.एम. आर्या पंजाबी बाग, दिल्ली से आगे की पढ़ाई की और बी.एड की डिग्री हासिल की।
श्रेया ठाकुर के पिताजी ग्राम, चौहनापुर ,तहसील,गौरीगंज जिला, अमेठी, उत्तर प्रदेश, के रहने वाले हैं और दिल्ली में रहते हुए लोंगो की सेवाएं दे रहे हैं |
2022 में श्रेया ने एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा से मास्टर ऑफ स्पेशल एजुकेशन (M.Ed Special Education) में दाखिला लिया। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद 2025 में उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। स्पेशल एजुकेशन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और विकास पर फोकस होता है। श्रेया की इस सफलता ने साबित किया कि लगन और समर्पण से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
एमिटी यूनिवर्सिटी – श्रेया की सफलता का केंद्र।
माता-पिता का गर्व: बचपन से पढ़ाई का जुनून
श्रेया के पिता केवल बहादुर सिंह (केवी सिंह) और माता मंजू सिंह ने बताया, “श्रेया बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही है। वह घंटों किताबों में डूबी रहती थी। स्पेशल एजुकेशन चुनना उसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है – वह समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों की मदद करना चाहती है।” परिवार ने श्रेया की सफलता पर खुशी जताई और कहा कि यह उपलब्धि पूरे समाज के लिए गर्व की बात है।
श्रेया ने न केवल परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि राजपूत समाज का भी मान बढ़ाया। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।

पिता केवल बहादुर सिंह: समाजसेवा में सक्रिय व्यक्तित्व
श्रेया के पिता केवल बहादुर सिंह (केवी सिंह) सामाजिक कार्यों में गहराई से जुड़े हैं। वे अखंड राजपूताना सेवा संघ दिल्ली प्रदेश के कोषाध्यक्ष हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में करमपुरा नगर के नगर व्यवसायकार्य प्रमुख का दायित्व निभाते हैं। केवी सिंह समाजसेवा में हमेशा अग्रणी रहे हैं – चाहे शिक्षा हो या सामुदायिक कार्य। उनकी मेहनत और मूल्यों ने श्रेया को प्रेरित किया।
केवी सिंह ने कहा, “श्रेया की सफलता हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। वह समाज के लिए कुछ करना चाहती है, और हम उसे पूरा सहयोग देंगे।”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – केवी सिंह का संगठन।
एमिटी यूनिवर्सिटी की बधाई: उत्कृष्ट प्रदर्शन पर सम्मान
एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा ने श्रेया ठाकुर को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धि पर बधाई दी। विश्वविद्यालय के चेयरमैन, प्रिंसिपल और स्टाफ ने कहा, “श्रेया ने स्पेशल एजुकेशन में प्रथम स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया। वह हमारी छात्राओं के लिए रोल मॉडल हैं।” साथी छात्रों और अभिभावकों ने भी श्रेया के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में श्रेया को सम्मानित किया जाएगा। स्पेशल एजुकेशन विभाग के हेड ने कहा, “श्रेया की रिसर्च और प्रैक्टिकल वर्क बेहतरीन था। वह दिव्यांग बच्चों के लिए समर्पित शिक्षिका बनेगी।”

स्पेशल एजुकेशन का महत्व: श्रेया ठाकुर की प्रेरणा
स्पेशल एजुकेशन दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और विकास पर केंद्रित है। भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांग बच्चे हैं (2011 सेंसस), जिन्हें विशेष शिक्षकों की जरूरत है। श्रेया ने इस क्षेत्र को चुना क्योंकि वह समाज के कमजोर वर्ग की सेवा करना चाहती हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि सही दिशा में मेहनत से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।
श्रेया ने कहा, “मैं दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा में लाना चाहती हूं। यह उपलब्धि मेरे माता-पिता और शिक्षकों की देन है।”
विशेष शिक्षा – श्रेया का चुना क्षेत्र।
श्रेया ठाकुर की सफलता का संदेश: युवाओं के लिए प्रेरणा
श्रेया ठाकुर की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि राजपूत समाज और दिल्ली-NCR की बेटियों के लिए गर्व की बात है। उनके पिता केवी सिंह की समाजसेवा और माता मंजू सिंह का सहयोग इस सफलता की नींव है। श्रेया ने साबित किया कि लगन से कोई भी क्षेत्र जीता जा सकता है।
एमिटी यूनिवर्सिटी ने श्रेया को गोल्ड मेडल और सम्मान पत्र से नवाजा। परिवार और समाज ने उन्हें बधाई दी। श्रेया अब स्पेशल एजुकेशन में करियर बनाना चाहती हैं – शायद शिक्षिका या रिसर्चर के रूप में।
एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा – श्रेया की सफलता का मंच।
श्रेया ठाकुर FAQ: प्रमुख सवालों के जवाब
Q1: श्रेया ठाकुर ने किस कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया?
A: मास्टर ऑफ स्पेशल एजुकेशन (M.Ed Special Education) में।
Q2: श्रेया ठाकुर की शिक्षा कहां से हुई?
A: दौलत राम कॉलेज (ग्रेजुएशन), एस.एम. आर्या पंजाबी बाग (बी.एड), एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा (एम.एड)।
Q3: श्रेया ठाकुर के पिता कौन हैं?
A: केवल बहादुर सिंह (केवी सिंह), अखंड राजपूताना सेवा संघ के कोषाध्यक्ष और RSS कार्यकर्ता।
Q4: श्रेया ने कब एम.एड में दाखिला लिया?
A: 2022 में, 2025 में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
Q5: स्पेशल एजुकेशन क्या है?
A: दिव्यांग बच्चों की विशेष शिक्षा और विकास पर केंद्रित कोर्स।
Q6: एमिटी यूनिवर्सिटी ने क्या किया?
A: श्रेया को बधाई और सम्मान दिया।
Q7: श्रेया का भविष्य प्लान क्या है?
A: स्पेशल एजुकेशन में शिक्षिका या रिसर्चर बनना।
Q8: यह सफलता क्यों खास है?
A: राजपूत समाज और क्षेत्र के लिए प्रेरणा, परिवार का मान बढ़ाया।
मेहनत और लगन की मिसाल
श्रेया ठाकुर की सफलता साबित करती है कि सही दिशा और मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। स्पेशल एजुकेशन में प्रथम स्थान प्राप्त कर उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग की सेवा का संकल्प लिया। Khabar Kendra Media पर और पढ़ें: एमिटी यूनिवर्सिटी सफलताएं।
आपको श्रेया की सफलता कैसी लगी?
