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Wednesday, 04 Feb 2026

दिल्ली में अब 11 नहीं, 13 जिले: रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा प्रशासनिक बदलाव

दिल्ली सरकार ने राजधानी के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए अब 11 की जगह 13 जिलों को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को तेज, आसान और लोगों के नज़दीक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया और इसे दिसंबर 2025 के अंत तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

जिले बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी

पिछले कई सालों में दिल्ली की आबादी तेजी से बढ़ी है, जिससे प्रशासनिक दबाव भी लगातार बढ़ता गया। कई क्षेत्रों की सीमाएँ आपस में उलझी हुई थीं, जिसकी वजह से फाइलें इधर‑उधर घूमती रहीं और कामों में देरी होती रही। नई जिलों की संरचना के जरिए सरकार इन समस्याओं को कम करना चाहती है, ताकि हर क्षेत्र के पास अपना मजबूत जिला प्रशासन हो सके।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि यह फैसला लंबे समय से लंबित था और पिछली सरकारें इस पर ठोस कदम नहीं उठा सकीं, जबकि उनकी सरकार ने सिर्फ दस महीनों में यह काम पूरा कर दिया। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से आम लोगों को दूर-दूर स्थित दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और शिकायतों के निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी।

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कितने बढ़े उपमंडल और सब-रजिस्ट्रार कार्यालय

नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत राजधानी में उपमंडलों (Sub-divisions) की संख्या 33 से बढ़ाकर 39 कर दी गई है। इसी तरह सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की संख्या 22 से बढ़ाकर 39 कर दी गई है, जो प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, लैंड रिकॉर्ड और अन्य राजस्व से जुड़ी सेवाओं का मुख्य केंद्र होते हैं।

सरकार का मानना है कि उपमंडल और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस बढ़ने से लोगों को अपनी संपत्ति से जुड़े काम, म्यूटेशन, रजिस्ट्री और प्रमाणपत्रों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इसका सीधा फायदा शालीमार बाग, बुराड़ी, करोल बाग, नरेला समेत उन इलाकों के लोगों को होगा, जो पहले दूरस्थ जिला दफ्तरों पर निर्भर थे।

व्यवस्थापहलेअब
जिले1113
उपमंडल3339
सब-रजिस्ट्रार कार्यालय2239

कौन से नए जिले और क्या बदला

इस पुनर्गठन के तहत पुराना शाहदरा जिला समाप्त कर दिया गया है और उसकी जगह तीन नए जिले बनाए गए हैं –

  • ओल्ड दिल्ली
  • सेंट्रल नॉर्थ दिल्ली
  • आउटर नॉर्थ दिल्ली

नई व्यवस्था के बाद दिल्ली के 13 जिलों की सूची इस प्रकार होगी:
साउथ ईस्ट, ओल्ड दिल्ली, नॉर्थ, न्यू दिल्ली, सेंट्रल, सेंट्रल नॉर्थ, साउथ वेस्ट, आउटर नॉर्थ, नॉर्थ वेस्ट, नॉर्थ ईस्ट, ईस्ट, साउथ और वेस्ट।

अधिकारियों के मुताबिक, नए जिलों की सीमाएँ इस तरह तय की जा रही हैं कि भीड़भाड़ वाले इलाकों पर बोझ कम हो और दूर-दराज के मोहल्लों को भी नजदीकी जिला केंद्र मिल सके। इससे पुलिस, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभागों की फील्ड मॉनिटरिंग भी आसान होगी।

कब और कैसे लागू होगी नई जिला व्यवस्था

सरकार अगले 15 दिनों के भीतर इसका राजपत्र (गज़ट) नोटिफिकेशन जारी करेगी। योजना है कि दिसंबर 2025 के अंत तक नए जिलों की व्यवस्था जमीन पर पूरी तरह लागू हो जाए। हर नए जिले में एक आधुनिक मिनी सचिवालय स्थापित किया जाएगा, जिसमें एसडीएम, एडीएम, राजस्व, सब-रजिस्ट्रार और अन्य जरूरी विभाग एक ही परिसर में काम करेंगे।

पहले चरण में इसके लिए 25 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट मंजूर किया गया है, जिसे आगे ज़रूरत के अनुसार बढ़ाया जा सकता है। सरकार का दावा है कि यह निवेश आने वाले सालों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाकर और समय की बचत करके अपने आप में कई गुना लाभ लौटाएगा।

आम लोगों को क्या फायदा होगा

नई जिला व उपमंडल संरचना का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ेगा। अब लोगों को –

  • कागज़ात और रजिस्ट्री के लिए दूर-दूर के दफ्तरों में बार-बार जाने की ज़रूरत कम होगी।
  • शिकायतों, लाइसेंस, प्रमाणपत्र और राजस्व से जुड़े मामलों का निपटारा तेज़ होगा।
  • स्थानीय प्रशासन को अपने क्षेत्र की समस्याओं को ज्यादा करीब से समझने और हल करने का मौका मिलेगा।

सरकार का कहना है कि यह कदम दिल्ली को “स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल” की तरफ ले जाने वाली बड़ी कड़ी है, जहां प्रशासनिक इकाइयाँ छोटी होंगी, लेकिन फैसले तेज़ और असरदार होंगे।