नई दिल्ली, 20 दिसंबर 2025। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक एक साल पहले BJP की आंतरिक रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (बिहार से) और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी (UP से) के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समीकरण कैसे काम करेगा? यह सवाल राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है। BJP ने हाल ही में नितिन नबीन को राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा पद देकर बिहार मॉडल को UP में दोहराने की कोशिश की है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि तीनों नेताओं के बीच समन्वय की कमी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। क्या यह तिकड़ी UP को फिर से ‘लोटस की धरती’ बनाएगी, या आंतरिक कलह नया विवाद खड़ी करेगी? आइए, इसकी गहराई में उतरते हैं।
BJP की नई तिकड़ी: योगी, नितिन नबीन और पंकज चौधरी का बैकग्राउंड
BJP ने 2025 के अंत में संगठनात्मक फेरबदल किया, जिससे UP की राजनीति में नया समीकरण उभरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (ठाकुर समुदाय, गोरखपुर से) पार्टी के हिंदुत्व और विकास के प्रतीक हैं। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (बिहार मंत्री, कायस्थ, कम उम्र) को केंद्रीय स्तर पर लाया गया, जबकि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी (कुर्मी, केंद्रीय मंत्री) UP का स्थानीय चेहरा हैं।
| नेता | पद/पृष्ठभूमि | मजबूती | चुनौती |
|---|---|---|---|
| योगी आदित्यनाथ | UP CM, ठाकुर | हिंदुत्व एजेंडा, विकास कार्य | केंद्रीय नेतृत्व से मतभेद की अटकलें |
| नितिन नबीन | राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, बिहार | युवा अपील, बिहार मॉडल | UP में अनजान चेहरा, कम अनुभव |
| पंकज चौधरी | UP प्रदेश अध्यक्ष, कुर्मी | OBC वोट बैंक, केंद्रीय कनेक्शन | योगी के साथ समन्वय की कमी |
यह तिकड़ी BJP को जातीय संतुलन (ठाकुर-OBC-युवा) देने का प्रयास लगती है, लेकिन समीकरण की सफलता पर सवाल हैं।

समीकरण की मजबूतियां: बिहार मॉडल से प्रेरणा
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अजय कुमार सिंह कहते हैं, “नितिन नबीन का चयन बिहार चुनाव की सफलता से प्रेरित है। BJP ने वहां नीतीश कुमार के साथ गठबंधन से OBC-दलित वोट बांटे। UP में पंकज चौधरी OBC चेहरा हैं, जो योगी के हिंदुत्व को बैलेंस कर सकते हैं।” 2022 UP चुनाव में BJP ने 255 सीटें जीतीं, लेकिन लोकसभा 2024 में सिर्फ 33। अब 2027 के लिए नई रणनीति: नितिन नबीन केंद्रीय दिशा देंगे, पंकज चौधरी ग्रासरूट संगठन संभालेंगे, और योगी विकास का चेहरा बने रहेंगे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नितिन नबीन की युवा ऊर्जा से सोशल मीडिया और युवा वोटरों को टारगेट किया जाएगा। पंकज चौधरी का कुर्मी बैकग्राउंड पश्चिमी UP में मजबूत होगा। यदि समीकरण बैठा, तो BJP 300+ सीटों का लक्ष्य हासिल कर सकती है।
चुनौतियां: आंतरिक कलह और केंद्रीय हस्तक्षेप की आशंका
हालांकि, सवाल ये है कि क्या योगी के साथ नितिन नबीन और पंकज चौधरी समीकरण बिठा पाएंगे? विश्लेषक रवि शंकर प्रसाद (पूर्व BJP नेता) का कहना है, “योगी का केंद्रीकृत स्टाइल और नितिन नबीन का बाहरी होना टकराव पैदा कर सकता है। पंकज चौधरी को केंद्रीय समर्थन है, जो योगी के फैसलों में हस्तक्षेप का संकेत देता है।” 2024 लोकसभा हार के बाद अमित शाह पर उम्मीदवार चयन का ठीकरा फोड़ा गया था। अब नितिन नबीन का राष्ट्रीय पद क्या केंद्रीय नेतृत्व की UP पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश है?
UP में जातीय समीकरण जटिल हैं: ठाकुर (योगी) vs कुर्मी (पंकज)। यदि नितिन नबीन (बाहरी) बीच में आए, तो स्थानीय असंतोष बढ़ सकता है। विपक्ष (सपा-कांग्रेस) इसे ‘अंदरूनी साजिश’ बता रहा है।
2027 चुनाव की रणनीति: क्या होगा असर?
2027 UP चुनाव BJP के लिए ‘मेक ऑर ब्रेक’ हैं। यदि तिकड़ी ने समन्वय बिठाया:
- मजबूत पक्ष: OBC-ठाकुर गठजोड़, बिहार जैसा गठबंधन।
- कमजोर पक्ष: योगी की लोकप्रियता पर सेंध, संगठन में भ्रम।
विशेषज्ञों का अनुमान: यदि समीकरण फेल, BJP 200 सीटों तक सिमट सकती है। सफलता पर 280+ संभव।
FAQ: 2027 UP चुनाव और BJP तिकड़ी पर सवाल
Q1: नितिन नबीन और पंकज चौधरी का योगी के साथ समीकरण क्यों महत्वपूर्ण?
A: जातीय संतुलन और संगठन मजबूती के लिए; असफलता चुनाव हार का कारण बनेगी।
Q2: 2027 UP चुनाव में BJP का लक्ष्य क्या?
A: 300+ सीटें; हिंदुत्व + विकास पर फोकस।
Q3: क्या नितिन नबीन UP में प्रभावी होंगे?
A: बिहार मॉडल से हां, लेकिन स्थानीय ज्ञान की कमी चुनौती।
Q4: पंकज चौधरी का चयन क्यों विवादास्पद?
A: केंद्रीय समर्थन से योगी पर ‘हस्तक्षेप’ की अटकलें।
Q5: BJP की रणनीति क्या है?
A: नई पीढ़ी + क्षेत्रीय फोकस; 2024 हार से सबक।
Q6: विपक्ष का फायदा?
A: आंतरिक कलह से; सपा गठबंधन मजबूत करेगी।
समीकरण की परीक्षा
2027 UP चुनाव में योगी, नितिन नबीन और पंकज चौधरी का समीकरण BJP की सफलता की कुंजी बनेगा। यदि बिहार जैसा जादू चला, तो लोटस फिर खिलेगा; वरना आंतरिक टकराव नुकसान पहुंचाएगा। राजनीतिक जानकारों का इंतजार: क्या यह तिकड़ी ‘ट्रिनिटी’ बनेगी या ‘ट्रायंगल ऑफ टेंशन’? समय जवाब देगा। आपकी राय क्या है? कमेंट करें।
