लखनऊ, 27 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब विवाद को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोला है। वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि इतिहास के कटु सत्य को नजरअंदाज कर मुगल बादशाह औरंगजेब की महिमा करने वाले लोग देश की संस्कृति और सभ्यता को खतरे में डाल रहे हैं। योगी ने जोर देकर कहा, “भारत की संस्कृति को बदनाम करना स्वीकार नहीं। हम सनातन परंपरा और वीर बलिदानों को कभी नहीं भूल सकते।”
इतिहास को राजनीतिक हथियार बनाने पर सवाल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में हर नागरिक को सुरक्षित महसूस करने का पूर्ण अधिकार है और किसी भी प्रकार का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अगर कोई औरंगजेब जैसे विवादित चरित्र को सकारात्मक रूप से पेश करता है, तो उन्हें इतिहास का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए।” योगी ने सिख गुरुओं के बलिदानों का स्मरण कराते हुए जोर दिया कि देश का इतिहास संघर्षों और त्यागों से भरा पड़ा है, और इनका सम्मान हमारा कर्तव्य है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में औरंगजेब की मजारों और इतिहास की व्याख्या को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। भाजपा समर्थक इसे सांस्कृतिक जागरूकता का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे सियासी ध्रुवीकरण का प्रयास बता रहा है।
वीर बाल दिवस पर सिख इतिहास का जिक्र
कार्यक्रम में योगी ने सिख गुरुओं के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “सिख गुरुओं के संघर्ष ने न केवल आजादी की प्रेरणा दी, बल्कि सनातन संस्कृति की रक्षा भी की। वीर बाल दिवस हमें इन बलिदानों की याद दिलाता है।” यह बयान भाजपा की लंबे समय से चली आ रही नीति का हिस्सा लगता है, जहां इतिहास को विकास और विरासत के साथ जोड़कर पेश किया जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी का यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की विचारधारा को मजबूत करने का प्रयास है। एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, “योगी जी का रुख हमेशा से साफ रहा है। यह न केवल ऐतिहासिक, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बहुसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने का संदेश देता है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया: इतिहास को राजनीति से अलग रखें
विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, “इतिहास को राजनीतिक हथियार बनाना उचित नहीं। योगी जी को विकास के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि पुरानी किताबों के पन्नों को उछालने पर।” इसी तरह, कांग्रेस ने इसे “ध्रुवीकरण की राजनीति” करार दिया और कहा कि इससे सामाजिक सद्भाव प्रभावित होता है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए लिखा, “इतिहास सबका है, इसे तोड़-मरोड़कर पेश करना देश की एकता को कमजोर करता है। योगी जी से अपील है कि सबको साथ लेकर चलें।”
सोशल मीडिया पर बंटी राय
योगी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। #YogiOnAurangzeb हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जहां समर्थक इसे “सांस्कृतिक जागृति” बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे “अतीत की जकड़न” कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “योगी जी सही कह रहे हैं, इतिहास भूलना गलती है।” वहीं दूसरे ने कहा, “2025 में इतिहास की बहस क्यों? विकास पर फोकस करें।”
भाजपा का लंबा रुख
भाजपा ने हमेशा से इतिहास और संस्कृति को अपनी राजनीति का केंद्र बिंदु बनाया है। योगी आदित्यनाथ का यह बयान उसी कड़ी का हिस्सा है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, “मुख्यमंत्री का संदेश स्पष्ट है – नया भारत आक्रमणकारियों की महिमा नहीं, बल्कि अपने वीरों का सम्मान करेगा।”
यह विवाद तब और गहरा गया जब हाल ही में महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने औरंगजेब की तारीफ की थी, जिस पर योगी ने तीखा प्रहार किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहस 2026 के चुनावों तक जारी रह सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, “योगी जी का उद्देश्य इतिहास से सीख लेना है, न कि विभाजन फैलाना।”
यह बयान न केवल राजनीतिक हलकों में, बल्कि सामाजिक चर्चाओं में भी गूंज रहा है। क्या यह विवाद नई बहस को जन्म देगा या विकास के एजेंडे को पीछे धकेलेगा? समय ही बताएगा।
