नई दिल्ली। भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बीकानेरवाला के चेयरमैन श्याम सुंदर अग्रवाल ने भारतीय व्यंजनों को एक माध्यम बनाकर देश की संस्कृति को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान से प्रेरित होकर, अग्रवाल ने ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ की अवधारणा को अपनाया है, जिसका उद्देश्य न केवल स्थानीय उत्पादों को मजबूत करना है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करना भी है। इससे न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि दुनिया भर में भारतीय संस्कृति की पहचान भी मजबूत होगी। अग्रवाल का मानना है कि भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाला एक पुल है, जो विभिन्न देशों के लोगों को भारत की समृद्ध परंपराओं से जोड़ सकता है।
प्रधानमंत्री का ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान और इसका महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘लोकल फॉर वोकल’ का संदेश देकर देशवासियों को अपने देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना, आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना और ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। मोदी जी का कहना है कि हमें न केवल स्थानीय उत्पादों को खरीदना और उपयोग करना चाहिए, बल्कि उनके बारे में खुलकर बात भी करनी चाहिए। इससे छोटे उद्योगों, कारीगरों और किसानों को लाभ मिलेगा, जो देश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ हैं। इस अभियान ने कोरोना महामारी के दौरान विशेष महत्व प्राप्त किया, जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आया और स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ी। ‘लोकल फॉर वोकल’ ने लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करने में मदद की है और भारत को एक मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में योगदान दिया है। यह अभियान न केवल आर्थिक, बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है।

श्याम सुंदर अग्रवाल का ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ दृष्टिकोण
बीकानेरवाला के चेयरमैन श्याम सुंदर अग्रवाल ने ‘लोकल फॉर वोकल’ को एक कदम आगे बढ़ाते हुए ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ की अवधारणा प्रस्तुत की है। उनका मानना है कि हमें ऐसे उत्पाद और सेवाएं विकसित करनी चाहिए जो न केवल भारत के लिए उपयोगी हों, बल्कि पूरे विश्व के लिए लाभदायक साबित हों। अग्रवाल कहते हैं कि भारतीय व्यंजनों के माध्यम से हम अपनी संस्कृति को दुनिया भर में फैला सकते हैं। उन्होंने न केवल इस विचार को व्यक्त किया, बल्कि इसे व्यावहारिक रूप से लागू भी किया है। बीकानेरवाला, जो राजस्थान की मिठाइयों और नमकीनों के लिए प्रसिद्ध है, अब वैश्विक ब्रांड बन चुका है। अग्रवाल की दूरदर्शिता ने कंपनी को पारंपरिक भारतीय स्वादों को आधुनिक पैकेजिंग और गुणवत्ता के साथ पेश करने में मदद की है। उनका दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि कैसे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है, जिससे न केवल व्यापार बढ़ता है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी होता है।
बीकानेरवाला की यात्रा और घरेलू विस्तार
बीकानेरवाला की शुरुआत राजस्थान के बीकानेर शहर से हुई, जहां पारंपरिक मिठाइयां और स्नैक्स बनाए जाते थे। आज कंपनी भारत में लगभग 200 आउटलेट संचालित कर रही है, जो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में फैले हुए हैं। इन आउटलेट्स में रसगुल्ला, भुजिया, नमकीन, समोसा और अन्य भारतीय व्यंजन उपलब्ध हैं, जो ग्राहकों को घर जैसा स्वाद प्रदान करते हैं। कंपनी ने गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे यह ब्रांड विश्वसनीय बन चुका है। भारत में युवा वर्ग विदेशी फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बर्गर और सैंडविच की ओर आकर्षित होता है, लेकिन बीकानेरवाला ने पारंपरिक स्वादों को आधुनिक तरीके से पेश करके उन्हें वापस भारतीय व्यंजनों की ओर मोड़ा है। कंपनी की सफलता का राज उसकी नवाचार क्षमता में छिपा है, जहां पारंपरिक रेसिपी को स्वच्छता और पैकेजिंग के साथ जोड़ा गया है।
वैश्विक स्तर पर विस्तार और भारतीय संस्कृति का प्रसार
बीकानेरवाला ने विदेशों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। वर्तमान में कंपनी के 50 से 60 आउटलेट विदेशों में संचालित हैं, जिनमें दुबई में 23, अमेरिका में 12, लंदन में 5, न्यूजीलैंड में 3, सिंगापुर में 2, कतर में 2 और ऑस्ट्रेलिया में 4 शामिल हैं। इन आउटलेट्स के माध्यम से विदेशी लोग भारतीय व्यंजनों जैसे रस मलाई, जलेबी, समोसा और चाट का स्वाद चख रहे हैं। इससे न केवल व्यापार बढ़ रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रसार भी हो रहा है। विदेशी पर्यटक और निवासी भारत की विविधता को भोजन के माध्यम से समझ रहे हैं, जो त्योहारों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़ी हुई है। उदाहरण के लिए, दुबई में बीकानेरवाला के आउटलेट्स ने मध्य पूर्व के लोगों को भारतीय मिठाइयों से परिचित कराया है, जबकि अमेरिका में यह ब्रांड भारतीय प्रवासियों के लिए घर की याद दिलाता है। यह विस्तार साबित करता है कि भारतीय व्यंजन वैश्विक फास्ट फूड चेन जैसे मैकडॉनल्ड्स या केएफसी से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
भविष्य की योजनाएं और 2026 का लक्ष्य
बीकानेरवाला की टीम विदेशों में 15 से 20 और आउटलेट खोलने की तैयारी में जुटी हुई है। जनवरी 2026 तक इन योजनाओं को पूरा करने की संभावना है, जो कंपनी को और मजबूत बनाएगी। नए आउटलेट कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में खोले जा सकते हैं, जहां भारतीय समुदाय मजबूत है। अग्रवाल का लक्ष्य है कि 2030 तक बीकानेरवाला 100 से अधिक देशों में मौजूद हो। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारतीय किसानों और कारीगरों को भी लाभ मिलेगा, क्योंकि कच्चे माल की मांग बढ़ेगी। कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी ध्यान दे रही है, जहां ऑनलाइन ऑर्डरिंग और डिलीवरी के माध्यम से वैश्विक ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा रही है। यह योजनाएं ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के अनुरूप हैं, जो वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को मजबूत करेंगी।
भारतीय व्यंजनों का सांस्कृतिक प्रभाव और चुनौतियां
भारतीय व्यंजन दुनिया भर में लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि वे स्वादिष्ट, विविध और स्वास्थ्यवर्धक हैं। मसालों का अनोखा मिश्रण, शाकाहारी विकल्प और क्षेत्रीय विविधता उन्हें आकर्षक बनाती है। विदेशी लोग भारत आकर दाल-चावल, बिरयानी या स्ट्रीट फूड को पसंद करते हैं, जबकि भारतीय युवा विदेशी फूड की नकल कर रहे हैं। बीकानेरवाला जैसी कंपनियां इस असंतुलन को दूर करने में मदद कर रही हैं। हालांकि, चुनौतियां भी हैं, जैसे सांस्कृतिक अनुकूलन, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रतिस्पर्धा। अग्रवाल इन चुनौतियों को अवसर में बदल रहे हैं, जिससे भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रभाव बढ़ रहा है।
एक स्वादिष्ट क्रांति की शुरुआत
श्याम सुंदर अग्रवाल के नेतृत्व में बीकानेरवाला न केवल एक ब्रांड है, बल्कि भारतीय संस्कृति का दूत बन चुका है। ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के माध्यम से वे साबित कर रहे हैं कि भोजन संस्कृति को एकजुट करने का सबसे प्रभावी तरीका है। इससे भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति बढ़ेगी, और दुनिया भारत को एक नए नजरिए से देखेगी। आइए हम सभी इस दिशा में योगदान दें, ताकि भारतीय व्यंजन वैश्विक पटल पर चमकें।
