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Wednesday, 04 Feb 2026

दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता पर सियासी विवाद गरमाया: छोटी भूल को बड़ा हथियार बनाने का आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और विपक्षी आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। विधानसभा के हालिया सत्र में दिए गए एक भाषण में हुई छोटी-सी गलती को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। AAP ने इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, जबकि मुख्यमंत्री गुप्ता ने इसे व्यक्तिगत हमला बताते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए हैं। यह विवाद दिल्ली की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है, जहां छोटी-छोटी बातों को बड़ा मुद्दा बनाकर चुनावी लाभ उठाने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकता है।

दिल्ली की राजनीति हमेशा से ही विवादों से भरी रही है, लेकिन इस बार का मुद्दा भाषण में हुई एक साधारण भूल पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) से ताल्लुक रखती हैं, ने विधानसभा में विकास योजनाओं पर बोलते हुए कुछ शब्दों का गलत उच्चारण किया था। यह गलती इतनी छोटी थी कि सामान्य रूप से इसे नजरअंदाज किया जा सकता था, लेकिन AAP ने इसे पकड़ लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। ट्विटर पर हैशटैग #GuptaGaffe ट्रेंड करने लगा, और मीम्स की बाढ़ आ गई। इस घटना ने राजनीति में भाषा और अभिव्यक्ति की भूमिका पर नई बहस शुरू कर दी है। क्या राजनीति में ऐसी छोटी गलतियां इतनी बड़ी बनाई जानी चाहिए? या यह सिर्फ विरोधियों को नीचा दिखाने का तरीका है?

भाषण में हुई गलती: क्या थी वो भूल जो विवाद का केंद्र बनी?

विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली की जल आपूर्ति योजना पर बोल रही थीं। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने जल संकट को दूर करने के लिए नई पाइपलाइनें बिछाई हैं, जो लाखों लोगों को लाभ पहुंचाएंगी।” लेकिन भाषण के एक हिस्से में उन्होंने ‘पाइपलाइन’ की जगह ‘पाइपलाइफ’ कह दिया, जो एक साधारण उच्चारण की गलती थी। यह गलती कैमरों में कैद हो गई और विपक्ष ने इसे तुरंत सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। AAP के कार्यकर्ताओं ने मीम्स बनाए, जहां मुख्यमंत्री को ‘पाइपलाइफ’ वाली नेता कहा गया, और इसे सरकार की अक्षमता से जोड़ दिया गया।

मुख्यमंत्री ने अपनी सफाई में कहा कि भाषण के दौरान तेज गति से बोलने पर ऐसी गलतियां हो जाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “यह कोई बड़ी भूल नहीं है, बल्कि मानवीय त्रुटि है। विपक्ष इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है ताकि असल मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके।” गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष उनकी महिला होने की वजह से उन्हें निशाना बना रहा है, जो लैंगिक भेदभाव का एक रूप है। राजनीतिक इतिहास में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जहां नेताओं की छोटी गलतियां बड़े विवाद बन गईं, जैसे पूर्व प्रधानमंत्री की भाषण गलतियां या अन्य नेताओं के स्लिप ऑफ टंग। लेकिन दिल्ली जैसे राजनीतिक केंद्र में यह और भी संवेदनशील हो जाता है।

AAP का हमला: विधानसभा रिकॉर्ड से हटाने की मांग

विपक्षी पार्टी AAP ने इस मुद्दे को विधानसभा रिकॉर्ड से जुड़कर और बड़ा बना दिया। AAP के विधायकों ने सदन में प्रस्ताव रखा कि अगर भाषण में कोई गलती हुई है, तो उसे आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि गलत बयान रिकॉर्ड में रहने से इतिहास विकृत होता है और भविष्य में इसका दुरुपयोग हो सकता है। AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा, “यह गलत सूचना फैलाने का तरीका है। सरकार जानबूझकर इसे रिकॉर्ड में रख रही है ताकि हम इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल करें और फिर वे हमें दोष दें।”

AAP ने मुख्यमंत्री से माफी की मांग की है और कहा है कि ऐसी गलतियां जनता को गुमराह करती हैं। पार्टी ने सोशल मीडिया कैंपेन चलाया, जहां हजारों यूजर्स ने इस मुद्दे पर अपनी राय दी। कुछ ने AAP का समर्थन किया, तो कुछ ने इसे फालतू का विवाद बताया। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि AAP इस मुद्दे से दिल्ली में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है, जहां हाल के चुनावों में BJP ने मजबूत प्रदर्शन किया था।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया: नीतियों पर फोकस करने की अपील

रेखा गुप्ता ने इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “विपक्ष मेरी छोटी-छोटी भूलों को मजाक का विषय बना रहा है, लेकिन दिल्ली की जनता जानती है कि हमारी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन में क्या सुधार किए हैं। असल मुद्दा विकास है, न कि भाषण की गलतियां।” गुप्ता ने महिला नेतृत्व पर सवाल उठाने को राजनीति का गिरता स्तर बताया और कहा कि यह महिलाओं को आगे आने से रोकता है।

उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, जैसे दिल्ली में नए अस्पतालों का निर्माण, मुफ्त बिजली योजना का विस्तार और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय। गुप्ता ने विपक्ष से अपील की कि वे जनहित के मुद्दों पर बहस करें, न कि व्यक्तिगत हमलों पर। BJP के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर #StandWithRekha ट्रेंड चलाया, जहां लोगों ने मुख्यमंत्री का समर्थन किया और AAP को अवसरवादी बताया।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय: चुनावी रणनीति का हिस्सा

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद दिल्ली में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है। वरिष्ठ पत्रकार रवि शर्मा कहते हैं, “दिल्ली की राजनीति में छोटी बातों को बड़ा बनाना आम है। AAP अपनी पुरानी छवि वापस पाने की कोशिश कर रही है, जबकि BJP विकास के एजेंडे पर टिकी है।” अन्य विश्लेषक मानते हैं कि सोशल मीडिया ने ऐसे विवादों को बढ़ावा दिया है, जहां मीम्स और वीडियो क्लिप्स वोटरों को प्रभावित करते हैं।

यह घटना राजनीति में नैतिकता और जिम्मेदारी की बहस भी छेड़ रही है। क्या नेताओं को हर गलती पर माफी मांगनी चाहिए? या विपक्ष को ऐसे मुद्दों से ऊपर उठना चाहिए? दिल्ली की जनता इस विवाद से क्या सीखेगी, यह समय बताएगा। लेकिन फिलहाल, यह सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। मुख्यमंत्री गुप्ता की टीम ने आगे की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है, जबकि AAP नए हमलों की तैयारी में है। कुल मिलाकर, यह विवाद दिल्ली की राजनीति को नई दिशा दे सकता है, जहां व्यक्तिगत छवि और नीतियां दोनों महत्वपूर्ण हैं।