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Wednesday, 04 Feb 2026

विश्व पुस्तक मेला 2026: भारत मंडपम प्रगति मैदान में 9 से 18 जनवरी तक किताबों का महाकुंभ, पहली बार पूरी तरह फ्री एंट्री

नई दिल्ली: किताबों के शौकीनों के लिए बड़ी खुशखबरी! राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में 53वां नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 शुरू हो चुका है। 9 जनवरी से शुरू हुआ यह नौ दिवसीय साहित्यिक महोत्सव 18 जनवरी तक चलेगा। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस बार पहली बार मेले में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है।

मेले का उद्घाटन और मुख्य विशेषताएं

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 9 जनवरी 2026 को भारत मंडपम में इस विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) और भारत व्यापार संवर्धन संगठन (ITPO) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह मेला एशिया के सबसे बड़े पुस्तक आयोजनों में गिना जाता है।

इस बार के मेले में 35 से अधिक देशों की भागीदारी है, जिसमें 1000 से अधिक प्रकाशक, 3000 से ज्यादा स्टॉल, 600 से अधिक कार्यक्रम और 1000 से ज्यादा वक्ता शामिल हैं। अनुमान है कि इस साहित्यिक महाकुंभ में लगभग 20 लाख लोग शिरकत करेंगे।

इस बार की खास थीम: भारतीय सैन्य इतिहास

विश्व पुस्तक मेला 2026 की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास: वीरता और बुद्धिमत्ता @75’ रखी गई है। यह थीम भारत के तीनों सेनाओं (थल सेना, वायु सेना और नौसेना) की 75 वर्षों की वीरगाथा और योगदान को समर्पित है।

प्रकाशन विभाग द्वारा सैन्य इतिहास से लेकर राष्ट्र निर्माण की कहानियों पर आधारित पुस्तकों की विविध श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। इसमें कला और संस्कृति, इतिहास, सिनेमा, व्यक्तित्व और जीवनियां, गांधीवादी साहित्य और बाल साहित्य जैसे विषय शामिल हैं।

मेले के दौरान भारतीय सेना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और युद्ध-वीरों के विशेष व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे।

विदेशी भागीदारी: कतर और स्पेन की विशेष उपस्थिति

इस वर्ष कतर को ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ देश के रूप में चुना गया है और स्पेन ‘फोकस कंट्री’ है। कतर के साहित्य, संस्कृति और अरबी साहित्य की परंपराओं को मेले में विशेष स्थान दिया गया है। इसके अलावा रूस, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, जापान, पोलैंड, अर्जेंटीना, लिथुआनिया, जर्मनी, नेपाल और सऊदी अरब सहित 30 से अधिक देश इस आयोजन में भाग ले रहे हैं।

मेले का समय और स्थान

कहां: भारत मंडपम (प्रगति मैदान), नई दिल्ली
हॉल नंबर: 2 से 6
समय: प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
अवधि: 9 जनवरी से 18 जनवरी 2026 (9 दिन)

कैसे पहुंचें?

नजदीकी मेट्रो स्टेशन सुप्रीम कोर्ट (ब्लू लाइन) है, जहां से पैदल या रिक्शा लेकर आसानी से भारत मंडपम पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा, मेले के आयोजक सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन, भैरो मंदिर पार्किंग, नेशनल स्टेडियम (गेट नंबर 4) और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट से प्रगति मैदान गेट नंबर 4 तक निःशुल्क शटल सेवा भी उपलब्ध करा रहे हैं।

प्रवेश निःशुल्क: इतिहास में पहली बार

नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) और भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (ITPO) ने पहली बार मेले में निःशुल्क प्रवेश का फैसला लिया है। इस कदम का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों, विशेष रूप से छात्रों और युवाओं को किताबों के संसार से जोड़ना है। पहले मेले में वयस्कों के लिए 20 रुपये और बच्चों के लिए 10 रुपये का प्रवेश शुल्क होता था।

NBT के डायरेक्टर युवराज मलिक ने कहा, “इस बार सभी के लिए प्रवेश पूरी तरह मुफ्त रखा गया है। न टिकट होगा और न ही किसी तरह का रजिस्ट्रेशन। इससे देशभर में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।”

हॉल-वार व्यवस्था: किस हॉल में क्या मिलेगा?

मेले को व्यवस्थित रूप से विभिन्न हॉल्स में बांटा गया है:

हॉल 2: भारतीय भाषाओं के प्रकाशक और लेखक मंच
हॉल 3: भारतीय भाषा प्रकाशक और नई दिल्ली राइट्स टेबल
हॉल 4: अतिथि देश (कतर), फोकस देश (स्पेन) और अंतरराष्ट्रीय पवेलियन
हॉल 5: थीम पवेलियन, लेखक कॉर्नर और सामान्य/व्यापार प्रकाशक, अंग्रेजी पुस्तकें
हॉल 6: बच्चों का विशेष पवेलियन (किड्ज़ एक्सप्रेस), शैक्षणिक और आध्यात्मिक पुस्तकें
एम्फीथिएटर: सांस्कृतिक कार्यक्रम और सेमिनार

बच्चों के लिए खास: किड्ज़ एक्सप्रेस

हॉल 6 में बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, जहां कहानी सुनाना, थिएटर, कला-कौशल, क्विज़, वैदिक गणित और रचनात्मक कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इस पवेलियन का नाम ‘किड्ज़ एक्सप्रेस’ रखा गया है।

बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने और उन्हें खेल-खेल में गणित, विज्ञान और अन्य विषयों की समझ विकसित करने के लिए विशेष शिक्षकों और विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है। पजल गेम्स, फिशिंग रॉड गेम और शैक्षणिक खिलौनों के माध्यम से बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने की व्यवस्था है।

डिजिटल युग में पुस्तकें: ई-बुक्स की सुविधा

मेले में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के माध्यम से 6000 से अधिक मुफ्त ई-बुक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह सुविधा डिजिटल युग के पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

प्रमुख प्रकाशक और विविधता

मेले में देश-विदेश के प्रमुख प्रकाशन संस्थान भाग ले रहे हैं। हॉल 5 में पेंगुइन, हार्पर कॉलिंस और रूपा पब्लिकेशंस जैसे दिग्गज प्रकाशकों के स्टॉल पर सप्ताहांत में लंबी कतारें देखी गईं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं में पुस्तकें उपलब्ध हैं।

रूस को इस बार फोकस देशों में से एक माना जा रहा है, जहां रूसी साहित्य का विशेष प्रदर्शन किया गया है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और सेमिनार

मेले के दौरान 600 से अधिक साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें पुस्तक विमोचन, लेखक परिचर्चा, रक्षा विशेषज्ञों और युद्ध-वीरों के व्याख्यान शामिल हैं। प्रमुख वक्ताओं में जनरल वी.के. सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ, कर्नल एस.सी. त्यागी, एयर मार्शल विक्रम सिंह (सेवानिवृत्त) और स्क्वाड्रन लीडर राणा टी.एस. छिन्ना (सेवानिवृत्त) जैसे नाम शामिल हैं।

सेना के बैंड द्वारा विशेष प्रस्तुतियां भी दी जा रही हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती और ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष प्रदर्शनियां भी आयोजित की गई हैं।

प्रकाशन विभाग की भूमिका

1941 में स्थापित प्रकाशन विभाग भारत सरकार का एक प्रमुख प्रकाशन संस्थान है जो विकास, भारतीय इतिहास, संस्कृति, साहित्य, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और रोजगार जैसे विषयों पर विभिन्न भाषाओं में पुस्तकें प्रकाशित करता है।

मेले में प्रकाशन विभाग की लोकप्रिय पत्रिकाएं योजना, कुरुक्षेत्र, आजकाल और बाल भारती का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। आगंतुक रोजगार समाचार और एम्प्लॉयमेंट न्यूज की वार्षिक सदस्यता भी ले सकते हैं।

विशेष पुस्तक विमोचन

मेले के पहले दिन ‘द सागा ऑफ कुदोपाली: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ 1857’ पुस्तक के अनुवादित संस्करणों का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक ओडिशा के संबलपुर स्थित कुदोपाली में वीर सुरेंद्र साईं के नेतृत्व में हुए 1857 के विद्रोह की अनसुनी कहानी बताती है। यह किताब अब बांग्ला, पंजाबी, असमिया, मलयालम, उर्दू, मराठी, तमिल, कन्नड़, तेलुगु और स्पेनिश सहित कुल 13 भाषाओं में उपलब्ध है।

विश्व पुस्तक मेले का इतिहास

वर्ष 1972 में दिल्ली के प्रगति मैदान में पहला विश्व पुस्तक मेला आयोजित किया गया था। पिछले 52 वर्षों से यह मेला भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय साहित्य को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहा है। समय के साथ यह मेला अपने स्वरूप में व्यापक और आधुनिक बनता गया है।

शिक्षा मंत्री का संदेश

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मेले के उद्घाटन के दौरान कहा, “यह मेला केवल किताबों का नहीं, बल्कि विचारों और पढ़ने की मजबूत संस्कृति का उत्सव है। कतर और स्पेन जैसे देशों की भागीदारी इस सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन के महत्व को और बढ़ाती है।”

उन्होंने कहा कि मुफ्त प्रवेश का निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग, विशेषकर युवा पीढ़ी, किताबों से जुड़ सकें।

पाठकों की प्रतिक्रिया

मेले के पहले दिन से ही भारी संख्या में साहित्य प्रेमी पुस्तक मेला घूमने पहुंच रहे हैं। परिवारों, छात्रों और शोधार्थियों की भीड़ देखी जा रही है। मुफ्त प्रवेश के कारण इस बार की उपस्थिति पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

53वां नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 न केवल किताबों का एक विशाल संग्रह प्रस्तुत कर रहा है, बल्कि यह ज्ञान, संस्कृति और साहित्य का एक जीवंत उत्सव है। पहली बार निःशुल्क प्रवेश, भारतीय सैन्य इतिहास की विशेष थीम, 35 से अधिक देशों की भागीदारी, और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था इस मेले को वास्तव में अनूठा बनाती है।

अगर आप किताबों के शौकीन हैं या अपने बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना चाहते हैं, तो 18 जनवरी तक भारत मंडपम में आयोजित इस साहित्यिक महाकुंभ में जरूर जाएं। यह अनुभव न केवल ज्ञानवर्धक होगा, बल्कि यादगार भी रहेगा।