गार्मेंट की आड़ में चल रहा था ‘बारूद’ का खेल, बंद शटर ने बना दिया चिता
अलवर/भिवाड़ी, 18 फरवरी 2026 | राजस्थान के भिवाड़ी में पटाखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 7 मजदूरों की जिंदा जलकर मौत के दर्दनाक मामले में पुलिस ने फैक्ट्री मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी तीन अलग-अलग जगहों पर अवैध रूप से पटाखे बनाने का धंधा चला रहा था।
पीड़ित परिवारों के आंसू अभी सूखे भी नहीं थे कि पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी हेमंत कुमार शर्मा और फैक्ट्री मैनेजर अभिनंदन तिवारी को हिरासत में ले लिया है।
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सोमवार की भयावह घटना: बंद कमरे में फंसे मजदूर
भिवाड़ी के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को जो हादसा हुआ, वह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। गार्मेंट फैक्ट्री के नाम पर चल रही इस इकाई में अंदर अवैध पटाखे बनाए जा रहे थे।
हादसे की दर्दनाक कहानी:
- अचानक भीषण विस्फोट के साथ लगी आग
- बाहर से बंद शटर के कारण मजदूर फंस गए
- चीखने-पुकारने की आवाजें भी बाहर नहीं आ सकीं
- 7 मजदूर जिंदा जलकर राख हो गए
- इतनी भयंकर आग कि शवों की पहचान भी नहीं हो सकी
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पुलिस की बड़ी कार्रवाई: तीन ठिकानों पर छापा
| कार्रवाई विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गिरफ्तार आरोपी | हेमंत कुमार शर्मा (मालिक) |
| हिरासत में | अभिनंदन तिवारी (मैनेजर) |
| अवैध फैक्ट्री | 3 स्थानों पर |
| बरामदगी | मशीनें, कच्चा माल, तैयार पटाखे |
| क्षेत्र | खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र |
भिवाड़ी के अतिरिक्त एसपी अतुल साहू ने बताया कि जांच में सामने आया है कि हेमंत कुमार शर्मा खुशखेड़ा इलाके में तीन अलग-अलग जगहों पर अवैध पटाखा निर्माण का काम करा रहा था।
तीन अवैध ठिकानों का खुलासा
1. आग लगी फैक्ट्री (सोमवार)
- गार्मेंट फैक्ट्री के नाम पर लीज पर ली गई
- अंदर अवैध पटाखा निर्माण
- कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं
2. दूसरी फैक्ट्री (मंगलवार को पकड़ी गई)
- उसी इलाके में स्थित
- यहां भी अवैध पटाखे बन रहे थे
- भारी मात्रा में खतरनाक रसायन बरामद
3. गोदाम (मंगलवार को पकड़ा गया)
- तैयार पटाखों का भंडारण
- बड़ी खेप बरामद
- विस्फोटक सामग्री मिली
बरामदगी: भयंकर तस्वीर का खुलासा
पुलिस की छापेमारी में जो सामान बरामद हुआ, वह किसी टाइम बम से कम नहीं था:
बरामद सामग्री:
- पटाखे बनाने की अत्याधुनिक मशीनें
- खतरनाक रसायन और विस्फोटक
- कच्चा माल की भारी मात्रा
- तैयार अवैध पटाखों की बड़ी खेप
- पैकिंग का सामान
DNA सैंपल से होगी शिनाख्त
हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों के शव इतने जल गए कि पहचान करना भी मुश्किल हो गया।
शिनाख्त की प्रक्रिया
| मृतक | परिजन | सैंपल स्थिति |
|---|---|---|
| मिंटू | भाई | लिया गया |
| अजीत | भाई | लिया गया |
| सुजांत | भाई | लिया गया |
| अन्य 4 | प्रतीक्षित | बुलाए गए |
टपूकड़ा अस्पताल में मंगलवार को सभी 7 मृतकों के DNA सैंपल लिए गए। तीन मृतकों के भाइयों के सैंपल ले लिए गए हैं। बाकी चार मृतकों के परिजनों को बुलाया गया है। उनके आने पर सैंपल लिए जाएंगे, जिससे शवों की शिनाख्त कर परिजनों को सौंपा जा सके।
मजदूरों की पहचान का इंतजार
पुष्टि हुए नाम:
- मिंटू
- अजीत
- सुजांत 4-7. अन्य चार की पहचान DNA टेस्ट के बाद
इन सभी मजदूरों के परिवार अब भी इस उम्मीद में हैं कि उन्हें अपने प्रियजनों का शव मिल सके, ताकि अंतिम संस्कार कर सकें।
अवैध कारोबार की काली सच्चाई
यह घटना उन अवैध धंधों पर सवाल खड़े करती है जो मानव जीवन को दांव पर लगाकर चलाए जा रहे हैं:
चौंकाने वाले तथ्य:
- कानूनी लाइसेंस के बिना संचालन
- गार्मेंट की आड़ में खतरनाक काम
- बुनियादी सुरक्षा उपायों का अभाव
- आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था नहीं
- बाहर से बंद शटर – मौत का जाल
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
उठते हैं ये सवाल:
- तीन जगह अवैध फैक्ट्री कैसे चल रही थीं?
- प्रशासन को कभी भनक क्यों नहीं लगी?
- नियमित निरीक्षण क्यों नहीं हुआ?
- फैक्ट्री इंस्पेक्टर कहां थे?
- स्थानीय पुलिस को जानकारी नहीं थी?
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज किया है:
- लापरवाही से मौत
- अवैध विस्फोटक निर्माण
- बिना लाइसेंस संचालन
- सुरक्षा नियमों का उल्लंघन
अगले कदम:
- पूछताछ जारी
- अन्य संभावित आरोपियों की तलाश
- सभी अवैध ठिकानों की पहचान
- प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करना
परिवारों की मांग
मृतकों के परिजनों ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- पर्याप्त मुआवजा
- आरोपियों को कड़ी सजा
- सभी अवैध फैक्ट्रियों पर कार्रवाई
- जिम्मेदार अधिकारियों पर एक्शन
- ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त कानून
विशेषज्ञों की राय
सुरक्षा विशेषज्ञ राजेश शर्मा: “पटाखा उद्योग अत्यंत खतरनाक है। बिना उचित सुरक्षा उपायों के यह काम करना जानलेवा है। ऐसी फैक्ट्रियों में बेसिक सेफ्टी नॉर्म्स भी नहीं होते।”
श्रम अधिकार कार्यकर्ता सुनीता वर्मा: “गरीब मजदूर मजबूरी में ऐसे खतरनाक काम करते हैं। उन्हें न तो सुरक्षा मिलती है, न ही उचित वेतन। जान जाने पर भी परिवार को सहारा नहीं मिलता।”
ऐसी घटनाओं से कैसे बचें?
जरूरी कदम:
- नियमित निरीक्षण अनिवार्य हो
- अवैध इकाइयों पर सख्त कार्रवाई
- व्हिसलब्लोअर को संरक्षण
- मजदूर सुरक्षा कानूनों का पालन
- आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू करना
निष्कर्ष
भिवाड़ी की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर से हमें याद दिलाती है कि लालच में अंधे होकर मानव जीवन को दांव पर लगाना कितना घातक हो सकता है।
7 परिवारों के चिराग बुझ गए, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस घटना से सबक लिया जाएगा? क्या अवैध फैक्ट्रियों पर सख्त कार्रवाई होगी? क्या गरीब मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?
हेमंत कुमार शर्मा और अभिनंदन तिवारी को हिरासत में लेना तो महज शुरुआत है। असली न्याय तब होगा जब ऐसी सभी अवैध फैक्ट्रियां बंद हो जाएं और मजदूरों को सुरक्षित कामकाजी माहौल मिले।
