प्रदूषण चिंता के बीच खुशी का संदेश, ग्रीन पटाखों पर फोकस – क्या दिल्लीवासी पटाखे फोड़ेंगे, या फिर सख्ती रहेगी?
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2025: दिवाली की रौनक नजदीक आते ही दिल्ली में एक नई बहस छिड़ गई – क्या इस बार पटाखे फूटेंगे, या फिर प्रदूषण का डर लाल किले की दीवारें पार कर जाएगा? मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कर दिया – “दिवाली इनके बिना अधूरी है।” लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि सेफ्टी और पर्यावरण का ख्याल रखना होगा। ग्रीन पटाखों को हरी झंडी, लेकिन सख्त नियम। क्या ये फैसला दिल्लीवासियों को खुश करेगा, या फिर पुरानी बहस फिर गरमाएगी? आइए, इस त्योहारी बहस की परतें खोलें, जहां खुशी, चिंता और उम्मीद सब मिला हुआ है।
CM का दिल जीतने वाला बयान: ‘पटाखों की ध्वनि ही दिवाली की जान’
मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेखा गुप्ता ने कहा, “दिवाली के बिना पटाखे अधूरे हैं। ये हमारी संस्कृति का हिस्सा, खुशी का प्रतीक। लेकिन हम प्रदूषण नहीं फैलाएंगे।” उनका ये बयान सुनते ही सोशल मीडिया पर तालियों की गड़गड़ाहट हो गई। एक ट्विटर यूजर बोले, “अंत में तो सही आवाज आई!” लेकिन सवाल ये – क्या ये सिर्फ बयानबाजी है, या असल में ढील मिलेगी? पिछले साल के सख्त नियमों ने कई परिवारों को निराश किया था, लेकिन इस बार ग्रीन पटाखों पर जोर। गुप्ता ने कहा, “सिर्फ बायो-डिग्रेडेबल वाले, और टाइम लिमिट – शाम 8 से 10 बजे तक।”
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प्रदूषण का भूत: दिल्ली का AQI हमेशा ‘पुलिस’ बनता, क्या इस बार छूट?
दिल्ली का AQI दिवाली पर हमेशा 500 पार कर जाता, सांस लेना दूभर। 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बरती – सिर्फ ग्रीन पटाखे, वो भी सीमित। लेकिन गुप्ता ने कहा, “हम कोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे, लेकिन त्योहार की रौनक भी बरकरार रखेंगे।” DPCC (दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी) ने गाइडलाइंस जारी कीं – सिर्फ ISL प्रमाणित ग्रीन पटाखे, और फायरक्रैकर्स बैन। लेकिन क्या दिल्लीवासी मानेंगे? एक पर्यावरण कार्यकर्ता बोले, “खुशी तो ठीक, लेकिन सांस की कीमत क्या?” उत्साह है, लेकिन चिंता भी सताएगी।
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ग्रीन पटाखों का जादू: सेफ्टी से खुशी, लेकिन कीमत पर सवाल
गुप्ता ने जोर दिया – “बायो-डिग्रेडेबल पटाखे ही इस्तेमाल हों, जो प्रदूषण कम फैलाते।” बाजार में ग्रीन वाले 20-30% महंगे, लेकिन स्टॉक खत्म। एक दुकानदार बोले, “इस साल डिमांड दोगुनी, लेकिन लोग सस्ते वाले तलाश रहे।” दिल्ली सरकार ने 100 पॉइंट्स पर चेकिंग बढ़ाई। क्या ये बैलेंस काम करेगा? एक मां ने कहा, “बच्चों की खुशी के लिए ग्रीन ही लूंगा, लेकिन सांस की फिक्र भी है।” ये फैसला दिल को छू गया, लेकिन जमीनी असर देखना बाकी।
राजनीतिक रंग: AAP का तंज, BJP का समर्थन – चुनावी बहस?
AAP ने तंज कसा – “पिछले साल सख्ती की, अब ढील? प्रदूषण पर राजनीति!” जबकि BJP बोली, “ममता जी त्योहार की रक्षा कर रही।” दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक, तो ये फैसला वोटों का खेल भी बनेगा। गुप्ता ने कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों की खुशी।” लेकिन सवाल – क्या AQI 300 पार हुआ तो क्या होगा? सोशल मीडिया पर #DiwaliWithCrackers ट्रेंड, जहां लोग अपनी राय दे रहे। एक यूजर बोले, “खुशी मनाओ, लेकिन सांस भी लो!”
दिवाली का इंतजार: रौनक लौटेगी, या सतर्कता बरतेंगी?
दिवाली नजदीक, दिल्ली की गलियां रोशनी से जगमगाने को बेताब। गुप्ता का बयान उम्मीद जगाता है, लेकिन सेफ्टी का संदेश भी। क्या इस बार पटाखों की ध्वनि गूंजेगी, या फिर सन्नाटा रहेगा? जनता का दिल खुश, लेकिन फेफड़े सतर्क। ये त्योहार न सिर्फ रोशनी का, बल्कि जागरूकता का भी होगा।
