नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2025 – दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने राजधानी के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने नया सचिवालय भवन बनाने के लिए छह संभावित स्थानों का चयन कर लिया है। यह नया भवन सभी सरकारी विभागों को एक ही छत के नीचे लाने का काम करेगा, जिससे दिल्लीवासियों को सेवाएं तेजी से मिल सकेंगी। पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भेजी जा रही है, और जल्द ही अंतिम फैसला हो सकता है।
वर्तमान व्यवस्था की कमियां और नया सचिवालय क्यों?
दिल्ली का मौजूदा सचिवालय आईटीओ स्थित प्लेयर्स बिल्डिंग में है, जो महज चार एकड़ में फैला हुआ है। यहां मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा वित्त, शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी जैसे प्रमुख विभाग हैं, लेकिन बाकी विभाग शहर के कोने-कोने में बिखरे पड़े हैं। इससे फाइलें इधर-उधर भटकती हैं, और आम आदमी को सरकारी कामों में देरी का सामना करना पड़ता है। नया सचिवालय इसी समस्या का समाधान बनेगा। यह आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें डिजिटल सिस्टम, पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन और पर्याप्त पार्किंग शामिल होगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह भवन अगले दशक की प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करे।
पीडब्ल्यूडी ने चुनीं ये छह जगहें
पीडब्ल्यूडी ने जमीन की उपलब्धता, कनेक्टिविटी, मेट्रो पहुंच और कानूनी साफ-सफाई के आधार पर इन स्थानों का मूल्यांकन किया है। सभी जगहें सरकारी स्वामित्व वाली हैं, जिससे निर्माण में कोई विवाद नहीं होगा। यहां संक्षेप में विवरण:
- गुलाबी बाग: 80 एकड़ की विशाल सरकारी जमीन, जहां पुराने जर्जर सरकारी आवास हैं। रिंग रोड और मेट्रो स्टेशन से जुड़ी, ट्रैफिक की समस्या कम।
- आईटीओ बस डिपो: 17.5 एकड़ क्षेत्र, जिसमें बस डिपो, स्कूल और खाली प्लॉट शामिल। मौजूदा सचिवालय के बिल्कुल पास, शिफ्टिंग आसान होगी।
- ट्विन टावर्स कॉम्प्लेक्स: आईटीओ में विकास मीनार और आसपास की इमारतें, कुल 4.5 एकड़। बस डिपो से जोड़कर 22 एकड़ बन सकता है। ऊंची इमारतें बनाने के लिए आदर्श।
- आईपीजीसीएल गैस टरबाइन प्लांट: इंद्रप्रस्थ के पास 30 एकड़ का बंद पावर स्टेशन। शहर के केंद्र में स्थित, मेट्रो से अच्छी कनेक्टिविटी।
- खैबर पास, सिविल लाइंस: 40 एकड़ जमीन, जहां हाल ही में अनधिकृत कॉलोनियां हटाई गईं। दिल्ली विधानसभा के करीब, रणनीतिक महत्व।
- राजघाट पावर प्लांट: यमुना किनारे 45 एकड़ का पुराना कोयला प्लांट। शानदार लोकेशन, लेकिन पर्यावरण मंजूरी की चुनौती हो सकती है।
ये जगहें दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में हैं, ताकि ट्रैफिक और प्रदूषण का असर कम पड़े।
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आगे का रोडमैप: कब तक बनेगा भवन?
मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही चयनित जगह पर डिजाइन टीम उतरेगी। उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारा लक्ष्य दो साल के अंदर निर्माण पूरा करना है। यह प्रोजेक्ट दिल्ली को एक विश्वस्तरीय प्रशासनिक केंद्र देगा।” हालांकि, बजट और पर्यावरण क्लियरेंस जैसे मुद्दे अभी विचाराधीन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिल्ली की ‘आम आदमी पार्टी’ सरकार की पारदर्शिता और दक्षता वाली छवि को मजबूत करेगा।
दिल्लीवासी अब उम्मीद बांधे हुए हैं कि नया सचिवालय न केवल सरकारी कामकाज को सुगम बनाएगा, बल्कि राजधानी को एक नई पहचान भी देगा। क्या यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होगा? आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
