खरीफ फसलों के लिए बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई
लखनऊ, 10 जुलाईः डबल इंजन सरकार किसानों के हर संकट में सारथी बनकर खड़ी है। सरकार किसानों को फसलों से संबंधित नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए सदैव तत्पर है। धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उड़द, मूंग, अरहर, मूंगफली, सोयाबीन एवं तिल का बीमा कराने के लिए तिथि तय की गई है। किसान 31 जुलाई तक अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं।
फसल बीमा में सहायता के लिए हेल्पलाइन और सूचना प्रक्रिया
क्षतिपूर्ति/क्लेम के साथ-साथ पंजीकरण में मदद और दस्तावेज संबंधी मार्गदर्शन के लिए किसान फसल बीमा हेल्पलाइन नम्बर 14447 पर संपर्क कर सकते हैं। बीमा कराते समय वास्तविक फसल एवं भूमि का ही उल्लेख करें। किसान अपनी फसल क्षति की सूचना 72 घंटे के अंदर नजदीकी फसल बीमा सेंटर, कृषि विभाग या फसल बीमा हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से दें, जिससे फसल बीमा का लाभ समय से प्राप्त हो सके।
बीमा प्रीमियम में सरकार की भागीदारी
खरीफ फसलों के लिए बीमा का प्रीमियम दो फीसदी किसान देते हैं, जबकि शेष धनराशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा भुगतान की जाती है। इससे किसानों को न्यूनतम प्रीमियम में अधिकतम कवरेज मिलता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: किसानों की आय में स्थिरता
किसानों की आय का मुख्य साधन फसलें हैं। लेकिन प्राकृतिक आपदाएं, कीट-बीमारी, सूखा, बाढ़, तूफान, ओलावृष्टि या असफल बुवाई जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित है। इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय को स्थिर बनाना और प्राकृतिक आपदा के बाद सहायता प्रदान करना है। यह योजना उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में क्रियान्वित की जा रही है।
बीमा के लिए जरूरी दस्तावेज और पंजीकरण प्रक्रिया
फसल बीमा कराने के लिए जरूरी दस्तावेज:
- आधार कार्ड
- खतौनी
- बैंक पासबुक
- बीमा कराई जाने वाली फसल का विवरण
पंजीकरण बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर या ऑनलाइन पोर्टल www.pmfby.gov.in पर स्वयं भी किया जा सकता है। बीमा के लिए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने से पहले किसान अपना आधार, कृषक आईडी, खेत एवं फसल से संबंधित जानकारी/प्रपत्र अपने पास रखें।
