अनाथ बचपन से Harvard की ऊंचाइयों तक, DPIS को 200+ स्कूलों का साम्राज्य बनाने वाले योद्धा की कहानी
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2025: भारत के शिक्षा जगत में डॉ. विजय पवार का नाम एक मिसाल है – संघर्ष की आग में तपे, RSS के संस्कारों से सींचे, और सेवा के दीपक से रोशन। 9 अक्टूबर 1984 को गुजरात के भरूच में जन्मे इस दूरदर्शी शिक्षाविद् ने चित्तौड़गढ़ के राजपूत वंश की जड़ों से निकलकर शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का हथियार बना दिया। पिता का बलिदान, मां का अचानक निधन, और दादाजी का RSS का साया – ये सब उनकी कहानी का आधार बने। आज DPIS सोसाइटी के चेयरमैन के रूप में उन्होंने 200+ स्कूल खड़े किए, जहां आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति का मेल हो रहा। क्या ये जीवन यात्रा युवाओं के लिए नई प्रेरणा बनेगी? आइए, उनकी संघर्ष गाथा की परतें खोलें, जहां दर्द, दृढ़ता और समर्पण का अनोखा संगम है।
अनाथ बचपन का दर्द: पिता का बलिदान, मां की विदाई – दादाजी का साया बना सहारा
डॉ. विजय पवार का जन्म चित्तौड़गढ़ के गौरवशाली राजपूत परिवार में हुआ, जहां परदादा समाजसेवी थे। पिता गुजरात पुलिस में कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी, जिन्होंने 31 अक्टूबर 1984 के सिख दंगों में एक सिख परिवार बचाते हुए शहादत दी। सिर्फ 3 महीने के बेटे को ये दर्द विरासत में मिला। मां, इंग्लैंड से लॉ की पढ़ाई करने वाली बैरिस्टर, 6 जून 1988 को हृदयाघात से चली गईं। 3 साल के विजय के कंधों पर अनाथपन का बोझ पड़ गया। लेकिन दादाजी – RSS के समर्पित स्वयंसेवक – ने संभाला। गुजरात के देदीयापाड़ा आश्रम स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा, और RSS शाखा में संस्कार। दादाजी का मंत्र – “शाखा की प्रार्थना से सच्चे भारतवासी निकलते हैं” – विजय का जीवन बदल गया।
विदेश की उड़ान: Harvard से M.D. Psychiatry, लेकिन भारत की पुकार लौटा लाई
बारहवीं के बाद बड़े दादाजी के संरक्षण में आगे बढ़े विजय। बुआ के सहयोग से Harvard University, Boston पहुंचे, जहां M.D. (Psychiatry) और Forensic Expert बने। 10 साल विदेश में शोध, लेकिन 2010 में लौट आए – “मेरी शिक्षा भारत के काम आए।” दादाजी द्वारा 1976 में स्थापित DPIS सोसाइटी से जुड़े, जहां गरीब बच्चों को शिक्षा का संकल्प था। सर्वसम्मति से चेयरमैन बने, और “मिशन SETU” लॉन्च – संपर्क, शिक्षा, परिवर्तन, एकता, उन्नति। सीमित संसाधनों से 2 स्कूलों को 200+ कैंपसों का साम्राज्य बना दिया।
RSS संस्कारों का जादू: शिक्षा में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम
RSS की शाखा ने विजय को अनुशासन सिखाया। DPIS के हर स्कूल में रोज प्रार्थना सभा – “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे”। पाठ्यक्रम में NEP 2020 के साथ संस्कृति, योग, नैतिक शिक्षा। डॉ. पवार बोले, “शिक्षा चरित्र बनाती, नेतृत्व सिखाती।” DPIS का मंत्र – “इनक्लूसिव, इनोवेटिव, इम्पैक्टफुल”। 540+ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, 2024 में Ironman Leadership Award। National Spotlight Education Summit में स्पीकर – शिक्षा और नेतृत्व पर विचार।
सामाजिक सेवा का संकल्प: ‘सड़क से स्कूल तक’, हजारों बच्चों का मसीहा
डॉ. पवार का विश्वास – “शिक्षा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” ‘सड़क से स्कूल तक’ पहल से हजारों गरीब बच्चों को मुफ्त-रियायती शिक्षा। ये जनआंदोलन बन गया – EWS एडमिशन, स्कॉलरशिप्स। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्किल-बेस्ड लर्निंग, इमोशनल लिटरेसी – पाठ्यक्रम में सब। “21वीं सदी का बच्चा ज्ञान के साथ संवेदना सीखे।” DPIS में भारतीय संस्कृति और विज्ञान का समावेश – करियर से आगे जीवन सफलता।
विरासत का दीपक: राष्ट्र निर्माण का सिपाही, युवाओं की प्रेरणा
डॉ. विजय पवार का जीवन संघर्ष से समर्पण की मिसाल। राजपूत साहस, RSS संस्कार, Harvard शिक्षा – सब मिलकर राष्ट्र सेवा। 300 नए स्कूलों का लक्ष्य। वो बोले, “शिक्षा मिशन बने, तो राष्ट्रगुरु बनेगा भारत।” उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा – दर्द से उभरकर सेवा का सागर।
