नई दिल्ली : रंगों का त्योहार होली न सिर्फ खुशियां बिखेरता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। इस वर्ष होली पर अनुमानित कारोबार 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। विशेष रूप से, पकवानों और मिठाइयों जैसे गुझिया पर भारतवासी 20,000 करोड़ रुपये खर्च करने वाले हैं, जबकि गुलाल और रंगों पर 12,000 करोड़ रुपये का व्यय होगा।
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यह आंकड़े हाल ही में आजतक पर प्रसारित एक रिपोर्ट से लिए गए हैं, जिसमें होली के दौरान होने वाले आर्थिक उछाल पर प्रकाश डाला गया था। रिपोर्ट के अनुसार, होली के त्योहार में मिठाइयों की मांग हमेशा ऊंची रहती है, और इस बार गुझिया, थाली, और अन्य पारंपरिक पकवान बाजार में छाए रहेंगे। मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि प्राकृतिक और हर्बल सामग्री से बनी मिठाइयों की डिमांड बढ़ रही है, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को दर्शाता है।
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इसी तरह, रंग और गुलाल के बाजार में भी उछाल देखा जा रहा है। 12,000 करोड़ रुपये का यह कारोबार मुख्य रूप से ऑर्गेनिक और स्किन-फ्रेंडली कलर्स पर केंद्रित है, क्योंकि लोग केमिकल युक्त रंगों से दूर रहना पसंद कर रहे हैं। व्यापारी संगठनों के अनुसार, यह कारोबार छोटे उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों को बड़ा सहारा प्रदान करेगा।
कुल मिलाकर, होली का यह त्योहार न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है बल्कि लाखों लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर भी प्रदान करता है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) जैसे संस्थान भी इस मौके पर विशेष ऑफर देकर उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रहे हैं।
देश की पत्रिका की टीम की ओर से सभी पाठकों को होली की अग्रिम शुभकामनाएं। सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से त्योहार मनाएं!
