नई दिल्ली, 28 फरवरी 2026। रंगों का त्योहार होली खुशियों और उत्साह का पर्व है, लेकिन बाजार में बिक रहे केमिकल युक्त रंग इन खुशियों के रंग में भंग डाल सकते हैं। इस त्योहार को लेकर बंसल ग्लोबल हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. सुरेश बंसल ने चेतावनी दी है कि केमिकल युक्त रंग-गुलाल सेहत पर भारी पड़ सकते हैं। उन्होंने अपील की है कि होली पर ऑर्गेनिक और हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करें, ताकि त्योहार की खुशियां किसी बीमारी में न बदलें।
त्वचा और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
डॉ. सुरेश बंसल ने बताया कि उत्साह के इस माहौल में स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि केमिकल युक्त रंगों और गंदे पानी के इस्तेमाल से त्वचा रोग, एलर्जी, आंखों का संक्रमण (कंजक्टिवाइटिस), सांस संबंधी दिक्कतें और अस्थमा जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं।
“होली खुशी से मनाएं, लेकिन सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों का चयन कर अपनी सेहत की रक्षा भी जरूरी है,” डॉ. बंसल ने कहा।
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केमिकल रंगों में क्या होता है खतरनाक
डॉ. सुरेश बंसल ने बताया कि बाजार में मिलने वाले कई रंग-गुलाल में हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं। इनमें लेड ऑक्साइड, क्रोमियम और कॉपर सल्फेट जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये त्वचा पर एलर्जी, लाल चकत्ते, खुजली, जलन और सूजन जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में डर्मेटाइटिस और एक्जिमा की शिकायत बढ़ सकती है।
केमिकल रंगों में पाए जाने वाले हानिकारक तत्व:
लेड ऑक्साइड (सिंदूरी/लाल रंग में): किडनी को नुकसान, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, बच्चों में विकास में बाधा
क्रोमियम (हरे और नीले रंग में): कैंसर कारक, त्वचा में जलन, अस्थमा ट्रिगर
कॉपर सल्फेट (नीले रंग में): आंखों में एलर्जी, त्वचा पर घाव, लीवर को नुकसान
मरकरी सल्फाइड (काले रंग में): गंभीर त्वचा रोग, किडनी फेल्योर का खतरा
एल्युमिनियम ब्रोमाइड (सिल्वर रंग में): कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक), त्वचा में जलन
वाटर बैलून सबसे खतरनाक
डॉ. सुरेश बंसल ने विशेष चेतावनी देते हुए कहा कि होली के दौरान वाटर बैलून (पानी से भरे गुब्बारे) फेंकना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। तेज रफ्तार से फेंका गया गुब्बारा आंख, कान या चेहरे पर लगने से गंभीर चोट, कॉर्निया डैमेज, कान के पर्दे पर असर और नाक से खून आने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
छोटे बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये विशेष रूप से खतरनाक है, क्योंकि अचानक गुब्बारा लगने से वे संतुलन खो सकते हैं और दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।
“हर साल होली के दौरान आपातकालीन विभाग में आंखों की चोट, कान के पर्दे फटने और गंभीर चेहरे की चोटों के मामले आते हैं। ज्यादातर मामले वाटर बैलून से होते हैं,” डॉ. बंसल ने बताया।
उन्होंने अपील की है कि होली उत्साह से मनाएं, लेकिन किसी की सुरक्षा से खिलवाड़ न करें।
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गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी
बंसल ग्लोबल हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. विमला बंसल का कहना है कि होली के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, नहीं तो बड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है। केमिकल युक्त रंगों से कई तरह के गंभीर खतरे हो सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए खतरे:
बाजार में मिलने वाले अधिकतर रंगों में हानिकारक केमिकल और हैवी मेटल की मात्रा होती है। कई रंगों में पिसे हुए कांच और अन्य हानिकारक पदार्थ मिले होते हैं, जो त्वचा के संपर्क में आने से मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
डॉ. विमला बंसल ने चेतावनी देते हुए कहा, “केमिकल युक्त रंग त्वचा के माध्यम से शरीर में अवशोषित हो सकते हैं और भ्रूण तक पहुंच सकते हैं। इससे गर्भावस्था में जटिलताएं बढ़ सकती हैं।”
गर्भवती महिलाओं को होली में क्या करना चाहिए:
- केमिकल रंगों से पूरी तरह बचें
- सूखी या फूलों की होली खेलें
- भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहें
- किसी भी तरह की असुविधा होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- पानी के गुब्बारों से पूरी तरह दूर रहें
पिछले वर्ष के आंकड़े चौंकाने वाले
दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार, होली 2025 के दौरान:
- त्वचा संबंधी शिकायतों में 60% की वृद्धि
- आंखों के संक्रमण में 45% बढ़ोतरी
- श्वसन संबंधी समस्याओं में 30% इजाफा
- वाटर बैलून से चोटिल 200+ मामले
एम्स दिल्ली के आपातकालीन विभाग ने बताया कि पिछले साल होली के तीन दिनों में 150 से अधिक मरीज आंखों की चोट और एलर्जी के साथ आए थे, जिनमें से अधिकतर मामले रासायनिक रंगों और पानी के गुब्बारों से संबंधित थे।
डॉक्टरों की सलाह: सुरक्षित होली कैसे मनाएं
होली खेलने से पहले:
- नारियल तेल/जैतून का तेल लगाएं: चेहरे, बालों और पूरे शरीर पर तेल लगाने से रंग त्वचा में गहराई तक नहीं जाता
- पूरे कपड़े पहनें: शरीर का अधिकतम हिस्सा ढका रहना चाहिए
- सनग्लासेस पहनें: आंखों की सुरक्षा के लिए
- नाखूनों में तेल लगाएं: रंग नाखूनों में नहीं जमेगा
होली खेलते समय:
- केवल प्राकृतिक रंग उपयोग करें: हल्दी, गुलाबी, मेंहदी, टेसू के फूल आदि
- चेहरे पर रंग न लगाएं: विशेषकर आंखों और मुंह के पास
- गुब्बारे न फेंकें: न खुद फेंकें, न दूसरों को फेंकने दें
- पर्याप्त पानी पिएं: शरीर में केमिकल्स के प्रभाव को कम करने के लिए
होली खेलने के बाद:
- तुरंत नहाएं: गुनगुने पानी से, साबुन या बेसन-दही का उबटन
- मॉइस्चराइजर लगाएं: त्वचा को हाइड्रेट रखें
- आंखों को ठंडे पानी से धोएं: किसी भी जलन से बचने के लिए
- किसी भी समस्या पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
प्राकृतिक रंग कैसे बनाएं
डॉक्टरों ने घर पर प्राकृतिक रंग बनाने की सलाह दी है:
लाल रंग: लाल चंदन पाउडर, टमाटर, गुलाब की पंखुड़ियां
पीला रंग: हल्दी पाउडर, बेसन, टेसू के फूल
नीला रंग: नील (इंडिगो), जामुन, बैंगन का छिलका
हरा रंग: मेंहदी पाउडर, पुदीने की पत्तियां, पालक
गुलाबी रंग: चुकंदर, गुलाबजल, गुड़हल के फूल
नारंगी रंग: संतरे का छिलका, गेंदे के फूल
प्रशासन की तैयारी
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने होली के दौरान विशेष मेडिकल कैंप लगाने का निर्णय लिया है। सभी सरकारी अस्पतालों में होली के दौरान अतिरिक्त डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ तैनात किया जाएगा।
दिल्ली पुलिस ने भी वाटर बैलून और रासायनिक रंगों की बिक्री पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। दिल्ली NCR में कई जगहों पर नकली और हानिकारक रंगों की बिक्री पर छापे भी मारे जा रहे हैं।
रासायनिक रंगों की पहचान कैसे करें
खतरनाक रंगों की विशेषताएं:
- बहुत चमकीले और कृत्रिम दिखने वाले रंग
- पाउडर बहुत बारीक और धूल जैसा
- तेज और अप्राकृतिक गंध
- बहुत सस्ते रंग (₹10-20 में बड़े पैकेट)
- पैकेट पर कोई ब्रांड नाम या सामग्री सूची नहीं
सुरक्षित रंगों की विशेषताएं:
- हल्के और प्राकृतिक रंग
- हल्की या कोई गंध नहीं
- ब्रांडेड और सर्टिफाइड
- सामग्री की स्पष्ट जानकारी
- थोड़े महंगे लेकिन सुरक्षित
विशेषज्ञों की अंतिम अपील
डॉ. सुरेश बंसल ने अपील करते हुए कहा, “होली प्रेम और भाईचारे का त्योहार है। इसे सुरक्षित तरीके से मनाएं। केमिकल रंगों की जगह प्राकृतिक रंग, गुब्बारों की जगह सूखे रंग या फूलों का उपयोग करें। याद रखें, आपकी थोड़ी सी सावधानी किसी की जिंदगी बचा सकती है।”
डॉ. विमला बंसल ने कहा, “गर्भवती महिलाएं अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। होली की खुशियां मनाएं, लेकिन दूरी बनाकर। जरूरत पड़ने पर किसी भी समय अपने डॉक्टर से संपर्क करें।”
निष्कर्ष
होली की खुशियां मनाने का मतलब अपनी सेहत से समझौता करना नहीं है। थोड़ी सी सावधानी और सही रंगों का चुनाव इस त्योहार को वास्तव में यादगार और सुरक्षित बना सकता है। रासायनिक रंगों से दूर रहें, प्राकृतिक रंगों को अपनाएं और एक स्वस्थ, खुशहाल होली मनाएं।
