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Friday, 27 Feb 2026

IDFC Bank Fraud: ₹590 करोड़ की सनसनीखेज लूट! 4 गिरफ्तार, जाली चेक से उड़ाए हरियाणा सरकार के पैसे

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बैंक मैनेजर ही निकला मास्टरमाइंड! ₹2.5 करोड़ के चेक में लिख दिए ₹25 करोड़, फिर भी बैंक ने किया क्लियर; जानिए पूरे घोटाले की अंदर की कहानी

चंडीगढ़/हरियाणा, 25 फरवरी 2026 | एक IDFC Bank Fraud ऐसा बैंकिंग घोटाला जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें बैंक के पूर्व मैनेजर समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जाली चेक पर ₹2.5 करोड़ अंकों में लिखा था लेकिन शब्दों में ₹25 करोड़ लिखा गया था, और बैंक ने बिना किसी सवाल के ₹25 करोड़ ट्रांसफर कर दिए!

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घोटाले की Timeline: कब क्या हुआ?

तारीखघटनाक्रम
26 सितंबर 2025IDFC Bank में ₹50 करोड़, AU Bank में ₹25 करोड़ जमा
28 अक्टूबर 2025अधिकारी DK Behera का ट्रांसफर, लेकिन उनके नाम से चेक क्लियर
13 जनवरी 2026खाता बंद करने का आदेश, तब पता चली धोखाधड़ी
16 फरवरी 2026बैंक ने records सबमिट किए
23 फरवरी 2026हरियाणा सरकार ने ACB में FIR दर्ज की
24 फरवरी 20264 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया
25 फरवरी 2026IDFC Bank ने ₹583 करोड़ वापस किए

गिरफ्तार आरोपियों की पूरी जानकारी

क्रमनामपद/संबंधभूमिका
1रिभव ऋषिपूर्व बैंक मैनेजर, IDFC Sector-32मास्टरमाइंड – 6 महीने पहले resign किया
2अभय कुमारपूर्व Relationship Managerमास्टरमाइंड – अगस्त 2025 में resign किया
3स्वाति सिंगलाअभय की पत्नी75% हिस्सेदार – Swastik Desh Projects
4अभिषेक सिंगलास्वाति का भाई25% हिस्सेदार – Swastik Desh Projects

कैसे हुआ ₹590 करोड़ का घोटाला?

चरण 1: खाता खोलना और पैसा जमा करना

26 सितंबर 2025 को हरियाणा के Development & Panchayats Department ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 के तहत दो खाते खोले:

  • IDFC First Bank (Chandigarh): ₹50 करोड़
  • AU Small Finance Bank: ₹25 करोड़

महत्वपूर्ण: इन पैसों को खर्च करने की कोई approval नहीं थी।

चरण 2: अधिकारी बदला, लेकिन चेक चलते रहे

28 अक्टूबर 2025 को IAS Officer DK Behera का transfer हो गया। लेकिन बैंक ने उनके नाम से जाली चेक महीनों तक क्लियर करते रहे!

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चरण 3: जाली चेक का खेल

सबसे चौंकाने वाला मामला:

एक चेक पर:

  • अंकों में लिखा: ₹2,50,00,000 (₹2.5 करोड़)
  • शब्दों में लिखा: “Rupees Twenty Five Crores” (₹25 करोड़)

और बैंक ने ₹25 करोड़ ट्रांसफर कर दिए!

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चरण 4: पैसा कहां गया?

IDFC Bank Account (₹50 करोड़)
           ↓
Forged Cheques + Debit Notes
           ↓
Swastik Desh Projects (₹300 करोड़)
           ↓
Multiple Other Accounts
           ↓
₹590 करोड़ गायब!

ACB Director General A.S. Chawla: “लगभग ₹300 करोड़ Swastik Desh Projects में transfer किए गए, फिर पैसा आगे कई खातों में बांट दिया गया।”

चरण 5: पकड़ी गई धोखाधड़ी – IDFC Bank Fraud

13 जनवरी 2026 को जब Department ने दोनों banks से खाता बंद करके पैसे Axis Bank में transfer करने को कहा:

  • AU Small Finance Bank: ₹25.46 करोड़ वापस किए और खाता बंद कर दिया ✅
  • IDFC First Bank: सिर्फ ₹1.27 करोड़ transfer किए और खाता बंद! ❌

यहीं से शक हुआ!

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

1. 390 से ज्यादा Suspicious Transactions

  • 170+ accounts में संदिग्ध लेन-देन
  • ₹70 करोड़ अभी freeze किए गए
  • ज्यादातर transactions Chandigarh, Panchkula, Mohali में

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2. Tricity का फायदा उठाया

ACB DG Chawla: “आम तौर पर राज्य से बाहर सरकारी फंड ट्रांसफर होने पर alert मिलता है। लेकिन Tricity (Chandigarh-Panchkula-Mohali) एक common capital area है, इसलिए transactions में red flag नहीं आया।”

3. ₹46.56 करोड़ AU Bank में भी गए

Investigation में पता चला कि ₹46.56 करोड़ जाली cheques और debit notes से AU Small Finance Bank में भी transfer किए गए थे।

4. Mobile Alerts गलत Number पर

Transaction alerts एक ऐसे mobile number पर जा रहे थे जो ‘Prince’ नाम के एक Superintendent के नाम पर registered था।

5. Signature Match नहीं

जांच समिति ने पाया कि cheques पर signatures account opening form के signatures से match नहीं हो रहे थे।

IDFC Bank ने ₹583 करोड़ वापस किए

Bank ने 25 फरवरी 2026 को official statement जारी करके कहा:

IDFC First Bank Statement:

“हमने हरियाणा सरकार के departments द्वारा claim की गई principal और interest की 100% राशि तुरंत लौटा दी है, जो कुल ₹583 करोड़ बनती है। Final amount further claims या reconciliation के आधार पर बदल सकती है।”

₹583 करोड़ vs ₹590 करोड़ में अंतर क्यों?

राशिस्पष्टीकरण
₹490 करोड़पहली जांच में पाई गई कमी
₹100 करोड़बैंक की अपनी जांच में मिली अतिरिक्त कमी
₹590 करोड़Total Fraud Amount
₹583 करोड़Bank ने principal + interest लौटाए
₹7 करोड़अभी reconciliation बाकी है

हरियाणा सरकार की कार्रवाई

CM Nayab Singh Saini का बयान

विधानसभा में CM का ऐलान: “सरकारी departments से जुड़े जो भी पैसे थे, पूरी रकम 24 घंटे में वापस हमारे खातों में आ गई है। ₹556 करोड़ (जिसमें ₹22 करोड़ interest शामिल है) recover हो गई है।”

कड़ा Warning: “जो भी इसमें शामिल होगा – चाहे वह बैंक कर्मचारी हो, निजी व्यक्ति हो, या सरकारी कर्मचारी – किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।”

सरकार ने उठाए ये कड़े कदम

1. दोनों Banks को De-empanelled किया

हरियाणा सरकार ने दोनों banks को सरकारी कामकाज से बाहर कर दिया:

  • IDFC First Bank ❌
  • AU Small Finance Bank ❌

2. सभी Funds Nationalized Banks में Shift

आदेश दिया गया कि सभी departmental funds को:

  • Nationalized Banks में transfer करें
  • Private banks से दूर रखें

3. High-Level Committee गठित

Finance Secretary की अगुवाई में committee बनाई गई जो:

  • Banking protocols की review करेगी
  • Safeguards को strengthen करेगी
  • ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी

Opposition की मांग

Congress नेता Bhupinder Singh Hooda: “यह मामला बहुत गंभीर है। CBI जांच होनी चाहिए।”

Haryana Congress Chief Rao Narender Singh: “₹590 करोड़ की धोखाधड़ी में सिर्फ 4 लोग गिरफ्तार? और कौन-कौन शामिल है? CBI probe हो।”

ACB की Investigation: और गिरफ्तारियां होंगी

Haryana State Vigilance & Anti-Corruption Bureau की ओर से:

FIR में क्या-क्या शामिल?

  • Forgery (जालसाजी)
  • Cheating (धोखाधड़ी)
  • Criminal Conspiracy (आपराधिक साजिश)
  • Criminal Breach of Trust (विश्वासघात)

Investigation में अभी क्या हो रहा है?

✅ पूरा हो चुका:

  • 4 मुख्य आरोपी गिरफ्तार
  • ₹70 करोड़ freeze किए
  • 390+ transactions trace किए
  • Money trail की mapping की

⏳ चल रहा है:

  • और आरोपियों की तलाश
  • Private individuals पर नजर (flight risk के कारण)
  • AU Small Finance Bank से पूरे records मांगे
  • Forensic audit

ACB की चेतावनी: “यह सिर्फ शुरुआत है। और भी लोग involved हो सकते हैं। Investigation का दायरा खुला रखा गया है।”

IDFC Bank का पक्ष

Bank का Official Statement

Key Points:

  1. Immediate Repayment: पूरी राशि तुरंत लौटाई
  2. Full Cooperation: Law enforcement agencies को पूरा support
  3. Internal Action: 4 employees suspended
  4. Police Complaint: खुद bank ने complaint दर्ज की
  5. Forensic Audit: External agency से detailed audit करवा रहे हैं

Bank की Financial Health

IndicatorValueStatus
CRISIL Rating (FD)AAAHighest
Long-term RatingAA+Strong
Total Business₹5,62,090 करोड़22.6% YoY Growth
GNPA1.69%Healthy
Net NPA0.53%Very Good
Capital Adequacy16.22%Strong
CASA Ratio51.6%Excellent
NIM5.76%Healthy

Bank का दावा: “हम financially मजबूत हैं और well-capitalised हैं। यह घटना एक specific branch की है और bank की overall health पर कोई असर नहीं है।”

RBI का बयान

Reserve Bank of India:

“यह incident banking sector के लिए कोई systemic risk नहीं है। हालांकि, criminal investigation और recovery efforts जारी हैं।”

यह Case इतना खास क्यों है?

1. Amount की भारीमात्रा

₹590 करोड़ – यह हरियाणा में अब तक के सबसे बड़े बैंकिंग frauds में से एक है।

2. बुनियादी Banking Norms की अनदेखी

  • Cheque में अंकों और शब्दों में अलग-अलग amount
  • Transfer हो जाने के बाद भी cheques क्लियर
  • Signature verification नहीं
  • Multiple red flags, फिर भी कोई action नहीं

3. Government Funds का Target

यह private account नहीं, बल्कि सरकारी जनकल्याण योजना (Gramin Awas Yojana) का पैसा था।

4. Multiple Banks Involved

सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो private banks में धोखाधड़ी:

  • IDFC First Bank
  • AU Small Finance Bank

5. Insider-Outsider Nexus

Bank के अंदर के लोग (Managers) + बाहर के लोग (Private firm owners) की साजिश।

विशेषज्ञों की राय

Banking Expert डॉ. राकेश शर्मा: “यह case बताता है कि Private banks में internal controls कितने कमजोर हो सकते हैं। ₹25 करोड़ का transaction बिना multiple-level verification के कैसे हो गया?”

Former RBI Official अनिल वर्मा: “Signature mismatch, post-dated cheques, amount discrepancy – इतने सारे red flags के बावजूद transaction clear हुआ। यह gross negligence है।”

Cyber Security Expert प्रियंका मेहता: “Mobile alerts गलत number पर जा रहे थे। यह दिखाता है कि account opening में ही धोखाधड़ी थी। Bank की KYC process fail हुई।”

आम जनता के लिए सबक

इस Case से हम क्या सीख सकते हैं?

1. Private Banks पर भरोसा:

  • Private banks में भी fraud हो सकता है
  • Reputation से ज्यादा vigilance जरूरी है

2. Multiple Verifications:

  • बड़ी amounts के लिए multiple approvals होनी चाहिए
  • Single person को unlimited power नहीं मिलनी चाहिए

3. Regular Audits:

  • Monthly या quarterly audit जरूरी है
  • Third-party audit से transparency आती है

4. Technology का सही इस्तेमाल:

  • AI-based fraud detection systems
  • Real-time alerts
  • Biometric verification

5. Whistleblower Protection:

  • अंदर की गड़बड़ियों को report करने वालों को protection चाहिए

आगे क्या होगा?

Short Term (अगले 1-2 महीने)

✅ होने वाले कदम:

  • Forensic audit की complete report
  • और गिरफ्तारियां
  • ₹70 करोड़ frozen amount की recovery
  • Court proceedings शुरू

Medium Term (3-6 महीने)

📊 Expected Developments:

  • Banking regulations में सख्ती
  • Private banks के लिए नए guidelines
  • Haryana में banking protocol overhaul
  • CBI probe (अगर Opposition की मांग मानी गई)

Long Term (6-12 महीने)

🎯 Possible Changes:

  • Private banks में government funds रखने पर restrictions
  • Mandatory insurance for government accounts
  • Stricter KYC norms
  • Real-time monitoring systems

Similar Cases: पहले भी हुए हैं ऐसे Frauds

YearBankAmountStatus
2018PNB-Nirav Modi₹14,000 करोड़Under trial
2020Yes Bank-DHFL₹34,000 करोड़Investigation on
2023Bank of Baroda₹6,000 करोड़Arrests made
2026IDFC First₹590 करोड़4 arrested, probe on

सवाल जो अभी भी बाकी हैं

❓ Questions:

  1. Bank के senior management को कब पता चला?
  2. Internal audit ने कभी flag नहीं किया?
  3. ₹300 करोड़ Swastik Desh Projects में गए – क्या किया गया उन पैसों का?
  4. और कौन-कौन से खाते involved हैं?
  5. AU Small Finance Bank की क्या भूमिका थी?
  6. Government employees का कोई हाथ है क्या?
  7. पूरे ₹590 करोड़ की recovery होगी या नहीं?

निष्कर्ष

₹590 करोड़ का यह banking fraud भारत की financial system में गहरी खामियों को उजागर करता है।

चौंकाने वाले पहलू:

  • ✅ Bank ने पैसे वापस किए (₹583 करोड़)
  • ✅ 4 आरोपी गिरफ्तार हुए
  • ❌ लेकिन यह घोटाला हुआ कैसे?
  • ❌ Months तक कैसे चलता रहा?
  • ❌ Internal controls कहां थे?

Real Concern: अगर सरकारी खातों में इतनी बड़ी धोखाधड़ी हो सकती है, तो आम जनता के खाते कितने safe हैं?

यह मामला एक wake-up call है – न सिर्फ banks के लिए, बल्कि regulators और government के लिए भी।

Haryana सरकार ने तुरंत action लिया, banks को de-empanel किया, और investigation तेज की – यह सराहनीय है। लेकिन असली सवाल यह है: ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए क्या systemic changes होंगे?