खाड़ी के पानी में जब गोलियां और मिसाइलें चलती हैं, तो दिल्ली के साउथ ब्लॉक से मुंबई के बंदरगाहों तक हलचल मच जाती है। यही हो रहा था पिछले कुछ दिनों से — जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ऐसी चेतावनियां दीं कि शिपिंग कंपनियों की नींद उड़ गई।
लेकिन अब एक राहत की खबर है।
ईरान का भरोसा — भारत को मिली राहत
समाचार एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से खुलासा किया है कि ईरान ने भारतीय जहाजों को Strait of Hormuz से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। तेहरान ने भरोसा दिलाया है कि भारतीय पोत इस रणनीतिक समुद्री गलियारे से बिना किसी रुकावट के निकल सकते हैं।
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर है। इससे पहले ईरान ने साफ कह दिया था कि इस इलाके से गुजरने वाले किसी भी जहाज को “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं। उस एक बयान से पूरी दुनिया के शिपिंग बाजार में खलबली मच गई थी।
भारत के लिए यह अनुमति सिर्फ एक कूटनीतिक जीत नहीं — यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है।
होर्मुज की अहमियत — एक नंबर समझो
दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी तंग समुद्री रास्ते से गुजरता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की चौड़ाई कहीं-कहीं सिर्फ 33 किलोमीटर रह जाती है — और यही उसकी ताकत है, यही उसकी कमजोरी भी। सऊदी अरब, UAE, कुवैत, इराक और ईरान — इन सभी का तेल इसी रास्ते से निकलता है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है। ऐसे में अगर यह रास्ता बंद हो जाए, तो pump पर petrol की कीमत से लेकर रसोई गैस के सिलेंडर तक — सब पर असर पड़ता है। सीधे आम आदमी की जेब पर।
उसी रात — एक और दर्दनाक घटना
जिस वक्त ईरान की ओर से राहत की खबर आ रही थी, उसी इलाके में एक हादसा हो गया जिसने सबको हिला दिया।
बुधवार को थाईलैंड में रजिस्टर्ड मालवाहक जहाज ‘मयूरी नारी’ पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। जहाज में भीषण आग लग गई। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, काले धुएं के बादल दूर तक देखे जा सकते थे। चालक दल को लाइफ राफ्ट के जरिए जहाज छोड़ना पड़ा — वो भी जलते हुए समंदर के बीच।
ओमानी नौसेना ने फौरन बचाव अभियान शुरू किया। 20 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन तीन अभी भी लापता हैं। तलाश जारी है।
यह जहाज UAE के खलीफा बंदरगाह से भारत के गुजरात स्थित कंडला बंदरगाह की ओर जा रहा था। हमले में कोई भारतीय नागरिक था या नहीं — इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन मंजिल भारत थी, इसलिए यह घटना यहां भी बेचैनी पैदा करती है।
दोस्ती और खतरा — साथ-साथ
ईरान के साथ भारत के संबंध हमेशा से एक नाजुक संतुलन पर टिके रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने चाबहार बंदरगाह में निवेश किया। तेहरान के साथ कूटनीतिक धागा बनाए रखा। शायद उसी रिश्ते का नतीजा है यह “safe passage” का भरोसा।
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लेकिन ‘मयूरी नारी’ पर हमला यह भी बताता है कि भरोसे और हकीकत के बीच अभी फासला बाकी है। जब तक यह नहीं पता कि हमला किसने किया — ईरान समर्थित गुटों ने, या किसी और ने — तब तक खाड़ी में हर जहाज का सफर एक जोखिम ही है।
समंदर शांत दिखता है। पर भीतर से उबल रहा है।
