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Sunday, 08 Mar 2026

जंतर-मंतर पर UGC विरोध प्रदर्शन: सवर्ण समाज ने किया बड़ा ऐलान, “2027 में योगी को वोट, 2029 में मोदी को नहीं”

आरक्षण नीति के विरोध में उमड़ा जनसैलाब, UP की राजनीति में नया मोड़, प्रदर्शनकारियों ने बताई अलग-अलग चुनावी रणनीति

नई दिल्ली, 5 मार्च 2026 | दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार को UGC (University Grants Commission) की आरक्षण नीति के विरोध में एक विशाल प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश समेत देशभर से आए सवर्ण समाज के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल शिक्षा में बढ़ते आरक्षण का विरोध किया, बल्कि एक चौंकाने वाली राजनीतिक घोषणा भी की।

जंतर-मंतर पर उमड़ा जनसैलाब

देश के प्रमुख विरोध प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर सुबह 10 बजे से ही प्रदर्शनकारी जुटने लगे थे। UP, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से आए लोगों ने “शिक्षा में समानता” और “मेरिट को मिले सम्मान” जैसे बैनर लगाए। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। करीब 500-700 लोगों ने इस धरना प्रदर्शन में भाग लिया।

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बड़ी राजनीतिक घोषणा: अलग-अलग चुनावों में अलग रणनीति

प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के नेताओं ने एक अभूतपूर्व राजनीतिक रणनीति का ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्थन करेंगे, लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के साथ नहीं खड़े होंगे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह निर्णय केंद्र सरकार की आरक्षण नीति से नाराजगी के कारण लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि CM योगी को उनका समर्थन जारी रहेगा क्योंकि उन्होंने UP में कानून व्यवस्था सुधारी है और माफियाओं पर लगाम लगाई है।

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योगी को क्यों नहीं छोड़ना चाहते?

नेताओं ने बताया कि CM योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत किया है, गुंडागर्दी खत्म की है और प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है। चूंकि योगी भी सवर्ण समाज से आते हैं और समाज के लिए काम करते हैं, इसलिए उन्हें 2027 में पूरा समर्थन दिया जाएगा।

लेकिन केंद्र सरकार को संदेश देने के लिए 2029 में अलग रुख अपनाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि UP से 80 लोकसभा सीटें आती हैं और यहीं से प्रधानमंत्री बनने का रास्ता जाता है। इसलिए 2029 में सवर्ण समाज की ताकत दिखाकर भाजपा को संदेश दिया जाएगा।

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मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निम्नलिखित मांगें रखीं:

1. UGC आरक्षण नीति पर पुनर्विचार
शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का दायरा बढ़ाने के फैसले को वापस लिया जाए।

2. EWS आरक्षण बढ़ाया जाए
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 25% किया जाए।

3. मेरिट-बेस्ड चयन
सरकारी नौकरियों और शिक्षा में योग्यता आधारित चयन को प्राथमिकता दी जाए।

4. प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का विरोध
निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू न किया जाए।

5. राजनीतिक प्रतिनिधित्व
सवर्ण समाज को राजनीतिक पदों और टिकट वितरण में उचित हिस्सा मिले।

युवाओं की पीड़ा

प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं ने अपनी समस्याएं बताईं। उन्होंने कहा कि 95% अंक लाने के बावजूद IIT, NIT और मेडिकल कॉलेजों में सीट नहीं मिल पाती, जबकि आरक्षण के तहत कम अंकों पर दूसरों को प्रवेश मिल जाता है। इसके कारण मेधावी छात्रों को महंगे प्राइवेट कॉलेजों में 40-50 लाख रुपये फीस भरनी पड़ती है, जो मध्यम वर्ग के लिए बहुत मुश्किल है।

“अगर सवर्ण समाज एक साथ आए तो बड़ी ताकत”

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर सवर्ण समाज एकजुट हो जाए तो यह बहुत बड़ी ताकत बन सकता है। उनका कहना है कि यह pressure tactics है जिससे सरकार को समझ आएगा कि सवर्णों को granted नहीं लिया जा सकता।

नेताओं ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर इस आंदोलन को काफी समर्थन मिल रहा है और WhatsApp groups के जरिए लोग जुड़ रहे हैं। 2027 तक यह आंदोलन एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन जाएगा।

प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा

पूरा प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। प्रदर्शनकारी शाम तक जंतर-मंतर पर रहे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।

UP की राजनीति पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। सवर्ण समाज परंपरागत रूप से भाजपा का मजबूत वोट बैंक रहा है। अगर यह समुदाय 2029 में भाजपा से दूर होता है तो 80 लोकसभा सीटों वाले UP में पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है और समय के साथ स्थिति बदल सकती है। अभी यह कहना मुश्किल है कि पूरा सवर्ण समाज इस रणनीति के साथ आएगा या नहीं।

आगे क्या?

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में और बड़े प्रदर्शन होंगे और सरकार पर दबाव बढ़ाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 2027 और 2029 के चुनावों में इसका राजनीतिक परिणाम देखने को मिलेगा।

इस बीच, भाजपा नेतृत्व की तरफ से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


देशकीपत्रिका ब्यूरो, नई दिल्ली

जंतर-मंतर से उठी यह आवाज उत्तर प्रदेश की राजनीति को कितना प्रभावित करती है, यह आने वाले समय में देखने को मिलेगा। हर बड़ी खबर के लिए देशकीपत्रिका के साथ बने रहें।