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Wednesday, 04 Feb 2026

वाराणसी में वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन पर पीएम मोदी को भेंट: काशी की मीनाकारी कला से सजा ट्रेन मॉडल, परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम

मुख्यमंत्री योगी ने काशीवासियों की ओर से दिया विशेष जीआई क्राफ्ट उपहार; दो फुट लंबा, चार किलो का नायाब नमूना

वाराणसी, 09 नवंबर 2025। महादेव की नगरी वाराणसी के रेलवे स्टेशन पर शनिवार को वंदे भारत एक्सप्रेस का भव्य उद्घाटन हुआ, जो काशी को खजुराहो से जोड़ने वाली नई रेल सेवा की शुरुआत का प्रतीक बना। इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काशीवासियों की ओर से एक अनमोल उपहार भेंट किया—मीनाकारी कला से सजा वंदे भारत ट्रेन का जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग वाला विशेष मॉडल। यह उपहार न केवल काशी की प्राचीन शिल्प परंपरा का जीवंत प्रमाण है, बल्कि शिवभूमि काशी और शिल्प-संस्कृति के केंद्र खजुराहो को प्रतीकात्मक रूप से जोड़ता है।

उद्घाटन की भव्यता में छिपी काशी की कलात्मक विरासत
कार्यक्रम में पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो अब काशी को देश की अन्य प्रमुख नगरीय केंद्रों से तेज और सुविधाजनक रूप से जोड़ेगी। इसी उत्साहपूर्ण माहौल में सीएम योगी ने पीएम को यह मॉडल सौंपा, जो काशी की मीनाकारी कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. रजनीकांत शर्मा ने बताया कि इस उपहार की तैयारी की सूचना मिलते ही शिल्पियों की टीम ने काम शुरू कर दिया था। “यह मॉडल वंदे भारत के शुभारंभ के संदर्भ में तैयार किया गया, ताकि काशी और खजुराहो—दोनों शिव-शक्ति के प्रतीक—की सांस्कृतिक धरोहर एक सूत्र में बंध जाए। मीनाकारी की बारीक नक्काशी में काशी के पारंपरिक रंगों और पैटर्न का उपयोग किया गया है, जो आधुनिक ट्रेन डिजाइन से मेल खाता है।”

शिल्पी पिता-पुत्र की कला: एक सप्ताह की साधना
यह अनोखा मॉडल वाराणसी के भैरव गली में रहने वाले राज्य पुरस्कार प्राप्त शिल्पी अमरनाथ वर्मा और उनके पुत्र अरुण कुमार वर्मा ने तैयार किया। लगभग दो फुट लंबा और चार किलोग्राम वजनी यह कलाकृति लकड़ी के मजबूत बेस पर स्थापित मेटल संरचना पर आधारित है। एक सप्ताह की कठिन मेहनत से बनी इस कृति में मीनाकारी की अत्यंत सूक्ष्म नक्काशी की गई है, जो ट्रेन को जीवंत और चमकदार रूप प्रदान करती है। पारंपरिक हिंदुस्तानी रंगों—लाल, नीला, हरा और सुनहरा—के साथ आधुनिक सौंदर्य का मिश्रण इसे न केवल सजावटी बनाता है, बल्कि काशी की जीवंत सांस्कृतिक पहचान को भी उजागर करता है। अरुण कुमार ने भावुक होकर कहा, “यह मॉडल सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि काशी के शिल्पियों की भावनाओं का प्रतीक है। पिता के साथ मिलकर इसे गढ़ना गर्व का विषय है।”

‘लोकल से ग्लोबल’ की प्रेरणा: शिल्पियों में नया जोश
अरुण कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘लोकल से ग्लोबल’ पहल की सराहना करते हुए कहा, “पीएम जी की दूरदृष्टि से काशी के शिल्पी नई ऊर्जा से लबरेज हैं। पहले हमारे पास आर्डर कम थे, लेकिन अब विदेशों से भी मांग बढ़ गई है। सप्लाई पूरी करने में चुनौती आ रही है, लेकिन यह हमारे जीआई उत्पादों के लिए स्वर्णिम युग है।” उन्होंने बताया कि मीनाकारी जैसे पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर ले जाना संभव हो रहा है, और यह मॉडल भी उसी दिशा में एक कदम है। काशी के जीआई क्राफ्ट—जैसे बनारसी साड़ी, मीनाकारी और तसर सिल्क—अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पैठ बना रहे हैं, जो स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार और सम्मान का स्रोत बन गया है।

यह उपहार वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन को और भी खास बना देता है, जो काशी को आधुनिक भारत की धड़कन से जोड़ता है। कार्यक्रम में सैकड़ों स्थानीय निवासी, रेल अधिकारियों और सांस्कृतिक हस्तियां उपस्थित रहीं, जिन्होंने इस सांस्कृतिक-आधुनिक मेल को सराहा। वंदे भारत की यह नई सेवा न केवल यात्रा को तेज करेगी, बल्कि काशी की विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाएगी।

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