पूर्णिया रेलवे स्टेशन के बाहर सुबह से ही भीड़ जमा होने लगी थी। बैनर, झंडे, और JDU कार्यकर्ताओं की टोलियाँ — माहौल किसी बड़े त्योहार से कम नहीं था। वजह साफ थी: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सीमांचल के दौरे पर हैं, और अपने साथ लाए हैं करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की लंबी फेहरिस्त।
सीमांचल — यानी पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज — यह इलाका हमेशा से बिहार के सबसे पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। बाढ़, गरीबी, और बुनियादी सुविधाओं की कमी यहाँ की पुरानी पहचान रही है। लेकिन आज का दिन शायद कुछ बदलाव की नींव रखे।
पूर्णिया में क्या-क्या मिलेगा?
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मुख्यमंत्री आज पूर्णिया में कई बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इनमें सड़क निर्माण, पुल, स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। जिले के कई ऐसे इलाके जहाँ अभी तक पक्की सड़क नहीं पहुंची थी, वहाँ के लिए भी घोषणाएं होने की उम्मीद है।
स्थानीय विधायक विजय खेमका ने कहा, “यह सिर्फ उद्घाटन नहीं है, यह पूर्णिया के लोगों के लिए एक नई शुरुआत है। CM साहब ने हमारी बात सुनी और आज उसका नतीजा सामने है।”
शहर में जल-जमाव की समस्या को लेकर भी एक drainage project की घोषणा हो सकती है — जो यहाँ के निवासियों की सालों पुरानी मांग रही है।
कटिहार में भी बड़ी योजनाओं की बारी
पूर्णिया के बाद CM का काफिला कटिहार पहुंचेगा। यहाँ भी एजेंडा कम नहीं है। कटिहार में रेल कनेक्टिविटी और नदी-क्षेत्र के गाँवों तक पहुँच बेहतर करने की योजनाओं पर फोकस रहेगा। इसके अलावा, कई सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के upgrade की भी बात है।
कटिहार के रहने वाले किसान रामजतन मंडल का कहना है — “हम देखेंगे। घोषणाएं तो बहुत हुई हैं इस जिले में, लेकिन जमीन पर काम कितना होता है, यही असली सवाल है।” यह आम लोगों की सोच है। उम्मीद के साथ-साथ एक संदेह भी।
सीमांचल की राजनीतिक अहमियत
यह दौरा सिर्फ विकास की कहानी नहीं है — इसका राजनीतिक पहलू भी उतना ही मजबूत है। सीमांचल में मुस्लिम और अति-पिछड़ा वर्ग की बड़ी आबादी है। यहाँ AIMIM, कांग्रेस और RJD की मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में नीतीश सरकार का यह दौरा 2025 के elections से पहले एक strategic move भी माना जा रहा है।
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पिछले कुछ महीनों में NDA सरकार ने सीमांचल में कई बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है। आज का कार्यक्रम उसी सिलसिले की एक कड़ी है।
जमीनी हकीकत क्या कहती है?
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले पाँच सालों में सीमांचल में सड़कों की लंबाई दोगुनी हुई है। स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी बढ़ी है। लेकिन NGOs और सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट्स एक अलग तस्वीर पेश करती हैं — कुपोषण दर अभी भी national average से ऊपर है, और बाढ़ राहत व्यवस्था हर साल सवालों के घेरे में रहती है।
Purnea की एक शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “स्कूल की building तो बन गई, लेकिन teachers नहीं हैं। उद्घाटन होता है, फिर सब वैसा का वैसा।” यह एक कड़वा सच है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या बदलेगा इस बार?
सरकार का दावा है कि इस बार योजनाओं की monitoring के लिए एक dedicated mechanism बनाया गया है। हर project को GPS-tagged किया जाएगा और काम की progress online track होगी।
यह एक सकारात्मक कदम है — अगर लागू हो सका तो।
आज के कार्यक्रम में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। मुख्यमंत्री का काफिला दोपहर तक पूर्णिया और शाम तक कटिहार पहुंचेगा।
सीमांचल के लोग इंतजार में हैं — उम्मीद के साथ, और अपने पुराने तजुर्बे के साथ भी।
