यूपी में आईसीयू सुविधा अब जिलों में ही उपलब्ध है। योगी सरकार ने 40 जिला अस्पतालों में आईसीयू शुरू किए। इससे 2100 से ज्यादा गंभीर मरीजों को अपने जिले में इलाज मिला। लखनऊ और दिल्ली की दौड़ खत्म हुई।
स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति
लखनऊ, 25 जुलाई। योगी सरकार ने पिछले आठ सालों में यूपी के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया है। विशेष रूप से गहन चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके बाद, 40 जिला अस्पतालों में गहन चिकित्सा इकाइयां (आईसीयू) शुरू की गईं। यह पहल सवा साल पहले शुरू हुई थी। अब 2100 से ज्यादा गंभीर मरीजों को अपने जिले में ही इलाज मिल रहा है। इससे मरीजों और उनके परिवारों को लखनऊ या दिल्ली जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
डॉक्टर-नर्स को खास प्रशिक्षण
पहले जिला अस्पतालों में आईसीयू का ढांचा तो था, लेकिन प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी थी। इस वजह से गंभीर मरीजों को बड़े शहरों में भेजना पड़ता था। हालांकि, योगी सरकार ने इस कमी को दूर किया। डॉक्टरों और नर्सों को आईसीयू प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। इसकी अगुवाई झांसी के एमएलबी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर अंशुल जैन ने की। यह प्रशिक्षण केयर-अप पहल के तहत हुआ। इसमें वेंटिलेटर प्रबंधन, रोगी निगरानी और संक्रमण नियंत्रण जैसे विषय शामिल थे।
किन जिलों में मिल रही सुविधा
लखनऊ के बलरामपुर, सिविल, रानी लक्ष्मीबाई, लोकबंधु और राम सागर मिश्रा अस्पतालों में आईसीयू पूरी तरह सक्रिय हैं। इसके अलावा, बाराबंकी, अयोध्या, सीतापुर, उन्नाव, कानपुर नगर, वाराणसी, प्रयागराज, अंबेडकर नगर, बलिया, आजमगढ़, मऊ, गोरखपुर और बस्ती में भी आईसीयू काम कर रहे हैं। फिर, पश्चिमी यूपी के इटावा, बांदा, चित्रकूट, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, बुलंदशहर, कन्नौज, झांसी, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और शामली में भी यह सुविधा उपलब्ध है।
लोकबंधु में 150 मरीजों का इलाज
प्रोफेसर अंशुल जैन ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार चलेगा। इस दौरान, सभी जिला अस्पतालों के आईसीयू को साल के अंत तक पूरी तरह सक्रिय करने का लक्ष्य है। लोकबंधु अस्पताल के डॉ. दीपक कुमार मौर्य ने कहा कि उनके 11 बेड वाले आईसीयू में एक महीने में 150 से ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ। प्रशिक्षित कर्मचारी अब वेंटिलेटर और आधुनिक उपकरणों का बेहतर प्रबंधन कर रहे हैं। सिविल अस्पताल के डॉ. अभिषेक सिंह ने भी बताया कि प्रशिक्षण से मरीजों की संख्या बढ़ी है।
आर्थिक बोझ हुआ कम
प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ को वेंटिलेटर और आधुनिक उपकरणों का प्रशिक्षण दिया गया। इसका मकसद जनता को फायदा पहुंचाना था। अंत में, यह योजना कामयाब हो रही है। पूर्वी और पश्चिमी यूपी के जिला अस्पतालों में क्रिटिकल केयर यूनिट सक्रिय हैं। इससे मरीजों को स्थानीय इलाज मिल राह है। साथ ही, उनका आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।
क्रिटिकल केयर मैनुअल का विमोचन
प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने डॉ. अंशुल जैन की पुस्तक ‘क्रिटिकल केयर रिफ्रेशर मैनुअल’ का विमोचन किया। इस पुस्तक में यूपी और दिल्ली के 36 विशेषज्ञों के लेख हैं। यह मैनुअल डॉक्टरों को आईसीयू विशेषज्ञ बनाने में मदद करेगा।
राम भुवन सिंह, सीनियर रिपोर्टर
