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Wednesday, 04 Feb 2026

वंदे मातरम् पर चर्चा: केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना और साहस का मंत्र – योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 22 दिसंबर 2025वंदे मातरम् पर चर्चा उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और क्रांतिकारियों के साहस का मंत्र बताया। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित इस विशेष चर्चा सत्र में योगी ने कहा कि यह गीत केवल काव्य नहीं, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। योगी ने वंदे मातरम् को औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बताया और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक इसके महत्व को रेखांकित किया। क्या वंदे मातरम् आज भी राष्ट्र चेतना जगाने में सक्षम है? आइए, वंदे मातरम् पर चर्चा की पूरी रिपोर्ट, योगी के प्रमुख बयानों, ऐतिहासिक संदर्भ और इसके महत्व पर विस्तार से जानें।

वंदे मातरम् पर चर्चा: विधानसभा में विशेष सत्र का आयोजन

सत्र की शुरुआत: योगी आदित्यनाथ का संबोधन

उत्तर प्रदेश विधानसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा का विशेष सत्र राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्र की शुरुआत करते हुए कहा, “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है।” योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया कि उनके मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा बन रही है जहां इस विषय पर विस्तृत चर्चा हो रही है।

योगी ने कहा, “यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है।”

Vande Mataram – राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक यात्रा।

वंदे मातरम्: स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष

योगी आदित्यनाथ ने वंदे मातरम् को स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि यह गीत ब्रिटिश शासन में भी स्वतंत्रता की चेतना का स्वर बना रहा। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की विफलता के बाद जब देश हताशा में था, तब वंदे मातरम् ने सुप्त चेतना को जीवित रखा।

मुख्यमंत्री ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना का जिक्र करते हुए कहा, “ब्रिटिश शासन में डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यरत बंकिमचंद्र ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया। यह औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।”

Bankim Chandra Chattopadhyay – वंदे मातरम् के रचयिता।

वंदे मातरम् पर चर्चा: 1896 से 2025 तक का सफर

1896 में पहली बार गाया गया: रवींद्रनाथ टैगोर का योगदान

योगी ने बताया कि 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार वंदे मातरम् को स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए मंत्र बन गया। जब गीत की रजत और स्वर्ण जयंती मनाई जा रही थी, तब भी ब्रिटिश शासन था, लेकिन वंदे मातरम् ने चेतना जगाए रखी।

Rabindranath Tagore – जिन्होंने वंदे मातरम् को स्वर दिया।

1857 से राष्ट्र चेतना का माध्यम

मुख्यमंत्री ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख किया – बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद हताशा में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाया।

योगी ने कहा, “भारत माता केवल भूभाग नहीं, हर भारतीय की भावना थी। ‘सुजलाम्, सुफलाम्, मलयजशीतलाम्’ की पंक्तियों ने प्रकृति, समृद्धि और शक्ति को मूर्त रूप दिया।”

Indian Rebellion of 1857 – वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि।

वंदे मातरम् पर चर्चा: शताब्दी से 150 वर्ष तक का महत्व

शताब्दी के समय कांग्रेस की सत्ता और आपातकाल

योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब कांग्रेस सत्ता में थी, लेकिन उसने आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटा। यह इतिहास का काला अध्याय है।

150 वर्ष पर विकसित भारत का संकल्प

आज जब 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। बंकिमचंद्र का सपना साकार हो रहा है। योगी ने कहा, “यह चर्चा सदन में सामयिक है।”

Constitution of India – वंदे मातरम् का संवैधानिक दर्जा।

वंदे मातरम् पर चर्चा का संदेश: राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक चेतना

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक

योगी ने वंदे मातरम् को औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम बताया। यह स्वाधीनता की साधना थी। गीत ने देश की आत्मा जगाई।

आज का संकल्प: भारत माता की सेवा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् हमें राष्ट्रीय कर्तव्यों की याद दिलाता है। यह संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है।

वंदे मातरम् पर चर्चा FAQ: प्रमुख सवालों के जवाब

Q1: वंदे मातरम् किसने लिखा?

A: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने, आनंदमठ उपन्यास में।

Q2: पहली बार कब गाया गया?

A: 1896 कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने।

Q3: वंदे मातरम् का दर्जा क्या है?

A: राष्ट्रगीत – जन गण मन के समान सम्मान।

Q4: 150 वर्ष क्यों मनाए जा रहे?

A: 1875 में रचना, 2025 में 150 वर्ष पूरे।

Q5: योगी ने क्या कहा?

A: यह स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और साहस का मंत्र है।

Q6: 1857 से क्या संबंध?

A: स्वतंत्रता संग्राम की हताशा में चेतना जगाई।

Q7: कांग्रेस पर क्या आरोप?

A: शताब्दी पर आपातकाल थोपा।

Q8: आज का महत्व?

A: विकसित भारत के संकल्प में प्रेरणा।

वंदे मातरम् पर चर्चा – राष्ट्र चेतना का पुनर्जागरण

वंदे मातरम् पर चर्चा ने विधानसभा में राष्ट्रवाद की लहर दौड़ा दी। योगी आदित्यनाथ के बयानों से साफ है कि वंदे मातरम् आज भी जीवंत है।

वंदे मातरम् आपके लिए क्या मायने रखता है? कमेंट करें।