लखनऊ में योगी सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 67.50 लाख गरीब बुजुर्गों को आर्थिक सहायता देने का नया लक्ष्य तय किया। डिजिटल प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी, 2017 से दोगुने लाभार्थी अब तक जुड़े।
लखनऊ, 12 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत गरीब बुजुर्गों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में ही 61 लाख लाभार्थियों के लक्ष्य को पार कर लिया है। अब सरकार का नया लक्ष्य 67.50 लाख पात्र बुजुर्गों तक पेंशन पहुंचाना है। इससे पहले, पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 56 लाख बुजुर्गों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की पेंशन दी गई थी, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से लाभ
योगी सरकार ने समाज कल्याण विभाग के जरिए इस योजना को और प्रभावी बनाया है। सिंगल नोडल एकाउंट (SNA) प्रणाली के तहत पेंशन अब आधार-लिंक्ड खातों में सीधे पहुंचती है, जिससे मध्यस्थों की जरूरत खत्म हो गई है। यह व्यवस्था न केवल वितरण को तेज करती है, बल्कि ऑडिट और ट्रैकिंग को आसान बनाकर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाती है। ऑनलाइन आवेदन के लिए https://sspy-up.gov.in वेबसाइट उपलब्ध है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्रों में उप जिला अधिकारी आवेदन की पुष्टि करते हैं। आय सीमा शहरी क्षेत्रों में 56,460 रुपये और ग्रामीण में 46,080 रुपये है।
बुजुर्गों के लिए वरदान
2017 में योजना शुरू होने पर सिर्फ 37.47 लाख लाभार्थी थे, जो अब 67.50 लाख के लक्ष्य तक पहुंच गए हैं। यह वृद्धि सरकार की सक्रियता का नतीजा है, जिसमें विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर पात्रों की पहचान की गई। पिछले कुछ सालों का लेखा-जोखा देखें तो 2018-19 में 40,71,580 लाभार्थियों को ₹187913.10 लाख, 2019-20 में 47,99,480 को ₹269774.45 लाख, 2020-21 में 51,24,155 को ₹369449.13 लाख, 2021-22 में 51,92,779 को ₹427790.56 लाख, 2022-23 में 54,97,237 को ₹608374.50 लाख, 2023-24 में 55,68,590 को ₹646434.06 लाख और 2024-25 में 55,99,997 को पेंशन दी गई।
आत्मसम्मान और आर्थिक सुरक्षा
वृद्धावस्था पेंशन योजना योगी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों का आधार है, जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों को प्रतिमाह 1,000 रुपये देती है। यह योजना न सिर्फ उनकी वित्तीय परेशानियों को कम करती है, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी बढ़ावा देती है। सरकार का मकसद बुजुर्गों को जीवन के आखिरी पड़ाव में सम्मानजनक जीवन देना है, जो इस योजना के विस्तार से साफ झलकता है।
