लखनऊ में यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन बांके बिहारी मंदिर न्यास निर्माण अध्यादेश को मंजूरी मिली। स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए न्यास श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं और पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करेगा।
लखनऊ, 14 अगस्त 2025, शाम 6:47 बजे IST
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को बांके बिहारी मंदिर न्यास गठन अध्यादेश को मंजूरी दी गई। इस दौरान सदन में सुबह 11 बजे से ‘विकसित भारत, विकसित यूपी विजन डॉक्यूमेंट 2047’ पर 24 घंटे की चर्चा शुरू हुई, जिसमें सरकार ने विभागवार उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं प्रस्तुत कीं, जबकि विपक्ष ने सवाल-जवाब का दौर जारी रखा। साथ ही, बांके बिहारी कॉरिडोर अध्यादेश विधेयक भी पारित हुआ।
स्वामी हरिदास की परंपरा को संजोएगा न्यास
सरकार ने स्पष्ट किया कि न्यास का गठन स्वामी हरिदास की परंपराओं के अनुरूप किया गया है। मंदिर के रीति-रिवाज, त्योहार, समारोह और धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी हस्तक्षेप के जारी रहेंगे। न्यास दर्शन का समय निर्धारित करेगा, पुजारियों की नियुक्ति और उनके वेतन-भत्तों का प्रबंधन करेगा। इसके अलावा, भक्तों की सुरक्षा, मंदिर के प्रभावी प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी न्यास संभालेगा।
विश्वस्तरीय सुविधाओं का तोहफा श्रद्धालुओं को
न्यास गठन के बाद श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुख-सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसमें प्रसाद वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल आपूर्ति, विश्राम के लिए बेंच, कतार प्रबंधन कियोस्क, गौशालाएं, अन्नक्षेत्र, रसोईघर, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय शामिल हैं। यह कदम मंदिर में आने वाले भक्तों के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में है।
न्यास के अधिकार और संरचना
अध्यादेश के अनुसार, न्यास मंदिर के चढ़ावे, दान, नकद या वस्तु रूपी अर्पण, आभूषण, अनुदान, योगदान, हुंडी संग्रह और सभी चल-अचल संपत्तियों पर अधिकार रखेगा। इसमें मंदिर की मूर्तियां, परिसर, प्रसीमा क्षेत्र और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दी गई भेंटें शामिल हैं। मंदिर की संपत्तियों की खरीद-बिक्री के लिए 20 लाख रुपये तक का निर्णय न्यास स्वयं ले सकेगा, लेकिन इससे अधिक के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।
न्यास में 11 मनोनीत और 7 पदेन सदस्य होंगे। मनोनीत सदस्यों में वैष्णव परंपराओं से 3, सनातन धर्म की परंपराओं से 3, और किसी शाखा से 3 शिक्षाविद/समाजसेवी/उद्यमी शामिल होंगे। गोस्वामी परंपरा से स्वामी हरिदास के वंशजों में से राज-भोग और शयन-भोग सेवादारों के 2 प्रतिनिधि होंगे। सभी मनोनीत सदस्य सनातनी हिंदू होंगे और उनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। पदेन सदस्यों में मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ, मंदिर ट्रस्ट के सीईओ और राज्य सरकार का प्रतिनिधि शामिल होंगे। यदि कोई पदेन सदस्य गैर-हिंदू हो, तो कनिष्ठ अधिकारी को नामित किया जाएगा।
प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था
न्यास की बैठक हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से होगी, जिसमें 15 दिन पहले नोटिस जारी करना होगा। न्यास के सदस्य सद्भावना से किए गए कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एडीएम स्तर का अधिकारी होगा, जो मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करेगा। यह अध्यादेश धार्मिक परंपराओं की रक्षा के साथ-साथ आधुनिक प्रबंधन और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर अनुभव सुनिश्चित करेगा।
