नई दिल्ली, 24 जनवरी 2026 — केंद्र सरकार ने यूजीसी में प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 नियम लागू किया है। यूजीसी में गवर्नमेंट ने जो नियम लागू किया है वह ये है किसी भी यूनिविर्सटी या कॉलेज में अगर ओबीसी क्लास का बच्चा या एससी का बच्चा अगर आरोप भी लगा देता है तो सामान्य जाति के विद्यार्थी पर तो उसको तत्काल गिरफ्तार किया जाएगा। उसको जेल भेजा जाएगा। एक ही अस्त्र-शस्त्र सामान्य वर्गों के पास था वह प्राकृतिक रूप से वह थी शिक्षा। उससे दूर करने की यह कोशिश है। इस षडयंत्र की रचना सरकार ही कर रही है।
आप पढ़ क्यों रहे हैं, पढ़िये नहीं, आप यूनिवर्सिटी पहुंचेगे ही नहीं, तमाम लोग आर्थिक आभाव में नहीं पहुंच पाते हैं। लेकिन जो संपन्न हैं वे युनिवर्सिटी क्यों पहुंच रहे हैं इसी पर लगाम लगाने की सरकार की पूरी साजिश है। भाजपा सरकार इस गफलत में है कि यह नियम लाकर हम ओबीसी और एसटी का वोट बैंक बना लुंगा। इसके अलावा जो भी सवर्ण के पक्ष में नेता या मंत्री है उसको दरकिनार करने की भी बड़ी साजिश है। यह सरकार ने जातिगत भेदभाव का बीज बो दिया है। जिस पर अब हर जगह इस आग की चिनगारी पहुंचेगी।
क्या यूजीसी के नए रूल्स से रुकेगा हायर एजुकेशन में जातिगत भेदभाव?
उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक अहम कदम उठाया है। यूजीसी ने वर्ष 2026 के लिए नए विनियम जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को पूरी तरह रोकना है। ये नियम देश के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी छात्र, टीचर या कर्मचारी के साथ उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर अन्याय न हो।
नए नियम शिक्षा परिसरों में सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसर वाला वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। लेकिन यह जिसके लिए फायदेमंद है वो लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं। अगर देखा जाए तो यह नियम पूरी तरह एकतरफा है। यह सवर्णों के विद्यार्थियों के लिए गला दबाने का काम केंद्र सरकार ने किया है। इस नियम की चिनगारी कब तक शांत होगी यह समय बताएगा।
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जाति आधारित भेदभाव पर सख्त रोक और यूजीसी के नए नियमों की पृष्ठभूमि
जाति आधारित भेदभाव पर सख्त रोक लगाने के लिए यूजीसी ने इन नियमों को तैयार किया है। भेदभाव प्रत्यक्ष रूप से अपमान, उत्पीड़न या अलग व्यवहार के रूप में हो सकता है, वहीं अप्रत्यक्ष रूप से अवसरों से वंचित करना, अनदेखी करना या पक्षपात भी इसके अंतर्गत आएगा। यूजीसी ने साफ किया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में किसी भी स्तर पर ऐसे व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इन नियमों का पालन विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, डीम्ड विश्वविद्यालयों समेत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को करना अनिवार्य होगा। संस्थान प्रमुखों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वो इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े छात्र, शिक्षक और कर्मचारी सभी शामिल हैं।
यूजीसी के इन नए नियमों की पृष्ठभूमि में लंबे समय से चली आ रही शिकायतें हैं, जहां उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। University Grants Commission (India) ने इन मुद्दों को देखते हुए 2026 के लिए इन विनियमों को जारी किया है। लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इन नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा पर कम ध्यान दिया गया है, जिससे असंतुलन पैदा हो सकता है।
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समान अवसर केंद्र की अनिवार्यता और नियमों का प्रभाव
समान अवसर केंद्र की अनिवार्यता यूजीसी के नियमों का मुख्य हिस्सा है। नए नियमों के तहत प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में समान अवसर केंद्र (ईओसी) की स्थापना अनिवार्य की गई है। यह केंद्र वंचित और पिछड़े वर्गों के छात्रों व कर्मचारियों को शैक्षणिक, सामाजिक और वित्तीय मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इसके साथ ही भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करना और उनका समाधान करना भी ईओसी की प्रमुख जिम्मेदारी होगी। ईओसी को भेदभाव की शिकायत दर्ज करने के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली भी संचालित करनी होगी, ताकि पीड़ित व्यक्ति बिना डर अपनी बात रख सके। अगर कोई कॉलेज अपने स्तर पर समान अवसर केंद्र स्थापित करने में सक्षम नहीं है, तो उससे संबद्ध विश्वविद्यालय यह जिम्मेदारी निभाएगा। यूजीसी का मानना है कि इन प्रावधानों से शिक्षा संस्थानों में समानता, पारदर्शिता और विश्वास का माहौल मजबूत होगा।

नियमों का प्रभाव देखा जाए तो यह उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों में चिंता है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है। कई यूनिवर्सिटी में पहले से ही ऐसे नियमों का परीक्षण चल रहा है, और अब इसे पूरे देश में लागू करने से शिक्षा प्रणाली में बदलाव आएगा।
यूजीसी के कदम से सामान्य वर्ग में नाराजगी और राजनीतिक विवाद
यूजीसी के कदम से सामान्य वर्ग में नाराजगी फैल रही है। यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 लागू कर दिया है। इसे लेकर विवाद पैदा हो रहा है। जैसे जैसे लोगों को इसके बारे में मालूम हो रहा है, त्यों त्यों सवर्ण में नाराजगी दिखने लगी है। इन नियम में ओबीसी को एससी/एसटी के साथ जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है। जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों में विवाद पैदा हो गया है। वो इस गाइडलाइंस को एकतरफा बता रहे हैं, ये आशंका जता रहे हैं कि इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। जिससे सवर्ण छात्रों में असंतोष है। और जगह-जगह धरना प्रदर्शन जारी है।
राजनीतिक स्तर पर यह नियम भाजपा सरकार के लिए चुनौती बन सकता है, क्योंकि सामान्य वर्ग के वोटर्स में असंतोष बढ़ रहा है। कई संगठन इसकी आलोचना कर रहे हैं और सरकार से संशोधन की मांग कर रहे हैं।
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यूजीसी के नए नियमों की मुख्य विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| भेदभाव की परिभाषा | प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जाति आधारित अन्याय, अपमान या पक्षपात |
| ईओसी की स्थापना | हर संस्थान में समान अवसर केंद्र अनिवार्य, शिकायतों की जांच करेगा |
| ऑनलाइन शिकायत प्रणाली | पीड़ित बिना डर के शिकायत दर्ज कर सकेंगे |
| लागू होने का दायरा | सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज और डीम्ड यूनिवर्सिटी |
| दंड प्रावधान | भेदभाव करने पर गिरफ्तारी और जेल, लेकिन एकतरफा प्रावधान की आलोचना |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
यूजीसी के नए नियम क्या हैं?
यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए हैं, जैसे अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी के खिलाफ अन्याय।
नियमों से किसे फायदा होगा?
यह पिछड़े वर्गों को फायदा देगा, लेकिन सामान्य वर्ग में असंतोष है कि यह एकतरफा है।
ईओसी क्या है?
ईओसी समान अवसर केंद्र है, जो शिकायतों की जांच और मार्गदर्शन देगा।
क्या नियमों में सामान्य वर्ग की सुरक्षा है?
नियमों में सामान्य वर्ग के लिए कोई विशेष राहत नहीं, जिससे विवाद है।
यूजीसी नियम कब लागू होंगे?
2026 से पूरे देश में लागू, लेकिन विवाद के कारण संशोधन की मांग हो रही है।
क्या दुरुपयोग संभव है?
कई लोग कहते हैं कि इसका दुरुपयोग हो सकता है, इसलिए सख्त जांच की जरूरत है।
भाजपा सरकार की भूमिका क्या है?
भाजपा सरकार ने यह नियम लागू किया, लेकिन सामान्य वर्ग में इससे नाराजगी है।
यह नियम उच्च शिक्षा को समान बनाने की कोशिश है, लेकिन असंतुलन की आलोचना हो रही है। आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस बढ़ सकती है।

लेखक, महेंद्र प्रताप सिंह, political correspondence(दैनिक भास्कर )
