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Tuesday, 23 Jun 2026

प्रेस विज्ञप्तिरंग रसिया महोत्सव 2025: स्वर कोकिला शारदा सिन्हा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

सांस्कृतिक आयोजन में शारदा सिन्हा की विरासत का उत्सव
दिल्ली के प्रतिष्ठित कमानी ऑडिटोरियम में 25 अगस्त की शाम स्वर कोकिला ‘पद्मविभूषण’ शारदा सिन्हा जी को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मनमोहक सांस्कृतिक आयोजन “रंग रसिया महोत्सव 2025” का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन माँ सरस्वती नृत्य भारती कलापीठ की संचालिका और प्रख्यात लोक गायिका विजय लक्ष्मी उपाध्याय ने किया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक और सांस्कृतिक अनुभव से सराबोर कर दिया।

शारदा सिन्हा के योगदान को याद किया गया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष और मैथिली भोजपुरी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष श्री अजीत दुबे ने कहा, “शारदा सिन्हा जी ने भोजपुरी भाषा को अपनी मधुर आवाज से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मैथिली भाषी होते हुए भी भोजपुरी के प्रति उनका समर्पण उनके बड़प्पन का प्रतीक है। उन्होंने कहा था कि यदि भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता मिलती, तो उनकी खुशी और बढ़ जाती।”

मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ हुईं, जिनमें शारदा सिन्हा जी की पुत्री सुश्री वंदना भारद्वाज ने अपनी मधुर आवाज में उनकी रचनाओं को प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना गुरु शिखा खरे की कजरी प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। माँ सरस्वती नृत्य भारती कलापीठ के छात्रों ने लोक संगीत और महापर्व छठ की थीम पर शानदार प्रदर्शन किया। विजय लक्ष्मी उपाध्याय और उनकी पुत्री अंजलि शिवाय की लोकगीत प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

तीन पीढ़ियों का लोक सौंदर्य
कार्यक्रम का सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब विजय लक्ष्मी की माँ श्रीमती उमरावती देवी ने शारदा सिन्हा जी के एक पुराने गीत को गाया, जिसने तीन पीढ़ियों के लोक सौंदर्य को एक मंच पर जीवंत कर दिया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर ‘पद्मश्री’ कथक नृत्यांगना डॉ. नलिनी कमलिनी, प्रख्यात लोक गायिका विजया भारती, डॉ. संजीव सक्सेना, डॉ. वेद प्रकाश टंडन, जयवीर यादव, अरविन्द दुबे, संजय श्रीवत्स, निर्मल कुमार सिंह, जे.पी. द्विवेदी, दिलीप गिरी, किरण पांडे, देवकांत पाण्डेय, डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी, कुंदन सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
रंग रसिया महोत्सव 2025 ने शारदा सिन्हा जी की सांस्कृतिक विरासत को न केवल संरक्षित किया, बल्कि इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक अनुपम प्रयास किया। यह आयोजन भोजपुरी और मैथिली संस्कृति के प्रति उनके योगदान को एक बार फिर से जीवंत करने में सफल रहा।

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