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Wednesday, 04 Feb 2026

नई दिल्ली, 27 अगस्त 2025: भारत का रिटेल सेक्टर, जो अपनी विशालता और गतिशीलता के लिए जाना जाता है, पेय पदार्थों, विशेष रूप से कोल्ड ड्रिंक्स के इर्द-गिर्द घूमता है। ये उत्पाद न केवल उपभोक्ताओं की पसंद हैं, बल्कि किराना दुकानों की आर्थिक रीढ़ भी हैं। देश में लगभग 1.5 करोड़ किराना दुकानों के साथ-साथ आधुनिक दुकानें और तेजी से बढ़ता क्विक कॉमर्स सेक्टर इस बाजार को और मजबूत बना रहे हैं

क्विक कॉमर्स का उभार, पर किराना की मजबूती बरकरार

पिछले कुछ वर्षों में क्विक कॉमर्स ने महानगरों और टियर-1 शहरों में उपभोक्ता व्यवहार को नया रूप दिया है। रेडसीर की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में क्विक कॉमर्स बाजार में 77% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। युवा शहरी उपभोक्ता इस तेज और सुविधाजनक खरीदारी के तरीके को अपनाने में सबसे आगे हैं। हालांकि, यह वृद्धि मुख्य रूप से शीर्ष 10 शहरों तक सीमित है। दूसरी ओर, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किराना दुकानें आज भी रिटेल सेक्टर का आधार बनी हुई हैं। डेलॉइट इंडिया कंज्यूमर सर्वे 2024 के अनुसार, 59% लोग खाने-पीने का सामान अभी भी किराना या आधुनिक दुकानों से खरीदना पसंद करते हैं।

किराना दुकानें न केवल सुविधा प्रदान करती हैं, बल्कि उधार देने की सुविधा, सामान की होम डिलीवरी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के जरिए सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को मजबूत करती हैं। ये दुकानें भारतीय परिवारों के लिए रिटेल अनुभव का केंद्र बनी हुई हैं, जो परंपरा और समावेशी विकास दोनों को बढ़ावा देती हैं।

कोल्ड ड्रिंक्स: किराना दुकानों का ‘एंकर गुड’

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मयंक गौतम के अनुसार, कोल्ड ड्रिंक्स किराना दुकानों में सबसे ज्यादा बिकने वाला उत्पाद हैं। ये पेय पदार्थ, विशेष रूप से सॉफ्ट ड्रिंक्स, बार-बार खरीदे जाने के कारण “एंकर गुड्स” कहलाते हैं। ग्राहक अक्सर एक ठंडा पेय खरीदने के लिए दुकान पर आते हैं और साथ में स्नैक्स, राशन या अन्य सामान भी खरीद लेते हैं। किफायती कीमत और मजबूत सप्लाई चेन के कारण ये पेय छोटे दुकानदारों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण जरिया बन गए हैं।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) और हंसा रिसर्च के एक अध्ययन के मुताबिक, पेय पदार्थ खुदरा दुकानों के कुल मूल्य में 11% और बिक्री की मात्रा में 30% का योगदान देते हैं। अन्य FMCG श्रेणियों में 8–17% मार्जिन की तुलना में पेय कंपनियां रिटेलरों को 19–24% का मार्जिन देती हैं। यह उच्च मार्जिन छोटे दुकानदारों को न केवल व्यवसाय चलाने, बल्कि आय बढ़ाने में भी मदद करता है।

जीएसटी सुधार की मांग

पेय पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच, उद्योग विशेषज्ञ 18% की एकमुश्त जीएसटी दर लागू करने की मांग कर रहे हैं। इससे कोल्ड ड्रिंक्स की कीमतें कम होंगी, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा और दुकानदारों को तेज बिक्री के जरिए अधिक मुनाफा मिलेगा। यह कदम न केवल छोटे रिटेलरों को सशक्त बनाएगा, बल्कि रिटेल सेक्टर में समावेशी विकास को भी बढ़ावा देगा।

निष्कर्ष

भारत का रिटेल सेक्टर, खासकर किराना दुकानें, पेय पदार्थों के दम पर फल-फूल रहा है। ये दुकानें न केवल आर्थिक विकास का इंजन हैं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और रोजगार सृजन का भी आधार हैं। क्विक कॉमर्स और आधुनिक रिटेल के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, किराना दुकानों की प्रासंगिकता बरकरार है। नीतिगत सुधार, जैसे एकसमान जीएसटी दर, इस सेक्टर को और मजबूती दे सकते हैं, जिससे लाखों छोटे दुकानदारों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
पत्रकार मयंक गौतम

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