नई दिल्ली, 27 फरवरी 2026। होली के रंगों के साथ जब घरों में मिठाइयों की महक फैलती है, तो एक नाम सबसे पहले जेहन में आता है — हल्दीराम। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह नाम सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि संघर्ष, विश्वास और परंपरा की 90 साल पुरानी विरासत है जो आज भी हर त्योहार में नई ऊर्जा के साथ जीवित हो उठती है।
बीकानेर की गलियों से शुरू हुआ सफर
1930 के दशक में राजस्थान के बीकानेर की संकरी गलियों में गंगाबिशन अग्रवाल, जिन्हें लोग प्यार से “हल्दीराम” कहते थे, ने अपने हाथों से भुजिया बनानी शुरू की। न बड़ी पूंजी थी, न बड़ा प्रतिष्ठान — बस स्वाद पर विश्वास और गुणवत्ता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता थी।
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उन्होंने मसालों का ऐसा संतुलन तैयार किया कि भुजिया केवल एक नमकीन नहीं रही, बल्कि पहचान बन गई। हल्दीराम का मानना था कि ग्राहक सिर्फ उत्पाद नहीं खरीदता, वह भरोसा खरीदता है। यही भरोसा धीरे-धीरे लोगों की जुबान से होते हुए घर-घर तक पहुंचा।
विस्तार के साथ आईं चुनौतियां
समय के साथ परिवार और व्यापार दोनों बढ़े। पारिवारिक मतभेद, अलग-अलग शहरों में अलग इकाइयां और प्रतिस्पर्धा के दबाव के बावजूद, एक बात हर जगह समान रही — गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं। दिल्ली, नागपुर और कोलकाता में व्यापार का विस्तार हुआ, लेकिन ब्रांड का मूल सिद्धांत स्पष्ट रहा: स्वाद और विश्वास सबसे ऊपर।
जैसे-जैसे भारत बदला, वैसे-वैसे हल्दीराम भी बदलता गया। आधुनिक उत्पादन इकाइयां स्थापित हुईं, पैकेजिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर अपनाया गया, स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों को सख्ती से लागू किया गया। निर्यात के माध्यम से भारतीय स्वाद विदेशों तक पहुंचाया गया।
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होली ने बनाया सांस्कृतिक और व्यावसायिक मिलन
त्योहारों ने इस ब्रांड को लोगों के जीवन से और गहराई से जोड़ा। हल्दीराम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों का उत्सव है। इस अवसर पर घरों में मिठास का विशेष महत्व होता है। हमने इस भावना को समझा और होली को एक सांस्कृतिक अवसर के साथ-साथ व्यावसायिक अवसर में भी बदल दिया।”
होली स्पेशल प्रोडक्ट्स में जबरदस्त मांग
मौसम में हल्दीराम द्वारा तैयार किए गए विशेष गुजिया, मावा मिठाइयां, आकर्षक गिफ्ट पैक और कॉर्पोरेट हैम्पर्स की बिक्री में कई गुना वृद्धि देखी जाती है। रंगीन पैकेजिंग और पारंपरिक स्वाद का मेल लोगों को अपनी ओर खींचता है।
दिल्ली के सी.पी. स्टोर के प्रबंधक राजेश वर्मा बताते हैं, “होली सीजन में हमारी बिक्री 300 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। लोग सिर्फ मिठाई नहीं खरीदते — वे अपने संबंधों में मिठास जोड़ते हैं। हमारे ₹500 से लेकर ₹5,000 तक के गिफ्ट पैक सबसे ज्यादा बिकते हैं।”
कॉर्पोरेट गिफ्टिंग का बड़ा बाजार
कंपनियां भी होली पर अपने कर्मचारियों और क्लाइंट्स को हल्दीराम के प्रीमियम हैम्पर्स भेंट करती हैं। इस साल कॉर्पोरेट सेगमेंट में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हल्दीराम ने इस बार 50 से अधिक नए होली स्पेशल पैकेज लॉन्च किए हैं।
डिजिटल युग में परंपरा का संगम
नई पीढ़ी ने डिजिटल माध्यमों को अपनाकर ब्रांड को और व्यापक बनाया। ऑनलाइन ऑर्डर, होम डिलीवरी और सोशल मीडिया के माध्यम से ग्राहकों से सीधा संवाद स्थापित किया गया। हल्दीराम की वेबसाइट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर होली स्पेशल सेक्शन में भारी ट्रैफिक देखा जा रहा है।
हल्दीराम के डिजिटल मार्केटिंग हेड अनुराग सिंह कहते हैं, “हमारे ऑनलाइन ऑर्डर्स में पिछले साल की तुलना में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इस आधुनिकता के बीच भी मूल भावना वही है — स्वाद की शुद्धता और ग्राहकों का विश्वास।”
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हजारों करोड़ का कारोबार, जड़ें वही
आज हल्दीराम हजारों करोड़ रुपये के कारोबार का नाम है, लेकिन इसकी जड़ें अब भी बीकानेर की उस छोटी दुकान में हैं, जहां से यह सफर शुरू हुआ था। ब्रांड के प्रवक्ता के अनुसार, “यह कहानी बताती है कि सफलता अचानक नहीं मिलती। वह निरंतर गुणवत्ता, ग्राहक विश्वास और समय के साथ स्वयं को ढालने की क्षमता से प्राप्त होती है।”
भारतीय त्योहारों के साथ गहरा जुड़ाव
होली, दिवाली, राखी और अन्य त्योहारों पर हल्दीराम का योगदान भारतीय परिवारों के उत्सव का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। व्यापार विश्लेषकों के अनुसार, त्योहारी सीजन में हल्दीराम की कुल वार्षिक बिक्री का 40 प्रतिशत हिस्सा आता है।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान
होली सीजन में हल्दीराम अतिरिक्त 5,000 से अधिक अस्थायी कर्मचारियों को रोजगार देता है। स्थानीय किराना दुकानदारों, वितरकों और डिलीवरी पार्टनर्स को भी इस मौसम में अच्छा लाभ मिलता है।
नागपुर के एक वितरक महेश जैन बताते हैं, “होली के 15 दिन पहले से ही हमारी आपूर्ति दोगुनी हो जाती है। यह साल का सबसे व्यस्त और सबसे लाभदायक समय होता है।”
गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
भारी मांग के बावजूद, हल्दीराम गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं करता। कंपनी की सभी उत्पादन इकाइयों में FSSAI के सख्त मानकों का पालन किया जाता है। ताजगी सुनिश्चित करने के लिए दैनिक उत्पादन और समय पर वितरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
परंपरा और आधुनिकता का संतुलन
हल्दीराम की सफलता की कहानी यह सिखाती है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। 90 साल पुरानी रेसिपी आज भी वैसी ही है, लेकिन इसे ग्राहकों तक पहुंचाने के तरीके बदल गए हैं।
जब होली के रंग आसमान में उड़ते हैं, जब परिवार एक साथ बैठकर हंसते-बोलते हैं, जब मिठाइयों की थाली सजती है — तब केवल स्वाद नहीं परोसा जाता, बल्कि एक विरासत परोसी जाती है।
हल्दीराम के होली स्पेशल प्रोडक्ट्स:
- गुजिया पैक: ₹250 से ₹1,500
- मावा मिठाई कॉम्बो: ₹500 से ₹2,000
- प्रीमियम गिफ्ट हैम्पर्स: ₹1,000 से ₹5,000
- कॉर्पोरेट बल्क ऑर्डर्स: कस्टमाइज्ड पैकेजेस
- ऑनलाइन स्पेशल डील्स: 10-15% छूट
हल्दीराम केवल एक नाम नहीं। यह परंपरा, विश्वास और सफलता की वह कहानी है, जो हर त्योहार में फिर से जीवित हो उठती है। इस होली भी जब आप हल्दीराम की मिठाइयों का स्वाद लेंगे, तो आप सिर्फ मिठास नहीं, बल्कि 90 साल की विरासत का हिस्सा बनेंगे।
बॉक्स स्टोरी: होली 2026 में हल्दीराम के आंकड़े
- अनुमानित बिक्री: ₹800 करोड़ (होली सीजन)
- गुजिया उत्पादन: 50 लाख किलोग्राम
- नए लॉन्च: 50+ होली स्पेशल पैकेज
- कॉर्पोरेट ऑर्डर्स: 35% वृद्धि
- ऑनलाइन बिक्री: 60% वृद्धि
- अतिरिक्त रोजगार: 5,000+ कर्मचारी
- वितरण नेटवर्क: 3,000+ शहर/कस्बे
