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Sunday, 26 Apr 2026

दीपावली तिथि विवाद: यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट की मांग – ‘एक देश, एक पर्व, एक तिथि’, संस्कृति मंत्री को पत्र!

भिन्न पंचांगों से भ्रम, RSS-शंकराचार्यों की समिति से एकीकृत कैलेंडर – क्या केंद्र जल्द फैसला लेगा?

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2025: दीपावली का उत्साह चरम पर है, लेकिन तिथि को लेकर पूरे देश में भ्रम की स्थिति। कहीं 20 अक्टूबर को मनाने की तैयारी, तो कहीं 21 को। इसी बीच यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई – सभी हिंदू त्योहारों को एक ही दिन मनाने का फैसला लो! संगठन ने संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा। क्या ये मांग हिंदू समाज की एकता मजबूत करेगी, या पंचांग विवाद को नया मोड़ देगी? आइए, इस सांस्कृतिक बहस की परतें खोलें, जहां परंपरा, भ्रम और एकता का संघर्ष सुलग रहा।

‘एक देश, एक पर्व’: भिन्न तिथियों से भ्रम, राष्ट्रीय एकता पर असर

यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने कहा, “विक्रम संवत, शक संवत, अमांत और पूर्णिमांत पंचांगों के कारण रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, रामनवमी, नवरात्रि, होली, दीपावली, करवा चौथ जैसे पर्वों की तिथियां अलग-अलग। इससे जनता में भ्रम, सांस्कृतिक समरसता पर चोट।” गोयल ने अपील की – “संस्कृति मंत्रालय शंकराचार्यों, मठाधीशों, ज्योतिषियों और धर्माचार्यों की उच्चस्तरीय समिति गठित करे, जो ‘एकीकृत हिंदू पंचांग’ बनाए।” ये कदम न सिर्फ भ्रम दूर करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को वैज्ञानिक कैलेंडर देगा।

दीपावली विवाद का तड़का: 20 या 21 अक्टूबर – केंद्र से त्वरित फैसला की मांग

पत्र में खास जिक्र दीपावली का – कहीं 20 को, कहीं 21 को मनाने की घोषणा। गोयल बोले, “ये भ्रम हिंदू समाज को बांट रहा। केंद्र तुरंत एक तिथि तय करे, ताकि भारत और विदेशों में बसे हिंदू एक साथ रोशनी का त्योहार मनाएं।” संगठन ने PM और गृह मंत्री को कॉपी भेजी – “राष्ट्रीय सांस्कृतिक सुधार का समय।” X पर #EkDiwaliEkTithi ट्रेंड, जहां लोग बोले – “एकता ही ताकत।”

यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट का संकल्प: सांस्कृतिक एकता, भ्रम का अंत

गोयल ने कहा, “हिंदू समाज की एकजुटता सशक्त होगी।” संगठन का मिशन – परंपराओं को एक सूत्र में बांधना। विशेषज्ञों का कहना – पंचांग विवाद सदियों पुराना, लेकिन डिजिटल युग में एकीकरण जरूरी। एक ज्योतिषी बोले, “समिति से सर्वमान्य कैलेंडर बनेगा।” क्या केंद्र इस मांग पर अमल करेगा? उत्साह तो है, लेकिन फैसला बाकी।

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