समुद्र के बीच खतरा
कांडला बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा एक कार्गो शिप — और अचानक एक अनजान प्रोजेक्टाइल का हमला। मिडिल ईस्ट के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर हिंसा की आग भड़क उठी है। इस बार निशाने पर था वह जहाज जो भारत की ओर आ रहा था।
यह कोई पहली घटना नहीं है। लेकिन इस बार का हमला इसलिए अलग है क्योंकि जहाज सीधे गुजरात के कांडला बंदरगाह को bound था — यानी भारत से सीधा कनेक्शन।
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क्या हुआ उस रात
हमले की पुष्टि रॉयल थाई नेवी और United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) दोनों ने की है। दोनों ने कहा कि जहाज पर एक अनजान प्रोजेक्टाइल से attack किया गया। हथियार की आधिकारिक पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
किसने किया? कोई नहीं जानता। अब तक किसी भी देश या आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यही सबसे बड़ा सवाल है।
ओमानी नेवी ने घटना की सूचना मिलते ही तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। समुद्र में फंसे क्रू मेंबर्स की मदद के लिए जहाज रवाना किए गए।
भारत ने क्या कहा
नई दिल्ली चुप नहीं रही। विदेश मंत्रालय ने सख्त बयान जारी किया।
“वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया जाना बेहद चिंताजनक है।”
मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया कि इस तरह के हमलों में पहले भी भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। और अब यह सिलसिला रुकने की बजाय और तेज होता दिख रहा है।
भारत का संदेश एकदम साफ था — commercial shipping को निशाना मत बनाओ। निर्दोष crew members की जिंदगी दांव पर मत लगाओ। और समुद्री व्यापार के रास्ते खुले रहने चाहिए।
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होर्मुज — दुनिया की सबसे नाजुक नस
होर्मुज स्ट्रेट को समझना जरूरी है।
यह महज एक समुद्री रास्ता नहीं है — यह दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की रीढ़ है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और भारी मात्रा में LNG इसी रास्ते से होकर गुजरती है। Oman, Iran, UAE, Kuwait, Iraq, Saudi Arabia — इन सभी देशों का तेल निर्यात इसी स्ट्रेट से होता है।
भारत के लिए तो यह रास्ता और भी अहम है। हमारी energy import का बड़ा हिस्सा इसी route से आता है। अगर होर्मुज में tension बढ़ती है, तो सीधा असर भारत की economy पर पड़ता है — petrol-diesel की कीमतों से लेकर manufacturing तक।
इसीलिए जब इस इलाके में कोई जहाज attack होता है, तो यह सिर्फ एक shipping incident नहीं रहता। यह global trade security का मसला बन जाता है।
बढ़ता खतरा, उलझते सवाल
पिछले कुछ महीनों में Red Sea और Gulf of Aden में Houthi rebels के हमलों के बाद international shipping companies ने अपने routes बदलने शुरू कर दिए थे। कई जहाज अब Cape of Good Hope के लंबे रास्ते से जा रहे हैं — जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
होर्मुज में यह ताजा हमला उस डर को और गहरा करता है।
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शिपिंग industry के जानकारों का कहना है कि जब तक कोई ठोस जवाबदेही तय नहीं होती, ये हमले बंद नहीं होंगे। और जब तक हमले बंद नहीं होते, insurance rates बढ़ते रहेंगे, shipping costs ऊपर जाते रहेंगे, और आखिरकार इसकी मार आम आदमी की जेब पर पड़ेगी।
कांडला जाने वाले उस जहाज का क्या हुआ — क्रू सुरक्षित है या नहीं — इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे हमलों को रोकने के लिए international community कब तक सिर्फ बयान जारी करती रहेगी।
