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Thursday, 06 Aug 2026

पूर्वांचल की ताकत पर भरोसा: अनिल कुमार शुक्ला ने दिल्ली विधानसभा और MCD चुनाव की तैयारी शुरू की

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से दिल्ली आए एडवोकेट अनिल कुमार शुक्ला अब दिल्ली विधानसभा और MCD चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। घोंडा विधानसभा में NCP (अजीत पवार गुट) के अध्यक्ष के रूप में काम करते हुए वो पूर्वांचली वोटरों की ताकत पर भरोसा जता रहे हैं। कड़कड़डुमा कोर्ट में वकालत करने वाले शुक्ला का मानना है कि दिल्ली में 50 लाख से ज्यादा पूर्वांचली रहते हैं और यही समुदाय दिल्ली की सत्ता का रुख तय करता है। दिल्ली की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को सुधारना उनकी प्राथमिकता है।

दिल्ली की राजनीति में एक बात पक्की है — जो पूर्वांचल को साधे, वो दिल्ली जीते।

यही सोच लेकर एडवोकेट अनिल कुमार शुक्ला ने राजनीति में कदम रखा है। वकालत और जनसेवा के बीच एक ऐसा नाम जो घोंडा विधानसभा की गलियों से निकलकर दिल्ली की बड़ी सियासी तस्वीर में अपनी जगह बनाने की कोशिश में है।

सुल्तानपुर से दिल्ली तक का सफर

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक छोटे से गाँव द्वारकागंज में जन्मे अनिल कुमार शुक्ला बचपन से ही दिल्ली आ गए थे। पढ़ाई-लिखाई यहीं हुई। कड़कड़डुमा कोर्ट में वकालत की शुरुआत की और धीरे-धीरे समाज के उन लोगों से जुड़ते गए जो दिल्ली में रहते हुए भी हाशिये पर थे।

पूर्वांचल की मिट्टी से जुड़ाव उनके खून में है — और यही जुड़ाव उनकी राजनीतिक पहचान बन गई है।

अजीत पवार की राह पर चलकर आए राजनीति में

अनिल कुमार शुक्ला फिलहाल घोंडा विधानसभा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) — अजीत पवार गुट के अध्यक्ष हैं। अजीत पवार को वो अपना राजनीतिक गुरू मानते रहे हैं। हालांकि परिस्थितियाँ बदलीं, रास्ते कुछ अलग हुए — लेकिन अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के दिखाए रास्ते पर चलते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा।

“एक नेता का काम सिर्फ चुनाव जीतना नहीं होता, मुश्किल वक्त में शांत रहना और अपनी टीम के साथ खड़े रहना होता है” — शुक्ला का यही मानना है।

साहस, दूरदर्शिता, ईमानदारी और जनता से सीधा संवाद — ये वो गुण हैं जो वो खुद में देखते हैं और जिन पर भरोसा करके आगे बढ़ रहे हैं।

दिल्ली की सेहत और स्कूलों पर उनकी चिंता

शुक्ला छुपाते नहीं। सीधे कहते हैं कि दिल्ली की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की हालत खराब है। आम आदमी को सरकारी अस्पताल में इलाज मिलना मुश्किल है, और सरकारी स्कूलों का स्तर जो दिखाया जाता है — जमीन पर उसकी कहानी अलग है।

यही वो मुद्दे हैं जिन पर वो चुनाव लड़ना चाहते हैं। Fancy वादे नहीं — असल समस्याएं, असल समाधान।

पूर्वांचल का वोट — दिल्ली की राजनीति की धुरी

यह सबसे दिलचस्प पहलू है।

दिल्ली में पूर्वांचलियों की आबादी 50 लाख से ऊपर बताई जाती है। सटीक आंकड़ा किसी के पास नहीं — न सरकार के पास, न किसी पार्टी के पास। लेकिन एक बात सबको पता है कि ये वोट bank नहीं, ये एक decisión force है।

पिछले दो विधानसभा चुनावों में पूर्वांचलियों ने AAP का साथ दिया — और AAP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बाकी पार्टियों का सूपड़ा साफ हो गया। लेकिन 2025 में तस्वीर पलट गई। पूर्वांचली वोटरों का झुकाव BJP की तरफ गया — और नतीजा सबके सामने है।

अनिल कुमार शुक्ला इसी ताकत को अपनी राजनीतिक नींव बना रहे हैं।

“हम पूर्वांचल के हैं, हमें पूर्वांचल के लोगों का पूरा सहयोग मिलेगा” — यह सिर्फ एक दावा नहीं, उनका आत्मविश्वास है।

वकील से नेता बनने की राह — आसान नहीं, पर इरादा पक्का

कड़कड़डुमा की अदालत से घोंडा की गलियों तक — यह transition रातोंरात नहीं आई। वकालत में लोगों की लड़ाई लड़ते-लड़ते उन्हें एहसास हुआ कि असली लड़ाई तो नीतियों में है, कानून की किताबों में नहीं।

बचपन से ही सच का साथ देना और लोगों की सेवा करना — ये उनकी आदत में था। राजनीति उन्हें एक बड़ा platform लगी जहाँ ये काम बड़े पैमाने पर हो सके।

दिल्ली विधानसभा और MCD — दोनों मोर्चों पर तैयारी जारी है। पूर्वांचली समुदाय के बीच उनकी पहुँच और उनकी कानूनी पृष्ठभूमि उन्हें एक अलग तरह का उम्मीदवार बनाती है।

अब देखना यह है कि दिल्ली की सियासत में यह नया चेहरा कितनी गहरी छाप छोड़ता है।