नई दिल्ली, 7 फरवरी 2026: भारतीय संसद में पिछले एक हफ्ते से जो राजनीतिक तूफान चल रहा है, उसकी वजह है पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद (MM) नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस किताब के हवाले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
लेकिन सवाल यह है कि PM मोदी लोकसभा में आने से क्यों बच रहे हैं? क्या सच में उन्हें कोई सुरक्षा खतरा था या फिर BJP ने राहुल गांधी के इस बयान के बाद अपनी रणनीति बदल दी कि वे किताब PM को सौंपेंगे? और सबसे बड़ा सवाल – राहुल गांधी के हाथ यह अप्रकाशित किताब कैसे पहुंची जिसे सरकार की मंजूरी ही नहीं मिली है?
आइए पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।
Read Also: राजस्थान सरकार भर्ती 2026: विधानसभा में 10,644 LDC और स्टेनोग्राफर पदों पर निकली बंपर भर्ती, ऐसे करें आवेदन
विवाद की शुरुआत: 2 फरवरी को संसद में क्या हुआ?
राष्ट्रपति अभिभाषण पर बहस के दौरान राहुल का बड़ा दांव
2 फरवरी 2026 को लोकसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस चल रही थी। इस दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में The Caravan पत्रिका का हवाला देते हुए जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के अंशों को उद्धृत करना शुरू किया।
राहुल गांधी ने क्या कहा:
- BJP हमेशा कांग्रेस पर देशभक्ति पर सवाल उठाती है
- लेकिन 2020 में लद्दाख में चीन के आक्रमण के वक्त क्या हुआ था?
- जनरल नरवणे की किताब में PM मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बारे में खुलासे हैं
- जब चीनी टैंक भारतीय सीमा में घुस रहे थे, तब सेना प्रमुख को राजनीतिक नेतृत्व से क्या जवाब मिला
Also Read: Aaj Ki Taja Khabar: देश और दुनिया की बड़ी खबरें
सरकार का तत्काल विरोध
राहुल गांधी के बोलते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा:
- “यह किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है”
- “अप्रकाशित किताब का संसद में हवाला नहीं दिया जा सकता”
- “राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं”
गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई:
- “जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई तो इसे कोट कैसे कर सकते हैं?”
- “यह संसदीय नियमों का उल्लंघन है”
स्पीकर ओम बिड़ला ने हस्तक्षेप किया:
- “संसद के नियम 349 के अनुसार अप्रमाणित सामग्री का हवाला नहीं दिया जा सकता”
- सदन को दोपहर 2:09 बजे 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया
Also Read : ट्रंप-मोदी डील: अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% किया, रूसी तेल छोड़ने पर सहमति
तीन बार स्थगन, फिर भी विवाद थमा नहीं
| समय | क्या हुआ |
|---|---|
| दोपहर 2:09 | पहली बार सदन स्थगित |
| दोपहर 3:00 | दोबारा शुरू हुआ, फिर हंगामा |
| शाम 4:00 | तीसरी बार सदन शुरू, फिर अराजकता |
| अंत में | अगले दिन सुबह 11 बजे तक स्थगित |
नरवणे की किताब में क्या लिखा है: गंभीर खुलासे
‘Four Stars of Destiny’ – जो सरकार नहीं चाहती कि प्रकाशित हो
जनरल MM नरवणे ने अपनी आत्मकथा में 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष की अंदरूनी कहानी बताई है। The Caravan पत्रिका ने इस किताब के कुछ अंश प्रकाशित किए थे।
किताब के मुख्य खुलासे:
1. गलवान घाटी संघर्ष (15 जून 2020):
- 20 भारतीय सैनिकों की शहादत
- चीन से हाथापाई में जवानों की मौत
- सरकार की प्रतिक्रिया धीमी रही
2. अगस्त 2020 का महत्वपूर्ण रात (30-31 अगस्त): यह वो रात थी जब चीनी सेना ने रेचिन ला पर कब्जा करने की कोशिश की।
जनरल नरवणे ने क्या लिखा:
- “चीनी टैंक भारतीय सीमा की तरफ बढ़ रहे थे”
- “मैंने स्पष्ट राजनीतिक आदेश मांगे”
- “रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने PM से बात की”
- “उसके बाद मुझे कहा गया – ‘जो उचित समझो, वह करो’ (Do whatever you feel appropriate)”
सबसे चौंकाने वाला अंश:
“उस वक्त मुझे लगा कि राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को अकेला छोड़ दिया। सबसे गंभीर सुरक्षा संकट में निर्णय लेने की जिम्मेदारी से मोदी जी ने हाथ खींच लिए।”
Also Read: Trending Articles , Crime Related News, Stock Market News
भारतीय सेना ने कैसे संभाला मोर्चा?
किताब के अनुसार:
- जनरल नरवणे ने खुद फैसला लिया
- भारतीय सेना ने रातों-रात ऊंचाई वाले पोस्ट पर कब्जा किया
- चीन को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा
- यह भारत की सामरिक जीत थी
लेकिन सवाल यह है – क्या यह सही था कि राजनीतिक नेतृत्व ने फैसला सेना पर छोड़ दिया?
राहुल गांधी के आरोप: ’56 इंच का सीना कहां गया?’
संसद के बाहर राहुल का प्रेस कॉन्फ्रेंस
2 फरवरी को सदन से बाहर आकर राहुल गांधी ने मीडिया से बात की:
मुख्य बातें:
- “नरवणे जी ने अपनी किताब में PM मोदी और राजनाथ सिंह के बारे में साफ-साफ लिखा है”
- “यह जानकारी एक लेख में छपी है, मैं उसी लेख को कोट कर रहा हूं”
- “वे डर गए हैं क्योंकि अगर यह बाहर आया तो नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह की हकीकत सामने आ जाएगी”
- “56 इंच का सीना कहां गया जब चीन हमारे सामने था और आगे बढ़ रहा था?”
4 फरवरी: राहुल गांधी किताब लेकर पहुंचे संसद
4 फरवरी 2026 को राहुल गांधी ने धमाकेदार एंट्री की:
- हाथ में ‘Four Stars of Destiny’ की एक कॉपी
- मीडिया को किताब दिखाई
- कहा – “आज अगर PM मोदी संसद आए तो मैं उन्हें यह किताब सौंपूंगा”
Also Read: Education and latest Jobs , Govt Exams, Secure_health
राहुल का बयान:
“स्पीकर कह रहे हैं कि यह किताब exist नहीं करती। राजनाथ जी ने कहा कि यह किताब exist नहीं करती। यह नरवणे जी की किताब है जिसमें उन्होंने लद्दाख का पूरा विवरण लिखा है।”
सरकार का जवाब: किताब अप्रकाशित है, नियम 349 का उल्लंघन
संसद के नियम 349 क्या कहता है?
भारतीय संसद के Rule 349 के अनुसार:
प्रावधान:
- सदस्य अखबार की कतरनें, किताबें, पत्र या अन्य दस्तावेज़ तभी पढ़ सकते हैं जब वे:
- प्रामाणिक (Authentic) हों
- प्रकाशित (Published) हों
- चर्चा के विषय से सीधे संबंधित हों
सरकार का तर्क:
- नरवणे की किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई
- सरकार की सुरक्षा मंजूरी नहीं मिली
- The Caravan का लेख अप्रमाणित स्रोत पर आधारित है
- इसलिए संसद में इसका हवाला देना गलत है
विपक्ष का पलटवार
प्रियंका गांधी ने कहा:
- “यह किताब Amazon पर उपलब्ध थी”
- “यह प्रकाशित किताब है”
- “सरकार विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दे रही”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा:
- “जब हमें नरवणे की किताब मिल गई, तो सत्ता में बैठे लोगों के पास कैसे नहीं होगी?”
- “PM मोदी को जवाब देने की हिम्मत नहीं है”
रहस्य: राहुल गांधी को किताब कैसे मिली?
किताब का पूरा टाइमलाइन
| तिथि | घटना |
|---|---|
| अप्रैल 2024 | किताब प्रकाशन के लिए तैयार |
| मई-जून 2024 | प्रकाशक Penguin ने रिलीज रोकी |
| जुलाई 2024-जनवरी 2025 | सरकार की मंजूरी का इंतज़ार |
| जनवरी 2026 | The Caravan में अंश छपे |
| 2 फरवरी 2026 | राहुल ने संसद में उठाया |
| 4 फरवरी 2026 | राहुल ने किताब दिखाई |
किताब कहां से आई – तीन थ्योरी
थ्योरी 1: विदेश से प्रकाशित
- राहुल ने कहा – “किताब विदेश में उपलब्ध है”
- “भारत में सरकार प्रकाशन रोक रही है”
- शायद UK या US में प्रकाशित हुई
Theory 2: सेना के सूत्रों से लीक
- जनरल नरवणे के करीबी लोगों ने दी हो
- कुछ सेना के रिटायर्ड अफसरों ने शेयर की हो
थ्योरी 3: Amazon पर थोड़े समय के लिए उपलब्ध
- 4 फरवरी तक Amazon, Flipkart पर लिंक थे
- लेकिन खरीदने का विकल्प नहीं था
- कुछ छोटे प्लेटफॉर्म पर available थी
- बाद में सब लिंक हटा दिए गए
4 फरवरी: PM मोदी संसद में नहीं आए, क्यों?
दोपहर 5 बजे PM का भाषण था, लेकिन…
4 फरवरी 2026 को शाम 5 बजे PM मोदी को राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था लोकसभा में। लेकिन वे नहीं आए और सदन 5 फरवरी तक के लिए स्थगित हो गया।
सरकार का स्पष्टीकरण: सुरक्षा खतरा
गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा:
- “PM मोदी को सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी थी”
- “उन्हें लोकसभा में जाने से रोका गया”
- “यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है”
स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा:
- “मुझे इंटेलिजेंस इनपुट मिला था”
- “इसीलिए मैंने PM को राज्यसभा में जवाब देने की सलाह दी”
विपक्ष का आरोप: डर गए PM मोदी
राहुल गांधी ने X (Twitter) पर पोस्ट किया:
“जैसा मैंने कहा था, PM मोदी संसद में नहीं आएंगे क्योंकि वे डर गए हैं और सच का सामना नहीं करना चाहते।”
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा:
- “अगर PM की इंटेलिजेंस इतनी अच्छी है तो पुलवामा के दौरान कहां थी?”
- “देश भर में लिंचिंग हो रही है, वहां intelligence कहां जाती है?”
असली कारण क्या था?
विश्लेषकों के अनुसार:
कारण 1: राहुल की चुनौती
- राहुल ने कहा था – “PM आएंगे तो मैं किताब सौंपूंगा”
- यह सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी हो सकती थी
- इसलिए BJP ने रणनीति बदली
Reason 2: सुरक्षा का बहाना
- असली वजह राजनीतिक थी
- सुरक्षा का हवाला बहाना है
- नहीं तो पहले कभी ऐसा नहीं हुआ
कारण 3: विवाद से बचना
- किताब का मुद्दा बहुत गंभीर हो गया था
- लोकसभा में सीधा सामना BJP के लिए मुश्किल था
- बेहतर था राज्यसभा में जवाब देना
5-6 फरवरी: PM का राज्यसभा में जवाब
राज्यसभा में 97 मिनट का भाषण
6 फरवरी को राज्यसभा में PM मोदी ने धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया:
PM के मुख्य बिंदु:
- “विपक्ष 100 साल, 75 साल, 50 साल की बात करता रहता है”
- “लेकिन असली मुद्दों पर बात नहीं करता”
- “कांग्रेस देश को बांट रही है”
किताब के मुद्दे पर PM चुप
- पूरे 97 मिनट में नरवणे की किताब का जिक्र नहीं
- लद्दाख संघर्ष पर कोई सफाई नहीं
- सिर्फ कांग्रेस पर पलटवार
सांसदों का निलंबन: 8 विपक्षी सांसदों को बाहर
3 फरवरी को 8 सांसदों को निलंबित किया गया:
निलंबित सांसद:
- हिबी ईडन (कांग्रेस)
- अमरिंदर सिंह राजा वारिंग (कांग्रेस)
- मणिकम टैगोर (कांग्रेस)
- गुरजीत सिंह औजला (कांग्रेस)
- प्रशांत यादवराव पडोले (कांग्रेस)
- चमाला किरण कुमार रेड्डी (कांग्रेस)
- डीन कुरियाकोज (कांग्रेस)
- एस वेंकटेसन (CPI-M)
निलंबन का कारण:
- “सदन में अशोभनीय व्यवहार“
- “कार्यवाही में बाधा डालना”
BJP सांसद निशिकांत दुबे का 6 किताबों वाला ड्रामा
जब BJP ने भी किताबों का सहारा लिया
4 फरवरी को एक और नाटक हुआ जब BJP सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में 6 किताबें लेकर आए।
दुबे की किताबें:
- गांधी परिवार के भ्रष्टाचार पर किताबें
- कांग्रेस के घोटालों की किताबें
- नेहरू-गांधी परिवार पर आरोपों की किताबें
विरोधाभास:
- जब राहुल को Rule 349 से रोका गया
- तो दुबे को भी रोका जाना चाहिए था
- लेकिन उन्हें 3 मिनट तक बोलने दिया गया
TDP सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने आपत्ति की:
- “अगर Rule 349 लागू होता है तो सबपर लागू हो“
- “दोहरा मापदंड क्यों?”
प्रियंका गांधी का आरोप:
- “निशिकांत दुबे सरकार की परमिशन से ही बोलते हैं”
- “जब सरकार हंगामा चाहती है तो उन्हें खड़ा कर दिया जाता है”
चीन के साथ असली हकीकत क्या है?
2020 लद्दाख संघर्ष: पूरी कहानी
15 जून 2020 – गलवान घाटी
- चीनी और भारतीय सैनिकों में हाथापाई
- 20 भारतीय जवान शहीद
- चीन के भी करीब 40-45 मारे गए (अनौपचारिक आंकड़े)
- यह 45 साल में पहली बार भारत-चीन सीमा पर मौतें
30-31 अगस्त 2020 – रेचिन ला
- यह निर्णायक रात थी
- चीनी सेना ने रणनीतिक ऊंचाइयां लेने की कोशिश
- भारतीय सेना ने पहले कब्जा कर लिया
- चीन को पीछे हटना पड़ा
सरकार बनाम विपक्ष: कौन सही?
सरकार का पक्ष:
- “हमने चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया”
- “भारतीय सेना ने बहादुरी दिखाई”
- “राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को पूरी आजादी दी”
- “‘जो उचित समझो करो’ का मतलब था – सेना पर विश्वास“
Also Read : यूपी सीएम यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज की मीटिंग में कानून-व्यवस्था पर सख्त निर्देश दिए
विपक्ष का आरोप:
- “PM ने जिम्मेदारी से हाथ खींचे“
- “सबसे गंभीर संकट में निर्णय नहीं लिया“
- “सेना को अकेला छोड़ दिया“
- “फिर credit लेने आ गए”
जनरल नरवणे ने क्या महसूस किया?
किताब के अनुसार:
“उस वक्त मुझे लगा कि राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को अकेला छोड़ दिया। यह वो क्षण था जब हमें स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत थी।”
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जनरल MM नरवणे कौन हैं?
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को पुणे में हुआ था। वे भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी के बेटे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी से शिक्षा ली। 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री में कमीशन मिला। वे 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे।
किताब ‘Four Stars of Destiny’ क्या है?
यह जनरल MM नरवणे की आत्मकथा है जिसमें उनके सैन्य करियर और विशेष रूप से 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष का विस्तृत विवरण है। किताब को प्रकाशक Penguin Random House ने तैयार किया था लेकिन सरकार की सुरक्षा मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह अभी तक प्रकाशित नहीं हो पाई है।
संसद का नियम 349 क्या है?
लोकसभा के नियम 349 के अनुसार, सदस्य केवल उन्हीं अखबारों, किताबों या दस्तावेजों को उद्धृत कर सकते हैं जो प्रामाणिक, प्रकाशित और चर्चा के विषय से सीधे संबंधित हों। अप्रकाशित या अप्रमाणित सामग्री का हवाला देना नियमों के खिलाफ है।
राहुल गांधी को किताब कहां से मिली?
यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। राहुल ने कहा कि किताब विदेश में प्रकाशित हो चुकी है और भारत में सरकार इसे रोक रही है। कुछ सूत्रों का कहना है कि किताब की कुछ प्रतियां सेना के सूत्रों से लीक हुईं। कुछ समय के लिए यह Amazon पर भी दिखी थी लेकिन बाद में हटा दी गई।
PM मोदी लोकसभा में क्यों नहीं आए?
आधिकारिक रूप से सरकार ने कहा कि PM को सुरक्षा एजेंसियों ने लोकसभा में न जाने की सलाह दी थी। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि PM नरवणे की किताब के मुद्दे से बचना चाहते थे क्योंकि राहुल गांधी ने उन्हें किताब सौंपने की बात कही थी।
2020 में लद्दाख में क्या हुआ था?
15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई हुई जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए। 30-31 अगस्त 2020 की रात को चीनी सेना ने रेचिन ला की ऊंचाइयों पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन भारतीय सेना ने पहले ही वहां पोजीशन ले ली और चीन को पीछे हटना पड़ा।
निष्कर्ष: संसद में सच की लड़ाई या राजनीतिक नौटंकी?
यह विवाद सिर्फ एक किताब के बारे में नहीं है। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मामला है।
तीन बड़े सवाल:
- क्या 2020 में PM मोदी ने सही किया?
- सेना को आजादी देना सही था या जिम्मेदारी से बचना?
- स्पष्ट राजनीतिक निर्देश क्यों नहीं?
- किताब क्यों नहीं छप रही?
- क्या सरकार कुछ छुपा रही है?
- सेना प्रमुख की किताब रोकना लोकतंत्र के लिए सही है?
- संसद में नियम सबके लिए बराबर?
- राहुल को Rule 349 से रोका गया
- निशिकांत दुबे को क्यों नहीं?
आने वाले दिनों में:
- संसद में और तूफान आ सकता है
- विपक्ष इस मुद्दे को जारी रखेगा
- किताब का प्रकाशन बड़ा मुद्दा बनेगा
- 2024 के चुनावों में भी यह उठ सकता है
जनता के लिए सवाल: क्या देश को पूरी सच्चाई जानने का हक नहीं है? जब एक सेना प्रमुख अपने अनुभव साझा करना चाहता है तो उसे क्यों रोका जा रहा है? ज्यादा अपडेट के लिए deshkipatrika.com पर बने रहें।
