रंगों के साथ उठी जिम्मेदारी की आवाज
अबीर-गुलाल उड़ रहा था, फाग के सुर गूंज रहे थे — और इसी माहौल में वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र के नियारडीह में रघुवंश प्रतिष्ठानम के आंगन में एक ऐसा संकल्प लिया गया जो सिर्फ त्योहार तक सीमित नहीं था। रघुवंशी समाज के होली मिलन समारोह में इस बार रंगों के साथ-साथ गरीब बच्चों के भविष्य की चिंता भी सामने आई।
यह आयोजन हर साल होता है। लेकिन इस बार कुछ अलग था।
समाज एक जगह, मकसद एक
रविवार को हुए इस होली मिलन समारोह में आसपास के जिलों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। रघुवंश प्रतिष्ठानम का परिसर गुलाल की लाली और फाग की धुनों से भर गया था। एक-दूसरे को अबीर लगाते हुए लोग मिले, गले लगे — और फिर बैठकर उन बातों पर भी विचार किया जो जरूरी थीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री लोकनाथ सिंह ने की और संचालन श्री हरिनाम सिंह ने किया। मंच पर श्री सुरेन्द्र सिंह, रामभुवन सिंह, विनोद कुमार सिंह, राणा प्रताप सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह और सुरेन्द्र नाथ सिंह सहित कई वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
इसी मौके पर रामभुवन सिंह और जगत बंधु रघुबंसी ने परंपरागत तरीके से सदस्यता शुल्क देकर समाज की आजीवन सदस्यता ग्रहण की। एक छोटी-सी रस्म — लेकिन उसका मतलब बड़ा था।
वो वादा जो रंगों के बीच हुआ

समारोह में समिति के उद्देश्यों पर चर्चा हुई। और इस चर्चा का केंद्र था — समाज के वे लोग जो हाशिये पर हैं।
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वक्ताओं ने साफ कहा कि गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में समाज मिलकर आर्थिक सहयोग करेगा। मेधावी छात्र-छात्राएं जो पैसों की कमी की वजह से पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हैं, उन्हें भी समाज के लोग मिलकर सहारा देंगे।
एक वक्ता ने कहा — “यदि किसी छात्र को आर्थिक अभाव के कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, तो समाज के लोग मिलकर उसकी पढ़ाई में आर्थिक सहयोग करेंगे।”
यह बात सुनकर सभागार में तालियां बजीं। और वहां मौजूद लोगों ने इस संकल्प को सिर्फ सुना नहीं — हाथ उठाकर उसे अपना भी बताया।
भाईचारे की यही असली होली

होली का त्योहार वैसे भी मेल-मिलाप का मौका होता है। लेकिन इस तरह के आयोजन जब सामाजिक जिम्मेदारी का रंग लेते हैं, तो उनका असर ज्यादा गहरा होता है।
नियारडीह जैसे छोटे से इलाके में, जहां शहरी चमक-दमक नहीं है — वहां सैकड़ों लोगों का एक साथ आना और किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई या किसी बेटी की शादी के लिए हाथ बढ़ाने का वादा करना — यह छोटी बात नहीं है।
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समारोह में पारंपरिक फाग गीतों की प्रस्तुति भी हुई। फूलों की होली खेली गई। माहौल उत्सव का था — लेकिन जो बातें हुईं, वे उत्सव से कहीं आगे की थीं।
रघुवंशी समाज का यह होली मिलन समारोह इस बार सिर्फ रंगों का नहीं, एक सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला भी बन गया।
