वो स्कूल जहां गांव के बच्चे शहरी बच्चों को पीछे छोड़ देते हैं
जौनपुर जिले के डोभी क्षेत्र को शायद ज़्यादा लोग नहीं जानते। लेकिन इस बार CBSE बोर्ड के 10वीं के नतीजों ने इस छोटे से इलाके को चर्चा में ला दिया है। इटहरा बरडीहा गांव में बना बी.डी.आर. पब्लिक स्कूल — जिसे लोग BDR के नाम से जानते हैं — उसके बच्चों ने इस बार जो किया, वो पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
पहला नाम है मुस्कान सोनी का।
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इटहरा गांव के रवि सेठ की बेटी मुस्कान ने 91% अंक लेकर स्कूल में टॉप किया। ग्रामीण पृष्ठभूमि, सीमित संसाधन — और फिर भी 91 फीसदी। यह सिर्फ एक नंबर नहीं, एक जिद का नतीजा है।
टॉपर्स की लिस्ट जो गांव-गांव में हो रही चर्चा
मुस्कान के बाद दूसरे स्थान पर दो छात्र एक साथ आए — प्रभात (पुत्र राजेश, ग्राम कुसुम्ही) और आलोक कहार (पुत्र महेश कुमार, ग्राम सतमेसरा) — दोनों ने 90% अंक हासिल किए। एक ही पायदान पर दो नाम। जैसे दोनों ने मिलकर तय कर लिया हो कि साथ जीतेंगे।
तीसरे स्थान पर रहीं आकांक्षा (पुत्री महेंद्र, ग्राम कोइलारी) जिन्होंने 85% अंक प्राप्त किए। और चौथे पर आराध्या यादव — आज़मगढ़ के परसौना गांव से आई सुनील यादव की बेटी — जिन्होंने 81% के साथ स्कूल का नाम ऊंचा किया।
चारों में से तीन लड़कियां हैं। यह भी कम बड़ी बात नहीं।
स्कूल में जश्न, मिठाई और माला
नतीजे आते ही स्कूल का माहौल बदल गया। विद्यालय के प्रबंधक रामजनम यादव और प्रधानाध्यापक रामनयन यादव ने खुद अपने हाथों से बच्चों को माला पहनाई, मिठाई खिलाई और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। छोटे-से गांव में यह नज़ारा देखने वाला था।
स्कूल चेयरमैन डॉ. आर.सी. यादव ने कहा — “बी.डी.आर. पब्लिक स्कूल हर वर्ष नई सफलता प्राप्त कर रहा है, जिसका श्रेय शिक्षकों के कठिन परिश्रम और क्षेत्रवासियों के सहयोग को जाता है।”
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उन्होंने यह भी बताया कि यह स्कूल महज़ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। यहां बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ संस्कार, संस्कृति और नैतिक मूल्यों पर भी उतना ही ध्यान दिया जाता है — जितना syllabus पर।
30 साल का अनुभव, और वो भरोसा जो क्षेत्र ने दिया
विद्यालय के उपप्रबंधक रामजीत यादव की बात सुनकर समझ आता है कि यह सफलता रातोंरात नहीं आई।
“विद्यालय का संचालन CBSE बोर्ड में 30 वर्षों से भी अधिक अनुभव रखने वाले शिक्षाविदों की देखरेख में हो रहा है” — उन्होंने बताया। यही वजह है कि अल्प समय में ही BDR Public School ने डोभी क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना ली।
जो भरोसा क्षेत्र की जनता ने इस स्कूल पर जताया — बच्चों के इन नतीजों ने उस भरोसे को सही साबित किया है।
ग्रामीण शिक्षा की असली तस्वीर
अक्सर कहा जाता है कि अच्छी शिक्षा के लिए शहर जाना पड़ता है। लेकिन मुस्कान, प्रभात, आलोक, आकांक्षा और आराध्या — ये पांच नाम उस सोच को चुनौती दे रहे हैं।
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ये बच्चे किसी बड़े शहर के महंगे coaching center में नहीं पढ़े। इनके घर गांव में हैं, रास्ते कच्चे हैं, सुविधाएं सीमित हैं — लेकिन हौसला? वो शत-प्रतिशत है।
डोभी क्षेत्र के लिए यह सिर्फ एक exam result नहीं। यह एक message है — कि मेहनत और सही मार्गदर्शन हो तो पता कोई भी हो, मंज़िल मिलती ज़रूर है।
