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Sunday, 26 Apr 2026

योगी आदित्यनाथ: UP में बुलडोज़र से बजट तक — एक मुख्यमंत्री जो हमेशा सुर्खियों में रहता है

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। माफिया के खिलाफ बुलडोज़र अभियान, करोड़ों के निवेश का दावा, अयोध्या का विकास और 2027 के चुनाव की आहट — इन सबके बीच योगी की राजनीति और शासन दोनों पर सवाल और समर्थन दोनों हैं। विपक्ष उन्हें ‘बुलडोज़र सरकार’ कहता है तो समर्थक उन्हें ‘law & order का चेहरा’। BJP के भीतर Delhi-Lucknow tension की भी चर्चा है। लेकिन एक बात तय है — योगी आदित्यनाथ UP की राजनीति का केंद्र हैं और 2027 तक यही रहेंगे।

लखनऊ के 5, कालिदास मार्ग पर बैठा एक शख्स — गेरुआ वस्त्र, तीखी नज़र और बेबाक बयान। योगी आदित्यनाथ को समझना आसान नहीं, लेकिन ignore करना उससे भी मुश्किल।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से जो हलचल मची है, उसके केंद्र में एक बार फिर वही नाम है — योगी आदित्यनाथ।

माफिया के खिलाफ मुहिम — धीमी नहीं पड़ी

जब से योगी सरकार ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ को गंभीरता से आगे बढ़ाया है, UP के कई ज़िलों में माफिया की ज़मीनें ज़ब्त की जा रही हैं। प्रयागराज से लेकर मेरठ तक — बुलडोज़र अब सिर्फ एक मशीन नहीं, एक political symbol बन चुका है।

हाल ही में प्रयागराज में एक बड़े अपराधी की करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई। प्रशासन का कहना है कि पिछले तीन सालों में करीब 1,700 करोड़ रुपये से अधिक की माफिया संपत्तियां या तो ध्वस्त की गई हैं या कुर्क।

“पहले जो लोग थाने पर रौब दिखाते थे, आज वो ज़मानत के लिए दर-दर भटक रहे हैं” — ये बात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कही।

विरोधी इसे ‘selective action’ कहते हैं। लेकिन सरकार के आंकड़े बड़े हैं और दिखते भी हैं।

निवेश और बदलती UP की तस्वीर

योगी आदित्यनाथ की government का एक और चेहरा है — जो कम दिखता है, लेकिन असर बड़ा है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद UP में investment आने का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वो अब ज़मीन पर उतरने लगा है। Noida और Greater Noida में data centers, semiconductor units और textile parks के लिए काम चल रहा है।

योगी सरकार दावा करती है कि UP अब देश का दूसरा सबसे बड़ा economy वाला राज्य बनने की ओर है। आंकड़े हों या न हों, Purvanchal Expressway से लेकर Bundelkhand तक — बदलाव दिख रहा है।

“UP की image बदली है। Investors अब सोचते हैं” — एक industry body के प्रतिनिधि ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा।

हालांकि रोज़गार के मोर्चे पर सवाल अभी भी हैं। युवा पूछते हैं — करोड़ों का निवेश, लेकिन नौकरी कहाँ?

राजनीति की बिसात पर योगी

BJP के भीतर भी योगी आदित्यनाथ एक अलग धुरी हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनकी position को लेकर चर्चा अभी से शुरू हो गई है।

कभी-कभी Delhi और Lucknow के बीच एक अनकहा tension भी दिखता है। नीतियों पर, प्राथमिकताओं पर। लेकिन publicly दोनों तरफ से सब कुछ ‘सामान्य’ ही दिखाया जाता है।

सपा, बसपा और कांग्रेस — तीनों ने योगी को घेरने की कोशिश की है। लेकिन ‘हिंदुत्व की राजनीति’ और ‘law & order’ का combination अभी भी उनकी सबसे मज़बूत ढाल बनी हुई है।

अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था — “बुलडोज़र सरकार जनता की समस्याएं नहीं, सिर्फ घर तोड़ती है।” जवाब में सरकार ने crime statistics की एक लंबी list जारी की।

यही UP की राजनीति है — हर बयान का जवाब, हर जवाब पर सवाल।

धर्म, संस्कृति और ‘हिंदू राष्ट्र’ की बात

योगी सिर्फ CM नहीं — वो Gorakhnath Math के पीठाधीश्वर भी हैं। यह दोहरी पहचान उन्हें बाकी मुख्यमंत्रियों से अलग करती है।

काशी, मथुरा और अयोध्या — तीनों के विकास को लेकर उनकी सरकार aggressive रही है। Ram Mandir की प्राण प्रतिष्ठा के बाद Ayodhya को international tourism hub बनाने की कोशिश जारी है। airport बना, रेलवे station बदला, hotels आ रहे हैं।

लेकिन स्थानीय दुकानदार और छोटे व्यापारी कहते हैं — “साहब, भीड़ आती है, लेकिन हमारे घर तक पैसा नहीं पहुँचता।”

यह tension — development का दिखावा और असली ज़मीनी फ़ायदा — अभी भी UP की सबसे बड़ी कहानी है।

वो जो नहीं बदला

योगी आदित्यनाथ का style नहीं बदला — direct, aggressive, और अपनी बात पर अड़े रहने वाले।

चाहे press conference हो या विधानसभा, वो माफ़ी नहीं माँगते। चाहे controversy हो या criticism — जवाब देते हैं, लेकिन पीछे नहीं हटते।

यही उनकी ताकत है। यही उनकी कमज़ोरी भी मानी जाती है।

2027 दूर नहीं है। और UP की जनता — जो हर चुनाव में चौंकाती है — अभी चुप है। देख रही है। तौल रही है।