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Sunday, 26 Apr 2026

योगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान: यूपी में अब हर गरीब को मिलेगा पक्का मकान, 25 लाख घरों का टारगेट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में 25 लाख नए आवास बनाने की बड़ी घोषणा की। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यह लक्ष्य 2026 तक पूरा करने का दावा किया गया है। सरकार ने बताया कि पहले से स्वीकृत 18 लाख में से 14 लाख मकान पूरे हो चुके हैं। इस बार योजना में Aadhaar-linked survey, quality monitoring committee और महिला मुखिया के नाम रजिस्ट्रेशन जैसे नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। विपक्ष ने इसे चुनावी घोषणा करार दिया है, जबकि जमीनी स्तर पर कुछ लाभार्थियों ने सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं।

लखनऊ की उस सुबह जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच पर आए, तो भीड़ में एक बुजुर्ग महिला की आंखें भर आईं। उसने कभी सोचा नहीं था कि उसकी कच्ची दीवारों वाली झोपड़ी की जगह एक दिन पक्का मकान खड़ा होगा। आज वह दिन आ गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लखनऊ में एक बड़े सरकारी कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के गरीब और बेघर परिवारों के लिए 25 लाख नए आवास बनाने की घोषणा की। यह योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण एवं शहरी) के तहत अगले दो वर्षों में पूरी की जाएगी।

योगी का वादा — सिर्फ भाषण नहीं, जमीन पर काम

इस बार सरकार का दावा है कि यह महज announcement नहीं है। पहले से स्वीकृत 18 लाख मकानों में से 14 लाख से ज्यादा का निर्माण पूरा हो चुका है, और बाकी में तेज़ी से काम जारी है। नए 25 लाख मकानों का लक्ष्य 2026 तक हासिल करने की deadline तय की गई है।

योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा — “उत्तर प्रदेश में कोई भी गरीब बेघर नहीं रहेगा। हमारी सरकार का संकल्प है कि हर परिवार के सिर पर छत हो, और वह छत पक्की हो।”

शब्द सुनने में अच्छे लगते हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत क्या है?

गांवों में क्या बदल रहा है?

पूर्वांचल के सोनभद्र जिले में रहने वाले रामखेलावन यादव (62) बताते हैं — “पहले सोचते थे कि सरकारी योजना है तो कागज़ पर ही रहेगी। लेकिन हमारे गांव में पिछले साल 40 घर बने, सब पक्के। हमारा भी बना।” उनकी आवाज़ में जो संतोष था, वो किसी सरकारी data से ज्यादा बोलता है।

हालांकि, विपक्ष की राय अलग है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता का कहना है — “25 लाख घरों की बात हर चुनाव से पहले होती है। असलियत में लाभार्थियों की list में भेदभाव, बिचौलियों की मनमानी और घटिया निर्माण — यही हकीकत है।”

दोनों पक्षों की बातें सुनकर लगता है कि सच शायद बीच में कहीं है।

इस योजना में क्या नया है?

इस बार सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं जो ध्यान खींचते हैं:

  • लाभार्थियों की पहचान अब Aadhaar-linked survey से होगी, ताकि गलत लोगों को फायदा न मिले
  • मकान की quality जांचने के लिए district-level monitoring committee बनाई जाएगी
  • महिला मुखिया के नाम पर घर रजिस्टर करना अनिवार्य किया गया है
  • पहली बार SC/ST और OBC परिवारों के लिए अलग से fast-track process तय हुई है

ये बदलाव छोटे लग सकते हैं, लेकिन जिन लोगों ने पहले की योजनाओं में भेदभाव झेला है, उनके लिए ये detail मायने रखती है।

योगी का political angle

यह घोषणा ऐसे वक्त पर आई है जब 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। BJP जानती है कि यूपी में housing का मुद्दा वोट बनाता है। ग्रामीण इलाकों में जहां बिजली और सड़क पहले पहुंची थी, वहां अब घर की मांग है।

योगी सरकार यह message देना चाहती है कि वो deliver करती है। और इसीलिए पुराने आंकड़े सामने रखे गए — 14 लाख पूरे हो चुके घर — ताकि नई घोषणा believable लगे।

Rajनीति और ज़रूरत — दोनों एक साथ चल रहे हैं। यही इस देश की governance की असली तस्वीर है।

वो बुजुर्ग महिला जिसका ज़िक्र पहले हुआ

कार्यक्रम के बाद जब reporters ने उस बुजुर्ग महिला — शांतिदेवी — से बात की, तो उन्होंने बस इतना कहा — “बेटा, छत मिल जाए तो बाकी सब होता रहता है।”

शायद यही वो sentence है जो किसी भी policy document से ज्यादा अहम है। सरकारें आती-जाती हैं, योजनाएं बनती-बिगड़ती हैं — लेकिन एक गरीब परिवार के लिए पक्की छत का मतलब सिर्फ ईंट और सीमेंट नहीं होता। वो dignity होती है। वो security होती है।

अब देखना यह है कि 25 लाख का यह टारगेट कागज़ों से निकलकर कितने घरों की छत बनता है।