अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा घोटाला इन दिनों उत्तर प्रदेश की सियासत और आम लोगों की चर्चाओं के केंद्र में है। अयोध्या इस समय किसी धार्मिक आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि आस्था के नाम पर जुटाए गए दान में कथित गड़बड़ी को लेकर सुर्खियों में है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की सामग्री से जुड़ी अनियमितताओं की एसआईटी जांच लगातार जारी है, और जांच एजेंसियों ने अब तक कई पदाधिकारियों से पूछताछ कर महत्वपूर्ण सबूत जुटाने का दावा किया है।
सूत्रों के अनुसार, जांच में कई नए पहलू सामने आए हैं। नकदी के साथ-साथ सोने, चांदी और हीरे के दान किए गए आभूषणों के रिकॉर्ड की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि दान में मिले बहुमूल्य गहनों के प्रबंधन और दस्तावेजीकरण में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। हालांकि यह आशंका अभी प्रारंभिक स्तर पर बताई जा रही है।
चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से पूछताछ का सिलसिला
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों पर जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा, महासचिव चंपत राय, उनके ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और गोपाल राव से एसआईटी ने पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि टिन्नू यादव से जब दोबारा सवाल-जवाब हुए, तो दानराशि की गिनती प्रक्रिया को लेकर उन्होंने अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लिया।
एसआईटी ने गुरुवार देर रात तक कई लोगों से पूछताछ कर अहम सबूत जुटाने का दावा किया है। इसी क्रम में अनिल मिश्रा से करीब तीन घंटे तक सवाल-जवाब किए गए, जबकि चंपत राय और गोपाल राव से भी फिर से पूछताछ की गई। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम दानराशि की गणना प्रक्रिया, उससे जुड़े रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
| विषय | जानकारी (सूत्रों के अनुसार) |
|---|---|
| पूछताछ में शामिल लोग | अनिल मिश्रा, चंपत राय, गोपाल राव, टिन्नू यादव |
| जांच का केंद्र बिंदु | नकदी, स्वर्ण-रत्न आभूषण, दानराशि गणना रिकॉर्ड |
| अनिल मिश्रा से पूछताछ अवधि | लगभग तीन घंटे |
| अब तक की आधिकारिक पुष्टि | किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं, जांच जारी |
नकदी रिकॉर्ड में खामियां और गोपाल राव की भूमिका पर सवाल
सूत्रों का दावा है कि नकदी के रिकॉर्ड में कई खामियां जांच टीम के सामने आई हैं। यहीं से मामला और दिलचस्प हो जाता है — जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि गोपाल राव ट्रस्ट में किसी आधिकारिक पद पर नहीं होने के बावजूद कथित रूप से वीवीआईपी दर्शन पास जारी करने के अधिकार का उपयोग करते रहे। उनकी आईडी का इस्तेमाल कर एक रिश्तेदार द्वारा भी वीवीआईपी पास जारी किए जाने की जांच की जा रही है।
इसके अलावा मंदिर प्रबंधन, दानराशि की गणना और मंदिर निर्माण कार्यों में गोपाल राव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मंदिर निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री और पत्थरों की खरीद प्रक्रिया में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, और अब इस पहलू को भी जांच के दायरे में लाया जा रहा है।
हालांकि, कागजों पर तस्वीर कुछ और दिखती है — अब तक एसआईटी या जिला प्रशासन की ओर से किसी भी प्रकार की अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों के अनुसार, जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की पड़ताल के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
बृजभूषण सिंह बोले- “बिना धुएं के आग नहीं लगती”
राम मंदिर चढ़ावा घोटाला को लेकर अब सियासी प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। गोंडा में उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोग यदि इस मुद्दे को उठा रहे हैं, तो सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
“बिना धुएं के आग नहीं निकलती, और जो सवाल उठ रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
बृजभूषण सिंह ने राम जन्मभूमि आंदोलन से अपने पुराने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलन के लगभग सभी प्रमुख नेताओं से उनका संबंध रहा है। उन्होंने दावा किया कि लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं वाहन चलाने का काम किया था, और कारसेवकों पर गोलीकांड से पहले उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। उनके अनुसार, बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में नामजद आरोपियों में भी वह शामिल रहे थे।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सांसद विनय कटियार और अन्य आंदोलनकारी यदि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, तो उनकी बातों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। बृजभूषण सिंह के मुताबिक, कुछ लोगों के सवालों में दम है और सरकार को पूरे मामले की तह तक जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह मामला अब सिर्फ ट्रस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी उंगली केंद्र और प्रदेश सरकार तक उठ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जल्द ही सच्चाई सामने आएगी।
इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बृजभूषण सिंह ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का बचाव करते हुए कहा कि वह एक अनुभवी और जिम्मेदार अधिकारी हैं, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाई।
अयोध्या में भाजपा की हार और राम मंदिर चढ़ावा घोटाला का सियासी पहलू
बृजभूषण सिंह ने इस मौके पर अयोध्या में भाजपा को हुए राजनीतिक नुकसान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस बात की गंभीर समीक्षा होनी चाहिए कि आखिर अयोध्या जैसी महत्वपूर्ण सीट पर पार्टी को हार का सामना क्यों करना पड़ा।
उनका दावा था कि अयोध्या में आम लोगों की आवाज और उनकी परेशानियों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। मंदिर निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर कई रास्ते बंद कर दिए गए, जिससे आसपास के जिलों और गांवों के लोगों का पारंपरिक संपर्क प्रभावित हुआ। उनके अनुसार, वर्षों पुरानी धार्मिक और सामाजिक परंपराएं इससे बाधित हुईं, जिसका असर जनभावनाओं पर पड़ा और इसका राजनीतिक नुकसान भी भाजपा को उठाना पड़ा।
आगे क्या? राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामले में जांच की दिशा
फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामला जांच के दौर से गुजर रहा है, और कोई भी आरोप अब तक आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ है। एसआईटी की टीम नकदी, आभूषणों और वीवीआईपी पास जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल जारी रखे हुए है। ट्रस्ट और प्रशासन की ओर से अभी इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राजनीतिक हलकों में यह मामला अब केवल मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है। बृजभूषण सिंह जैसे आंदोलन से जुड़े पुराने नेताओं की प्रतिक्रिया ने इसे राज्य और केंद्र की राजनीति से भी जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में एसआईटी की रिपोर्ट और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
लेखक परिचय
लेखक: महेंद्र प्रताप सिंह
विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स
संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध स्रोतों, आधिकारिक दस्तावेजों, बयानों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

