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Tuesday, 23 Jun 2026

UP News: योगी सरकार ने दी आयुष्मान कार्डधारकों को बड़ी राहत, अब जिले में ही होगा समस्याओं का समाधान

योगी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के लिए कार्ड संबंधी समस्याओं का समाधान अब जिला स्तर पर उपलब्ध कराया है, जिससे लाभार्थियों को लखनऊ स्थित साचीज कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

 

उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ी राहत भरी व्यवस्था लागू की है। अब आयुष्मान कार्ड से जुड़ी शिकायतों के लिए लाभार्थियों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) के लखनऊ स्थित मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान अब सीधे जिला स्तर पर ही हो सकेगा। इसके लिए प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), नोडल आयुष्मान अधिकारियों और जिला कार्यान्वयन इकाई की टीमों को विशेष तकनीकी आईडी उपलब्ध करा दी गई है।

संक्षेप में: योगी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की कार्ड संबंधी समस्याओं के निस्तारण को जिला स्तर पर लाने का फैसला किया है। इसके लिए सीएमओ और जिला अधिकारियों को तकनीकी अधिकार दिए गए हैं, जिससे अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड डिसेबल जैसी प्रक्रियाएं स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो सकेंगी।

आयुष्मान कार्ड समस्या समाधान अब जिला स्तर पर, सीएमओ को मिली तकनीकी आईडी

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि आयुष्मान भारत योजना का वास्तविक लाभ पात्र लाभार्थियों तक बिना किसी अनावश्यक देरी के पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसी मंशा के तहत प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इस नई व्यवस्था के तहत जिला स्तरीय अधिकारी अब आयुष्मान कार्ड के अप्रूवल, रिजेक्शन और कार्ड को डिसेबल करने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं को स्थानीय स्तर पर ही तेजी से पूरा कर सकेंगे। इससे लाभार्थियों का समय और पैसा दोनों बचेगा, और सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकेंगी।

उत्तर प्रदेश में दावा निस्तारण का समय राष्ट्रीय औसत से बेहतर

साचीज ने गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने के साथ-साथ अस्पतालों को समयबद्ध भुगतान दिलाने की दिशा में भी कई पहल शुरू की हैं। एजेंसी के अनुसार, दावों (क्लेम) के निस्तारण और भुगतान की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए निरंतर सुधार किए जा रहे हैं।

एजेंसी के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश में भुगतान लंबित रहने की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है, और फिलहाल लगभग 500 करोड़ रुपये की देयता ही लंबित बताई जा रही है। साचीज के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में दावा निस्तारण और भुगतान का औसत टर्न-अराउंड टाइम लगभग 57 दिन है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 73 दिन है।

पैरामीटर आंकड़ा (साचीज के अनुसार)
UP में दावा निस्तारण व भुगतान का औसत समय लगभग 57 दिन
राष्ट्रीय औसत लगभग 73 दिन
लंबित देयता लगभग 500 करोड़ रुपये
डी-एम्पैनल किए गए अस्पताल (वर्तमान वित्तीय वर्ष) लगभग 200

अनियमितता के आरोप में 200 अस्पताल डी-एम्पैनल, 300 का हो रहा फील्ड ऑडिट

साचीज की सीईओ के अनुसार, कई बार अस्पतालों द्वारा आवश्यक दस्तावेज समय पर या पूर्ण रूप से प्रस्तुत न किए जाने के कारण दावे अस्वीकृत हो जाते हैं, जिससे अस्पतालों को भुगतान मिलने में देरी होती है। इस समस्या से निपटने के लिए एजेंसी विभिन्न चरणों में ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है, जिनमें अस्पतालों को दावा प्रस्तुत करने की सही प्रक्रिया और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन्स के अनुरूप उपचार व दावा प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। गुणवत्ता मानकों का पालन न करने और विभिन्न अनियमितताओं के चलते एजेंसी ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग 200 अस्पतालों को योजना से डी-एम्पैनल कर दिया है। इसके अलावा करीब 300 अस्पताल ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके खिलाफ अपकोडिंग या संदिग्ध दावों के माध्यम से अनुचित भुगतान प्राप्त करने की आशंका सामने आई है। साचीज के अनुसार ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उनके विरुद्ध विस्तृत फील्ड ऑडिट कराया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

संबंधित अस्पतालों की प्रतिक्रिया स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है। एजेंसी का दावा है कि इस कदम से योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होगी, और भविष्य में केवल वही अस्पताल योजना से जुड़े रहेंगे जो निर्धारित मानकों के अनुरूप लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध करा रहे हैं।

ललितपुर में सीएम योगी के हाथों लाभार्थियों को मिला सम्मान

इसी कड़ी में ललितपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मान पाकर विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के चेहरे खिल उठे। कार्यक्रम में सीएम योगी ने लाभार्थियों को चेक, चाबी, स्वीकृति पत्र और आयुष्मान कार्ड जैसे दस्तावेज सौंपे।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत संदीप को 4.50 लाख रुपये का चेक और ट्रैक्टर की चाबी दी गई, जबकि सत्येंद्र को इसी योजना के तहत 4.95 लाख रुपये का चेक और ट्रैक्टर की चाबी प्रदान की गई। यूपी बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा में जनपद में प्रथम स्थान पाने वाली मोहिनी पटेल को प्रमाण पत्र और 5,000 रुपये का चेक दिया गया, जबकि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत आशी यागिक को 7,000 रुपये का स्वीकृति पत्र सौंपा गया।

आंगनबाड़ी कार्यकत्री नंदिनी को स्मार्टफोन प्रदान किया गया, और मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत कुसुम तथा अंगूरी देवी को आवास की चाबी दी गई। पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना के तहत फूल सिंह को 1.59 लाख रुपये से अधिक और जाहर सिंह को 1.17 लाख रुपये से अधिक का स्वीकृति पत्र मिला, जबकि एफपीओ के तहत आलोक जैन को 10 लाख रुपये का स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत रीना और गीता को 4.24 करोड़ रुपये से अधिक का चेक सौंपा गया। इसके अलावा विद्युत सखी यमुना और बीसी सखी भानु कुंवर को भी उनके कार्यों के लिए प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कुल मिलाकर, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़ी यह नई व्यवस्था प्रदेश के लाखों लाभार्थियों के लिए राहत भरी मानी जा रही है। जिला स्तर पर समाधान की सुविधा से आयुष्मान कार्ड से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है, जबकि अस्पतालों पर बढ़ती निगरानी से योजना की विश्वसनीयता को बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

लेखक परिचय

लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता

विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स

संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध स्रोतों, सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है।