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Saturday, 25 Apr 2026

योगी सरकार का बड़ा तोहफा: नोएडा में न्यूनतम मजदूरी 21% बढ़ी, लाखों मजदूरों को सीधा फायदा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नोएडा समेत पूरे प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी में 21 फीसदी तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह संशोधन अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल — तीनों श्रेणी के मजदूरों पर लागू होगा। सरकार का कहना है कि डेढ़ करोड़ से ज़्यादा श्रमिकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू होंगी और compliance सुनिश्चित करने के लिए inspections बढ़ाई जाएंगी। जहाँ labour unions ने इसका स्वागत किया है, वहीं उद्योग जगत ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने इसे चुनावी घोषणा करार दिया है।

एक झटके में 21 फीसदी। बस इतना सुनकर ही नोएडा की फैक्ट्रियों, कंस्ट्रक्शन साइट्स और दुकानों पर काम करने वाले मजदूरों के चेहरे खिल उठे। योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का जो ऐलान किया है, वो सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं — उन लाखों हाथों की जीत है जो रोज़ सुबह काम पर निकलते हैं और शाम को जेब में गिनती के पैसे लेकर लौटते हैं।

नोएडा पर खास फोकस क्यों?

उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों से नोएडा अलग है। यहाँ IT कंपनियाँ हैं, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, और हज़ारों की तादाद में प्रवासी मजदूर भी हैं जो बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से यहाँ रोज़ी-रोटी की तलाश में आते हैं। इन्हीं मजदूरों के लिए सरकार ने अब न्यूनतम मजदूरी दर में 21 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है।

यह बढ़ोतरी सभी श्रेणियों पर लागू होगी — अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल मजदूर, तीनों को इसका लाभ मिलेगा। सरकारी आंकड़ों की मानें तो प्रदेश में करीब डेढ़ करोड़ से ज़्यादा श्रमिक इस फैसले से सीधे प्रभावित होंगे।

क्या थी पुरानी दर, क्या होगी नई?

पहले जहाँ अकुशल मजदूर को प्रतिदिन के हिसाब से एक निश्चित दर मिलती थी, अब वो दर संशोधित होकर काफी ऊपर जाएगी। श्रम विभाग के अनुसार यह संशोधन Variable Dearness Allowance यानी VDA में बदलाव के साथ-साथ Basic Minimum Wage में भी हुआ है। सरल भाषा में कहें तो — महंगाई के साथ-साथ मजदूर की तनख्वाह भी बढ़ेगी।

नोएडा जैसे industrial zone में यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योग हैं जहाँ minimum wage compliance अक्सर सवालों के घेरे में रहती है।

ज़मीन पर कैसा असर?

नोएडा सेक्टर 63 में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले रामजी प्रसाद कहते हैं — “पहले इतना मिलता था कि किराया देने के बाद खाने के लिए भी हिसाब लगाना पड़ता था। अगर सरकार सच में बढ़ाएगी और मालिक भी देगा, तो थोड़ी राहत मिलेगी।”

रामजी की बात में एक ज़रूरी ‘अगर’ है। असली सवाल यही है कि सरकारी आदेश कागज़ पर कितना है और ज़मीन पर कितना उतरेगा।

श्रम विभाग का कहना है कि इस बार compliance सुनिश्चित करने के लिए inspections बढ़ाई जाएंगी। जो नियोक्ता तय दर से कम देते पाए गए, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

योगी सरकार की मंशा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल के महीनों में श्रमिक कल्याण को लेकर कई घोषणाएं की हैं। यह मजदूरी संशोधन उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि जब प्रदेश में investment बढ़ रही है, GDP आगे जा रही है, तो मजदूर को भी उस growth में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

विपक्ष का कहना अलग है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसे चुनावी साल में जनता को लुभाने की कोशिश बताया है। उनका आरोप है कि पिछले कई सालों में मजदूरी बढ़ाने में देरी हुई, और अब जब elections नज़दीक हैं तब यह ऐलान किया जा रहा है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया — मिली-जुली

CII और FICCI जैसे industry bodies ने इस फैसले पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। कुछ का मानना है कि अचानक 21% की बढ़ोतरी से छोटे उद्योगों पर cost burden बढ़ेगा। एक manufacturer ने नाम न छापने की शर्त पर कहा — “हम मजदूरों के हक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अगर इसे phase-wise नहीं किया गया तो कुछ यूनिट्स के लिए मुश्किल हो सकती है।”

दूसरी तरफ, labour unions ने इस कदम का स्वागत किया है, हालांकि वो इसे पर्याप्त नहीं मानतीं। CITU के एक नेता का कहना था कि महंगाई को देखते हुए यह बढ़ोतरी और ज़्यादा होनी चाहिए थी।

लागू कब से होगा?

सरकारी आदेश के मुताबिक यह नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएंगी। श्रम विभाग जल्द ही सभी district offices को इसकी अधिसूचना भेजेगा। नियोक्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कर्मचारियों को revised rate से ही भुगतान सुनिश्चित करें।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाज़ियाबाद जैसे industrial belts में इसकी monitoring विशेष रूप से की जाएगी।

अब देखना यह है कि यह आदेश सिर्फ official gazette तक सीमित रहता है, या रामजी प्रसाद जैसे मजदूरों की जेब तक भी पहुँचता है।