नई दिल्ली में सोमवार को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक एक ऐसे नाज़ुक मोड़ पर आई जब विपक्षी एकता के सामने कई अंदरूनी सवाल खड़े हो चुके हैं। कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि इस बैठक में 25 पार्टियों ने हिस्सा लिया और पांच अहम मुद्दों पर आम सहमति बनी। इंडिया गठबंधन ने एसआईआर (Special Intensive Revision) और वोटर लिस्ट में हेरफेर को लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखने का फैसला किया। साथ ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक की मांग भी रखी गई। लेकिन इस बैठक की असली कहानी सिर्फ इन फैसलों में नहीं, बल्कि उन चेहरों में भी है जो वहां नहीं पहुंचे।
- बैठक कहाँ और कब: नई दिल्ली, सोमवार 8 जून 2026
- कितनी पार्टियां शामिल: 25 विपक्षी दल
- कौन अनुपस्थित: आम आदमी पार्टी, डीएमके
- पांच प्रमुख एजेंडा: CJI को पत्र, शिक्षा मंत्री से इस्तीफा, महंगाई-बेरोज़गारी, हर दो महीने बैठक, मानसून सत्र में समन्वय
- बीजेपी का जवाब: “वजूद चोरी हुआ, वोट नहीं”
उस दिन माहौल कुछ अलग था — बैठक की पृष्ठभूमि
बात करें तो पिछले कुछ महीनों में इंडिया गठबंधन के लिए राजनीतिक ज़मीन आसान नहीं रही। पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को झटका लगा। केरल में कांग्रेस और सीपीएम के बीच कड़वाहट सतह पर आ गई। तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में दरार दिखने लगी। और ऊपर से आम आदमी पार्टी पहले ही किनारे खड़ी थी।
ऐसे माहौल में दिल्ली में यह बैठक बुलाई गई — एकता का संदेश देने के लिए, रणनीति तैयार करने के लिए और शायद यह साबित करने के लिए भी कि गठबंधन अभी ज़िंदा है।
लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही एक बड़ी खबर आ गई। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुखेंदु रे ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी में भीतरी उथल-पुथल जारी है, और आशंका जताई जा रही है कि और भी सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं।
खड़गे ने बताया — इंडिया गठबंधन क्या करेगा?
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों के सामने पांच बिंदुओं का एजेंडा रखा। उनके शब्दों में एक दृढ़ता थी, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह एजेंडा जमीन पर उतर पाएगा?
खड़गे ने कहा कि इंडिया गठबंधन जल्द ही भारत के मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखेगा — एसआईआर, वोटर लिस्ट में हेरफेर और चुनाव की निष्पक्षता पर उठे सवालों को लेकर। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब विपक्षी दल ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाते आए हैं।
दूसरा मुद्दा था शिक्षा मंत्री का इस्तीफा। खड़गे ने आरोप लगाया कि नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है, जिसके चलते छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा।
तीसरा एजेंडा था देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों के संकट पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक की मांग करना।
इसके साथ ही खड़गे ने बताया कि इंडिया गठबंधन हर दो महीने में अपनी बैठक करेगा और मानसून सत्र के दौरान सदन में पूरा समन्वय रखा जाएगा। हर सुबह लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ सभी विपक्षी दलों की बैठक होगी।
बैठक में कौन-कौन था — पूरी सूची
इस बैठक में विपक्ष के कई बड़े चेहरे मौजूद रहे। कांग्रेस से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे; तृणमूल कांग्रेस से ममता बनर्जी; समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव; राष्ट्रीय जनता दल से तेजस्वी यादव; नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्लाह और पीडीपी से महबूबा मुफ़्ती।
वामपंथी दलों की ओर से सीपीएम के जॉन ब्रिटास और सीपीआई के डी. राजा उपस्थित रहे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) से सुप्रिया सुले और कुछ अन्य छोटे दलों के नेता भी बैठक में शामिल हुए। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया।
| नेता | पार्टी | उपस्थिति |
|---|---|---|
| मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी | कांग्रेस | ✅ व्यक्तिगत |
| ममता बनर्जी | तृणमूल कांग्रेस | ✅ व्यक्तिगत |
| अखिलेश यादव | समाजवादी पार्टी | ✅ व्यक्तिगत |
| तेजस्वी यादव | राष्ट्रीय जनता दल | ✅ व्यक्तिगत |
| उद्धव ठाकरे | शिवसेना (UBT) | ✅ वर्चुअल |
| अरविंद केजरीवाल / AAP | आम आदमी पार्टी | ❌ अनुपस्थित |
| एमके स्टालिन / DMK | डीएमके | ❌ अनुपस्थित |
यहीं से मामला दिलचस्प हो जाता है — डीएमके ने क्यों बनाई दूरी?
डीएमके का बैठक से बाहर रहना महज़ एक अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलनगोवन ने साफ कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस अब उनके साथ नहीं, बल्कि नई पार्टी टीवीके (तमिलगा वेट्री कड़गम) के साथ है। कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि वह भविष्य में स्थानीय निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव भी टीवीके के साथ लड़ेगी।
एलनगोवन ने पूछा — और यह सवाल तीखा है — “जब कांग्रेस राज्य में किसी दूसरे राजनीतिक गठबंधन के साथ आगे बढ़ रही है, तो डीएमके के लिए उस मंच पर बने रहने का क्या अर्थ है?”
यह उस दरार की कहानी है जो राज्य की राजनीति में पैदा होती है और राष्ट्रीय मंच तक पहुंच जाती है। इंडिया गठबंधन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है।
सीपीएम की नाराज़गी — बिना आरोप के नहीं चलेगी बात
सीपीएम बैठक में शामिल तो हुई, लेकिन कांग्रेस से शिकायत लेकर। पार्टी के जनरल सेक्रेट्री एमए बेबी ने केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेतृत्व के रवैये पर सीधा निशाना साधा।
बेबी ने कहा कि चुनाव के दौरान कांग्रेस ने यह बेबुनियाद आरोप लगाया था कि सीपीआई(एम) और एलडीएफ का भाजपा के साथ कोई गुप्त समझौता है। उनके शब्दों में कड़वाहट थी — “जब गठबंधन की प्रमुख पार्टी अपने ही एक प्रमुख सहयोगी पर ऐसे आरोप लगाए, तो यह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।”
राजनीति में ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि सहयोगी दलों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा गठबंधन को भीतर से कमज़ोर करे। लेकिन इंडिया गठबंधन जैसे विविध और बड़े गठबंधन में इस तरह की दरारें ज़्यादा गहरी और ज़्यादा दिखने वाली होती हैं।
अखिलेश और तेजस्वी — 2027 पर नज़र
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में एक स्पष्ट राजनीतिक एजेंडे के साथ आए। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन की निगाहें 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर टिकी हैं।
उनका संदेश था — “उत्तर प्रदेश में जनता के बीच बढ़ती असंतोष की भावना को देखते हुए गठबंधन अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।” महिलाओं की नाराज़गी का भी उन्होंने विशेष उल्लेख किया।
वहीं तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर बैलट पेपर से चुनाव हों तो बीजेपी कहीं नहीं टिकेगी। उन्होंने भी मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखे जाने के फैसले का समर्थन किया।
बीजेपी का पलटवार — “वजूद चोरी हुआ, वोट नहीं”
देखने वालों के लिए यह सिर्फ एक बैठक थी, लेकिन बीजेपी के लिए यह पलटवार का सुनहरा मौका था।
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तंज कसते हुए कहा कि एसआईआर तो केरल और तमिलनाडु में भी हुआ था, लेकिन वहां विपक्ष ने सरकार बनाई तो कोई शिकायत नहीं। पात्रा ने आरोप लगाया कि “सही मायने में कुछ चोरी हुआ है तो वह है इन दलों का राजनीतिक वजूद।”
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इंडिया गठबंधन को “अहंकारी” बताते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद इसका मनोबल टूट चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी, डीएमके और अन्य दल इसलिए बैठक से दूर रहे क्योंकि उन्हें डर है कि इंडिया गठबंधन के साथ जुड़ने का मतलब हार है।
बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन ने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा, “यह गठबंधन एक ऐसा सिस्टम बन गया है जो कभी ऑन होता है, कभी ऑफ। इसमें कितनी पार्टियां हैं, यह कोई नहीं जानता।”
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती — गठबंधन के सामने असली चुनौतियां
बैठक के बाद इंडिया गठबंधन ने एकता का संदेश दिया, लेकिन ज़मीनी सच्चाई ज़्यादा जटिल है। आम आदमी पार्टी — जो गठबंधन की शुरुआत से ही अलग-थलग रही है — बैठक में नहीं आई। हालांकि केजरीवाल ने ममता बनर्जी से अलग से मुलाकात ज़रूर की।
डीएमके की अनुपस्थिति दक्षिण भारत में गठबंधन की कमज़ोरी को उजागर करती है। और टीएमसी में भीतरी कलह ने बैठक की चमक को थोड़ा फीका कर दिया।
सवाल यह है कि क्या इंडिया गठबंधन अपनी आंतरिक दरारों को पाटते हुए एक प्रभावी विपक्षी ताकत बन सकता है? या यह बैठकें महज़ दिखावे की कवायद बनकर रह जाएंगी? चुनाव आयोग, संसद और जनता — सब इसका जवाब ढूंढ रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए भारतीय चुनाव आयोग और संसद की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: इंडिया गठबंधन की बैठक में कितनी पार्टियां शामिल हुईं?
उत्तर: कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के अनुसार इस बैठक में 25 विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया।
प्रश्न 2: डीएमके बैठक में क्यों नहीं आई?
उत्तर: डीएमके का कहना है कि तमिलनाडु में कांग्रेस ने उनका साथ छोड़कर टीवीके के साथ गठबंधन कर लिया है, इसलिए उनके लिए इस मंच पर बने रहने का कोई अर्थ नहीं।
प्रश्न 3: इंडिया गठबंधन ने मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी क्यों लिखने का फैसला किया?
उत्तर: एसआईआर (Special Intensive Revision), वोटर लिस्ट में हेरफेर और चुनाव की निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवालों को लेकर यह पत्र लिखा जाएगा।
प्रश्न 4: बीजेपी ने इस बैठक पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों का राजनीतिक “वजूद चोरी हुआ है,” और एकनाथ शिंदे ने गठबंधन को “अहंकारी” बताया।
प्रश्न 5: क्या आम आदमी पार्टी बैठक में शामिल हुई?
उत्तर: नहीं। हालांकि अरविंद केजरीवाल ने बैठक से अलग ममता बनर्जी से मुलाकात की थी।
प्रश्न 6: इंडिया गठबंधन आगे क्या करेगा?
उत्तर: गठबंधन हर दो महीने में बैठक करेगा, मानसून सत्र में समन्वय रखेगा और हर सुबह राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक होगी।
Key Takeaways
- इंडिया गठबंधन की बैठक में 25 दलों ने हिस्सा लिया और पांच प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनी — CJI को पत्र, शिक्षा मंत्री से इस्तीफा, महंगाई-बेरोज़गारी पर सर्वदलीय बैठक की मांग।
- डीएमके और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति गठबंधन में बढ़ती दरारों का संकेत है; तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में हार के बाद आंतरिक संकट से गुज़र रही है।
- बीजेपी ने गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि “वोट नहीं, विपक्षी दलों का वजूद चोरी हुआ है,” जबकि इंडिया गठबंधन 2027 के यूपी चुनाव पर नज़र रखते हुए रणनीति तैयार कर रहा है।
संपादकीय नोट
यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय मीडिया स्रोतों पर आधारित है।
लेखक परिचय
लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता
विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स
यह लेख पत्रकारिता मानकों, तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है।
