उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब रफ्तार पकड़ने लगी हैं। NDA सहयोगी दल सीट शेयरिंग UP चुनाव 2027 को लेकर भाजपा इसी महीने सहयोगियों के साथ औपचारिक विमर्श शुरू करने जा रही है। इसकी पहली झलक बृहस्पतिवार को दिल्ली में दिखी, जब निषाद पार्टी और सुभासपा के मुखिया भाजपा मुख्यालय पहुंचे।
पार्टी नेतृत्व केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और केंद्रीय संगठन की नई टीम के गठन का इंतजार कर रहा है — इन दोनों प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही सीट बंटवारे पर बातचीत औपचारिक रूप ले सकेगी।
संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर की भाजपा नेतृत्व से मुलाकात
मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की।
इसके बाद राजभर और निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद ने यूपी भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री सुनील बंसल से भी बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक इन मुलाकातों में दोनों नेताओं ने सीट बंटवारे पर जल्द विमर्श शुरू करने का अनुरोध किया।
भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं को आश्वासन दिया है कि इसी महीने के अंत तक विमर्श की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पार्टी भी मानती है कि विधानसभा चुनाव की तैयारियां समय रहते शुरू होनी चाहिए।
NDA सहयोगी दल सीट शेयरिंग UP चुनाव 2027 — पंकज चौधरी की नई टीम का गणित
सीट बंटवारे की चर्चा के साथ-साथ यूपी भाजपा संगठन में भी बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम पर अंतिम फैसला हो चुका है। चौधरी और संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस संबंध में पार्टी अध्यक्ष और संगठन महासचिव से मुलाकात की है।
| मुद्दा | स्थिति |
|---|---|
| सीट बंटवारा विमर्श | इसी महीने के अंत तक शुरू होगा |
| क्षेत्रीय अध्यक्ष (6) | गोरखपुर-वाराणसी का पेच सुलझा, इसी हफ्ते घोषणा |
| कार्यकारिणी में नए चेहरे | 50 प्रतिशत नई सदस्यता |
| साझा प्रचार रोडमैप | जुलाई तक अंतिम रूप मिलने की संभावना |
सूत्रों के मुताबिक छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में से गोरखपुर और वाराणसी को लेकर मामला अटका हुआ था, जिसे अब सुलझा लिया गया है। चौधरी इसी हफ्ते अपनी नई टीम की घोषणा कर सकते हैं, जिसमें सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के साथ विभिन्न मोर्चों में नए चेहरों को मौका मिलेगा।
यहीं से मामला दिलचस्प हो जाता है — संगठन में बदलाव और सीट बंटवारे की कोशिशें एक साथ चल रही हैं, और दोनों का असर सीधे चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा।
सेवा पखवाड़ा और जुलाई की डेडलाइन
फिलहाल भाजपा 5 जून से 21 जून तक सेवा पखवाड़ा चला रही है। इसी अवधि में केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और केंद्रीय संगठन की नई टीम बनने की प्रक्रिया भी चल रही है। पार्टी नेतृत्व की योजना है कि इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद, अगले महीने तक सीट बंटवारे और चुनाव प्रचार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाए।
संक्षेप में कहें तो — जुलाई तक की समयसीमा।
रालोद की नई रणनीति — पश्चिमी यूपी की सीमा से बाहर विस्तार
NDA सहयोगी दल सीट शेयरिंग UP चुनाव 2027 की तस्वीर में रालोद की भूमिका भी अहम होने जा रही है। पार्टी ने अगले विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी है।
प्रदेश कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला केवल संगठनात्मक रूटीन नहीं माना जा रहा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद NDA का हिस्सा बनने के साथ नेतृत्व का मानना है कि गठबंधन में प्रभावी भूमिका के लिए केवल राजनीतिक विरासत काफी नहीं — मजबूत संगठन और व्यापक जनाधार भी जरूरी है।
कागजों पर कहानी कुछ और दिखती है, जमीन पर कुछ और। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई जिलों में संगठन की सक्रियता अपेक्षित स्तर पर नहीं थी और सदस्यता अभियान को लेकर भी नेतृत्व संतुष्ट नहीं था।
अब रालोद जाट राजनीति और किसान आंदोलन के दायरे से आगे बढ़ते हुए अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की तैयारी में है, ताकि नए क्षेत्रों में संगठन विस्तार किया जा सके।
आगे क्या — NDA सहयोगी दल सीट शेयरिंग UP चुनाव 2027 पर निगाहें
अगले कुछ हफ्तों में तीन चीजें साफ होंगी — केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार, भाजपा की नई संगठनात्मक टीम, और सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे का खाका। तीनों आपस में जुड़े हैं, और तीनों का सीधा असर 2027 के चुनावी मैदान पर पड़ेगा।
निषाद और राजभर जैसे सहयोगी दल पहले से ही दबाव बना रहे हैं कि बातचीत जल्द शुरू हो। दूसरी ओर रालोद जैसे साझेदार अपने संगठन को मजबूत कर गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी का दावा पुख्ता करने में जुटे हैं। आने वाले हफ्ते बताएंगे कि भाजपा इन सभी समीकरणों को कैसे संतुलित करती है।
लेखक परिचय
लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता
विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स
संपादकीय नोट: यह लेख पत्रकारिता मानकों, तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है।
