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Tuesday, 23 Jun 2026

गोवा अवैध लौह अयस्क खनन मामला: ED ने 1023 करोड़ की संपत्ति की जब्ती, सिंगापुर तक पहुंची कार्रवाई

गोवा में अवैध लौह अयस्क खनन के मामले में ED ने सलगांवकर ग्रुप से जुड़ी 1,023 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है, जिसमें भारत और सिंगापुर दोनों जगह की संपत्तियां शामिल हैं।

 

गोवा अवैध लौह अयस्क खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 1,023 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। यह कार्रवाई गोवा के सलगांवकर ग्रुप और उससे जुड़े AVS ग्रुप के खिलाफ की गई है, जिसमें भारत के साथ-साथ सिंगापुर में मौजूद संपत्तियां भी शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार यह मामला गोवा में 2007 के बाद हुई कथित गैर-कानूनी माइनिंग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसकी जांच गोवा पुलिस CID की एक FIR से शुरू हुई थी।

प्रवर्तन निदेशालय ने रविवार को एक बयान में बताया कि यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है। एजेंसी का कहना है कि गोवा में लौह अयस्क की गैर-कानूनी निकासी, बिक्री और निर्यात के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई, जिसे बाद में विदेशी शेल कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर किया गया।

सलगांवकर ग्रुप पर ED की कार्रवाई, क्या है पूरा मामला

ED के अनुसार, 19 जून को सलगांवकर ग्रुप और उससे संबद्ध AVS ग्रुप के खिलाफ PMLA के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस ग्रुप ने भारत के बेशकीमती लौह अयस्क को कौड़ियों के भाव में विदेश भेजा, जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और आरोप अदालत में साबित होना बाकी है।

एजेंसी के अनुसार जब्त की गई संपत्तियों का विवरण इस प्रकार है —

संपत्ति का प्रकार मूल्य (करोड़ रुपये में)
भारत में 99 अचल संपत्तियां 459.10
सिंगापुर में 31 अचल संपत्तियां 471.32
भारतीय कंपनियों में इक्विटी शेयर 93.42
कुल 1,023.85

ED के अनुसार ये संपत्तियां स्वर्गीय अनिल सलगांवकर की एस्टेट (उनकी एडमिनिस्ट्रेटर लक्ष्मी अनिल सलगांवकर के माध्यम से), सलगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज़, शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स, एस कांतिलाल एंड कंपनी, सालिथो ओर्स, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स और सुवर्णरेखा पोर्ट के नाम पर दर्ज थीं।

गोवा पुलिस CID की FIR से शुरू हुई जांच, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

जांच एजेंसी के अनुसार, यह पूरा मामला गोवा पुलिस CID की एक FIR से जुड़ा है, जिसके आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। ED ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट के 2014 और 2018 के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि 22 नवंबर 2007 के बाद, नई माइनिंग लीज जारी होने तक, गोवा में हुई सभी माइनिंग गतिविधियां गैर-कानूनी मानी गई थीं।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी अवधि में AVS ग्रुप ने दस माइनिंग लीज का संचालन किया और 2007 से 2012 के बीच लौह अयस्क की अवैध निकासी, बिक्री व निर्यात के जरिए 2,492.95 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई की। फिलहाल यह आंकड़ा एजेंसी की जांच पर आधारित है और न्यायिक प्रक्रिया में इसकी पुष्टि होनी बाकी है।

ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स की शेल कंपनियों के जरिए चीन को निर्यात का आरोप

मामले में सबसे चर्चित पहलू यह है कि जांच एजेंसी के अनुसार गैर-कानूनी तरीके से निकाले गए लौह अयस्क को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में बनी शेल कंपनियों यानी स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPV) को बेहद कम कीमत पर निर्यात किया गया। एजेंसी का दावा है कि ये कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं और इनका इस्तेमाल अयस्क को आगे चीन को दोबारा बेचने के लिए किया जाता था। इस तरीके से कथित तौर पर 2,744.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुनाफा कमाया गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ED के अनुसार, अपराध से हुई कुल कमाई यानी “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” का आकलन 5,237.84 करोड़ रुपये किया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इन फंड्स को BVI और सिंगापुर स्थित SPV के माध्यम से घुमाया गया, इनसे विदेश में बड़ी मात्रा में चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं, और कुछ हिस्सा शेयर कैपिटल के रूप में वापस भारत लाया गया।

सलगांवकर ग्रुप की प्रतिक्रिया और आगे की कानूनी प्रक्रिया

संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया स्रोत सामग्री में उपलब्ध नहीं है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक यह मामला जांच के दायरे में है और ED द्वारा जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के बाद इसकी पुष्टि के लिए आगे न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। आरोप साबित होने तक संबंधित पक्षों को निर्दोष माना जाना चाहिए।

गोवा अवैध लौह अयस्क खनन मामला राज्य में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार राज्य में अनियंत्रित खनन गतिविधियों पर सख्त टिप्पणी कर चुका है। ED की इस नई कार्रवाई से एक बार फिर गोवा की माइनिंग इंडस्ट्री और इससे जुड़े बड़े कारोबारी समूहों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में और जानकारी सामने आने की संभावना है, क्योंकि जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई जारी रखने का संकेत दिया है।

संपादकीय नोट

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय मीडिया स्रोतों पर आधारित है।


लेखक परिचय

लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता

विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स

यह लेख पत्रकारिता मानकों, तथ्य आधारित रिपोर्टिंग और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है।