बीकानेर की गलियों से शुरू हुआ सफर
राजस्थान के बीकानेर शहर का लालजी परिवार आज पूरी दुनिया में ‘बीकानेरवाला’ के नाम से मशहूर है। इस परिवार के बेटे श्याम सुंदर अग्रवाल ने अपने बेटे मनीष अग्रवाल के साथ मिलकर इस ब्रांड को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। साल 2018 में श्याम सुंदर को ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन के खास सम्मेलन में भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने “लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” से नवाजा। ये सम्मान उनकी मेहनत, जुनून और देसी खाने को दुनिया तक ले जाने के जज्बे का सबूत है।
सपनों को सच करने की जिद
श्याम सुंदर अग्रवाल ने दिल खोलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हमारा सपना है कि ‘बीकानेरवाला’ का नाम हर जगह गूंजे। मैं चाहता हूं कि भारत का देसी खाना, हमारी संस्कृति, दुनिया के हर कोने में पहुंचे। इसके लिए मैं दिन-रात मेहनत करता हूं।” उनके इस जुनून ने बीकानेर की छोटी सी दुकान को दुनिया भर में मशहूर ब्रांड बना दिया।

1905 में खुली थी पहली दुकान
श्याम सुंदर के पिता लाला केदारनाथ अग्रवाल, जिन्हें लोग प्यार से ‘काकाजी’ बुलाते थे, ने 1905 में बीकानेर में ‘बीकानेर नमकीन भंडार’ नाम की दुकान शुरू की। इस छोटी सी दुकान में मिठाइयां और नमकीन बिकती थीं। 1950 के दशक में काकाजी अपने भाई सत्यनारायण अग्रवाल के साथ दिल्ली आए और भुजिया, नमकीन और रसगुल्लों के साथ ‘बीकानेरवाला’ की नई शुरुआत की। उस समय देसी खाने को विदेशों में मशहूर करने का सपना देखना भी बड़ी बात थी।
दुनिया भर में 200 से ज्यादा दुकानें
आज ‘बीकानेरवाला’ की 200 से ज्यादा दुकानें हैं, जो अमेरिका, दुबई, न्यूजीलैंड, कनाडा, सिंगापुर, नेपाल, कतर और बहरीन जैसे देशों में हैं। हाल ही में अयोध्या और गोरखपुर में भी नई दुकानें खोली गई हैं। श्याम सुंदर के बेटे मनीष अग्रवाल ने 35 से ज्यादा देशों में ब्रांड का नाम फैलाया। कंपनी ने रेडी-टू-ईट (RTE) खाने में भी कदम रखा है, जो आज की तेज जिंदगी में लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
नमकीन ने बदली किस्मत
श्याम सुंदर बताते हैं, “उस जमाने में दिल्ली में मिठाइयां ज्यादा मशहूर नहीं थीं। लोग देसी घी में बनी चीजें खाते थे। तेल का चलन कम था।” उन्होंने मूंगफली के तेल से नमकीन बनाना शुरू किया। पहले-पहल लोगों को देसी घी की खुशबू और स्वाद के आगे तेल की नमकीन अच्छी नहीं लगी। लेकिन तेल से बनी नमकीन का स्वाद और लंबा चलने वाला गुण लोगों को भाने लगा। जल्द ही मोती बाजार से चांदनी चौक तक उनकी दुकानों पर नमकीन और मिठाइयों के लिए लाइनें लगने लगीं।

‘बीकानेरवाला’ के एमडी श्री श्याम सुंदर अग्रवाल और वरष्ठि पत्रकार महेंद्र प्रताप सिंह की बातचीत का दृश्य।
काजू की बर्फी ने मचाया धमाल
1960-62 में 10वीं पास करने के बाद श्याम सुंदर दिल्ली आए। उनके पिता ने उन्हें मिठाई और नमकीन के कारखाने में काम पर लगा दिया। उन्होंने सबसे पहले ‘काजू की बर्फी’ बेची, जो उस समय दिल्ली में नई थी। सिर्फ एक महीने में ये बर्फी इतनी मशहूर हुई कि सुबह से शाम तक उनके पास सांस लेने की फुर्सत नहीं थी। श्याम सुंदर गर्व से कहते हैं, “हमने दिल्ली में 10 रुपये किलो की ‘काजू बर्फी’ बेची, जो आज भी लोगों के दिलों में बसी है।”
5000 करोड़ का देसी कारोबार
आज ‘बीकानेरवाला’ का कारोबार 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। कंपनी हर दिन 60 हजार किलो से ज्यादा नमकीन बनाती है और 500 से ज्यादा तरह के प्रोडक्ट्स बेचती है। श्याम सुंदर अग्रवाल की मेहनत और देसी जायके ने ‘बीकानेरवाला’ को न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया।
